Wednesday, January 21, 2026
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बिहार के आदिवासी महिलाओं की मछली आचार की धूम

स्थानीय जलस्रोतों से आसानी से उपलब्ध मछलियों का उपयोग कर महिलाएं पारंपरिक विधि से अचार तैयार कर रही हैं। स्वाद और गुणवत्ता के चलते उनके उत्पादों की मांग अब स्थानीय बाजारों से बाहर तक बढ़ने लगी है। स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से संगठित इन महिलाओं ने कच्चे माल की खरीद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग से लेकर बिक्री तक हर चरण को खुद संभाला है।

चंपारण/पटना। बिहार के वेस्ट चंपारण जिले में आदिवासी महिलाओं ने अपनी मेहनत और सामूहिक प्रयास से मछली अचार (फिश पिकल) का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भरता की एक नई कहानी लिखी है। यह पहल न केवल उनके लिए स्थायी स्वरोजगार का साधन बनी है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रही है।

स्थानीय जलस्रोतों से आसानी से उपलब्ध मछलियों का उपयोग कर महिलाएं पारंपरिक विधि से अचार तैयार कर रही हैं। स्वाद और गुणवत्ता के चलते उनके उत्पादों की मांग अब स्थानीय बाजारों से बाहर तक बढ़ने लगी है। स्वयं सहायता समूहों (SHG) के माध्यम से संगठित इन महिलाओं ने कच्चे माल की खरीद, प्रसंस्करण, पैकेजिंग से लेकर बिक्री तक हर चरण को खुद संभाला है।

महिलाओं का कहना है कि पहले वे सीमित आय और अनिश्चित रोजगार पर निर्भर थीं, लेकिन इस पहल ने उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मसम्मान दोनों दिया है। नियमित आय से वे अब बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों पर बेहतर खर्च कर पा रही हैं। कई महिलाओं ने छोटे स्तर पर बचत भी शुरू कर दी है।

प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं की ओर से प्रशिक्षण, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच में सहयोग मिलने से इस उद्यम को और विस्तार मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि कोल्ड-चेन, खाद्य सुरक्षा मानकों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए, तो यह मॉडल राज्य के अन्य आदिवासी इलाकों में भी दोहराया जा सकता है।

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