तस्वीर में पीछे दिख रहा आवास, बंगला नंबर 1, तिलक मार्ग, इंडिया गेट है। यह वही ऐतिहासिक बंगला है जहां 1947-51 तक बाबा साहेब अंबेडकर भारत के कानून मंत्री की हैसियत से रहे, लेकिन उससे भी अधिक महत्व की बात ये है कि यही वह धरोहर हैं जहां बैठ कर बाबा साहेब ने इस देश का लोकतांत्रिक समतामूलक प्रबुद्ध संविधान लिखा। पहले यह रोड़
#हार्डिंग_एवेन्यू कहलाता था, लेकिन कांग्रेस शासनकाल में शरारत पूर्ण तरीके से इस जगह को घनघोर जातिवादी तिलक के नाम पर तिलक मार्ग का नाम दे दिया गया।
1978 से यहां पर पौलैंड के राजदूत का आवास है अभी भी यह बंगला अपने मूल रूप, जैसा बाबा साहेब के समय में था बना हुआ है। दो एकड़ एरिया में फैला यह बंगला, भारत के संवैधानिक इतिहास एवं नारी मुक्ति आंदोलन की एक महान धरोहर है जिसे विदेशी सरकार को सौंप कर सरकारों ने जघन्य ऐतिहासिक अत्याचार किया है। हालांकि पोलैंड के राजदूतों ने बाबा साहेब के अध्ययन कक्ष एवं अन्य यादों को अभी भी संजोकर रखा है और वो आने वाले हर राजदूत को बताकर जाते हैं कि यह बाबा साहेब की विरासत एवं ऐतिहासिक पूंजी है लेकिन भारतीय सरकारों का रवैया निहायत की गैर जिम्मेदाराना एवं अफ़सोसजनक रहा है।

यह भी सनद रहे कि इस बंगले में रहकर ही बाबा साहेब ने भारतीय नारी मुक्ति के ऐतिहासिक दस्तावेज
#हिंदू_कोड_बिल की रचना भी की थी और उसे संसद में पेश किया था लेकिन उस बिल को ब्राह्मणवादी तत्वों ने पारित नही होने दिया, और हिन्दू कोड बिल पास नहीं होने देने के विरोध में बाबा साहेब ने भारत के कानून मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया, और
#हार्डिंग_एवेन्यू_बंगला_नंबर_1 खाली कर,
#26_अलीपुर_रोड पर शिफ्ट हो गए और वही अपनी अंतिम सांस ली, आज वह आवास
#महा_परिनिर्वाण_भूमि के नाम से जाना जाता है। इसलिए बंगला नंबर एक तिलक मार्ग, नारी मुक्ति भूमि के रूप में भी स्वीकार की जानी चाहिए।
जब कभी भी संभव हो इस बंगले की यात्रा जरुर करनी चाहिए। साथ ही प्रबुद्ध समाज को अब और इंतजार न करते हुए, और खासतौर से उन लोगों को जो बाबा साहेब के आन्दोलन के लाभार्थी हैं इस ऐतिहासिक स्थल को इसकी महानता पुनर्स्थापित करने का आन्दोलन पूरी सिद्दत से शुरू करना चाहिये।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के दयाल सिंह कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. राजकुमार द्वारा यह तस्वीर 26 नवंबर, 2025 को 1 तिलक मार्ग, इंडिया गेट नई दिल्ली पर ली गई है।