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कर्नाटक के गडग में सरकार ने दलितों के लिए अलग से खुलवाई नाई की दुकान

स्थानीय दलितों ने कई बार अधिकारियों को शिकायत दी। इसके बाद प्रशासन ने दखल दिया और अब गांव में यह नई दुकान शुरू की गई है। गांव के कुछ लोग इसे अच्छा कदम बता रहे हैं, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह भी सोचने की बात है कि आज भी लोगों को बुनियादी सेवाओं के लिए अलग इंतजाम करना पड़ रहा है।

AI से बनाई गई सांकेतिक तस्वीरगडग (कर्नाटक)। कर्नाटक के गडग जिले के शिंगतलूर गांव में दलित समुदाय के लोगों के लिए एक नई नाई की दुकान खोली गई है। गांव के दलितों का कहना था कि उन्हें कई सालों से ऊँची जाति के नाई बाल काटने और शेविंग करने से मना कर देते थे। इसी शिकायत के बाद सामाजिक कल्याण विभाग, तालुक प्रशासन, तालुक पंचायत, दलित संगठनों और शिवशरण हड़पदा अप्पन्ना समाज ने मिलकर यह पहल की। इस दुकान को ‘अस्पृश्यता खत्म करो और समरस गांव बनाओ’ अभियान के तहत शुरू किया गया है।

सामाजिक कल्याण विभाग ने पड़ोसी गांव टिप्पापुर के रहने वाले बसवराज हड़पदा को यह दुकान दी है। अब वे गांव में ही लोगों के बाल काटेंगे और शेविंग करेंगे।

गांव के लोगों का कहना है कि पहले दलित परिवारों को बाल कटवाने के लिए दूसरे गांव जाना पड़ता था। इससे उन्हें परेशानी और खर्च दोनों उठाने पड़ते थे। बताया जाता है कि वीरभद्रेश्वर देव की पालकी यात्रा से जुड़ी कुछ परंपराओं के बाद हड़पदा समुदाय के लोगों को नाई सेवा देना बंद कर दिया गया था।

स्थानीय दलितों ने कई बार अधिकारियों को शिकायत दी। इसके बाद प्रशासन ने दखल दिया और अब गांव में यह नई दुकान शुरू की गई है। गांव के कुछ लोग इसे अच्छा कदम बता रहे हैं, लेकिन सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह भी सोचने की बात है कि आज भी लोगों को बुनियादी सेवाओं के लिए अलग इंतजाम करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि असली बदलाव तब होगा जब हर गांव में सभी को बराबरी से सेवा मिले।

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