Saturday, November 29, 2025
HomeTop Newsयूनेस्को मुख्यालय में लगी डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा

यूनेस्को मुख्यालय में लगी डॉ. बीआर आंबेडकर की प्रतिमा

भारत द्वारा 1949 में भारतीय संविधान को अपनाए जाने की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर यूनेस्को जैसे संस्थान में यह प्रतिमा स्थापित होना बताता है कि बी. आर आम्बेडकर आधुनिक लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सबसे प्रासंगिक वैश्विक विचारकों में से एक हैं।

यूनेस्को मुख्यालय पेरिस में डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमा26 नवंबर यानी संविधान दिवस का दिन इस साल खास रहा। इस दिन पेरिस स्थित UNESCO के मुख्यालय में बाबासाहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह पहली बार है जब किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था के मुख्यालय में भारत के संविधान निर्माता डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा स्थापित की गई है। यह स्थापना डॉ. आंबेडकर के वैश्विक प्रभाव को दर्शाती है। यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा को विश्व मंच पर उनके विचारों और योगदान को मिली बड़ी मान्यता के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत द्वारा 1949 में भारतीय संविधान को अपनाए जाने की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर यूनेस्को जैसे संस्थान में यह प्रतिमा स्थापित होना बताता है कि बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर के द्वारा समानता, सामाजिक न्याय, मानव गरिमा की रक्षा, वंचित तबके और महिलाओं के लिए शिक्षा का अधिकार और लोकतांत्रिक सशक्तिकरण के विचार और इस दिशा में किये गए काम सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया और समाजों के लिए भी प्रेरणा बन चुके हैं। यह प्रतिष्ठान दुनिया को याद दिलाता है कि अंबेडकर आधुनिक लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सबसे प्रासंगिक वैश्विक विचारकों में से एक हैं।

यूनेस्को मुख्यालय पेरिस में डॉ. आम्बेडकर की प्रतिमायूनेस्को के इस कदम पर खासकर भारत में खासा उत्साह है। तमाम अंबेडकवादी और न्याय पसंद लोग यूनेस्को के इस कदम की सराहना कर रहे हैं। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी इस पर खुशी जताते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखायह हमारे लिए अत्यंत गर्व की बात है कि संविधान दिवस के अवसर पर, पेरिस स्थित यूनेस्को मुख्यालय में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह डॉ. आंबेडकर और भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी भूमिका को उपयुक्त श्रद्धांजलि है। उनके विचार और आदर्श आज भी हम सभी को शक्ति और आशा प्रदान करते हैं।

यूनेस्कों के इस कदम पर तमाम अन्य प्रतिक्रियाएं भी सामने आई है। क्योंकि यह महज एक प्रतिमा नहीं है, बल्कि बाबासाहेब आंबेडकर की उस विरासत का सम्मान है जिसने मानवता को सिखाया कि समाज तभी आगे बढ़ता है जब हर व्यक्ति को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले। UNESCO में डॉ. आंबेडकर की प्रतिमा की स्थापना डॉ. अंबेडकर की विचारधारा के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत होने का प्रमाण है।

लोकप्रिय

अन्य खबरें

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Skip to content