इंडोनेशिया ओपन जीतने के बाद किदांबी श्रीकांत ने जीता ऑस्ट्रेलियन ओपन

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Kidambi Srikanth

भारत के शीर्ष बैडमिंटन खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत ने ऑस्ट्रेलियन ओपन में कई उलटफेर के साथ सुपरसीरीज पर कब्जा जमा लिया. रविवार को फाइनल में उन्होंने मौजूदा ओलिंपिक चैंपियन और वर्ल्ड नंबर-6 चीन के चेन लांग को 22-20, 21-16 से मात दी. इसके साथ ही श्रीकांत लगातार दो सुपर सीरीज खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए. वर्ल्ड नंबर-11 श्रीकांत हफ्तेभर में दूसरी बार सुपरसीरीज चैंपियन बने. 18 जून को उन्होंने इंडोनेशिया ओपन का खिताब जीता था. जिस समय रविवार को श्रीकांत सिडनी में फाइनल में खेल रहे थे उस वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में उन्हें इंडोनेशिया ओपन जीतने पर बधाई दी.

फाइनल से पहले तक श्रीकांत चीनी सुपरस्टार चेन लांग से पांच पर भिड़े थे और हर बार उन्हें हार मिली थी. लेकिन इस बार श्रीकांत की मौजूदा फॉर्म के आगे ‘चीन की दीवार’ ढह गई. श्रीकांत अबतक लगातार 10 मुकाबले जीत चुके हैं. श्रीकांत की वापसी में उनके नए कोच इंडोनेशिया के होंडोयो का बड़ा हाथ है. श्रीकांत को दांयी एड़ी में हेयरलाइन फ्रैक्चर के बाद तीन महीने तक बैडमिंटन कोर्ट से बाहर रहना पड़ा था.

आंध्र प्रदेश के गुंटूर के 24 साल के श्रीकांत चीन के वर्ल्ड नंबर-4 शी युकी को 21-10, 21-14 से मात देकर लगातार तीसरी बार सुपरसीरीज के फाइनल में पहुंचे थे. श्रीकांत यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के महज छठे शटलर हैं. उनसे पहले लिन डैन, ली चोंग वी, चेन लांग के अलावा बाओ चुनलाई और सोनी ड्वी कुनकोरो यह कारनामा कर चुके हैं.

श्रीकांत ने हमवतन बी. साई प्रणीत को 25-23, 21-17 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाई थी. इस जीत के साथ ही श्रीकांत ने सिंगापुर ओपन टूर्नामेंट के फाइनल में प्रणीत से मिली हार का बदला भी पूरा किया. श्रीकांत ने इससे पहले दूसरे दौर में उलटफेर करते हुए वर्ल्ड नंबर-1 द. कोरिया के सोन वान हो को 15-21, 21-13, 21-13 से मात दी थी.

श्रीकांत का यह चौथा सुपर सीरीज खिताब है. उन्होंने पिछले ही हफ्ते इंडोनेशिया ओपन, 2014 में चाइना ओपन और 2015 में इंडिया ओपन सुपर सीरीज खिताब जीते हैं. श्रीकांत ने शानदार प्रदर्शन के दम पर 22 जून को जारी विश्व रैंकिंग में 11 स्थानों की छलांग लगाकर 11वां स्थान हासिल किया था. जबकि उन्होंने अपने साथी भारतीय खिलाड़ी अजय जयराम को 15वें स्थान पर छोड़ दिया.

संसद का मानसून सत्र 17 जुलाई से

नई दिल्ली। संसद का मॉनसून सत्र इस बार 17 जुलाई से शुरू होगा. इस दिन राष्ट्रपति चुनाव होना है  जिसमें 776 से अधिक सांसद, विधायक मतदाता होगें. जानकारी के मुताबिक संसदीय मामलों की कैबिनेट कमेटी ने सत्र को 17 जुलाई से 11 अगस्त तक चलाने की सिफारिश की है. इस कैबिनेट कमेटी के राजनाथ सिंह रहे.

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति चुनाव के कारण सत्र को थोड़ा पहले शुरू किया गया है, जिसमें सांसद और विधायक मतदान करेंगे. संसद का मॉनसून सत्र आम तौर पर जुलाई महीने के अंत में शुरू होता है और अगस्त के अंत तक चलता है. मानसुन सत्र में 17 जुलाई से शुरू होने से सांसदों का दिल्ली में रहना सुनिश्चित होगा. मतदान संसद भवन में होगा.

लोकसभा सांसद विनोद खन्ना और राज्यसभा सांसद पी.गोवर्धन रेड्डी के निधन के मद्देनजर, सत्र के पहले दिन संसद के दोनों सदनों में शायद ही कामगाज हो पायेगा.

आईएसएई में मास्टर्स के लिए चुने गए 5 भारतीय, अगस्त में होंगे रवाना

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फ्रांस के बहुप्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्थान ‘इंस्टीट्यूट सुपेरियर दे लाएयरोनॉटिक एत दे लाएस्पेस’ (आईएसएई) में दो वर्ष के स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए पांच भारतीयों का चुनाव किया गया है. चयनित भारतीय अगस्त में तुलूज के लिए रवाना होंगे. अंगूर के बागानों के लिए मशहूर तुलूज विशालकाय एयरबस तथा कई अन्य एयरोस्पेस कंपनियों व अनुसंधान केंद्रों का स्थान है, जहां अंतरिक्ष संस्थान आईएसएई भी स्थित है.

पंजाब की रहने वाली 22 वर्षीय इंजीनियरिंग की छात्रा आरती कालरा को जब पता चला कि उनका चुनाव फ्रांस के प्रतिष्ठित एयरोस्पेस के लिए हुआ है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. आरती उन पांच मेधावी इंजीनियरिंग छात्रों में से ही एक हैं, जो आईएसएई-एमबीडीए प्रोग्राम ऑफ एक्सीलेंस के तहत फ्रांस के प्रतिष्ठित अंतरिक्ष संस्थान आईएसएई में चुने गए हैं. चंडीगढ़ की पीईसी यूनिवर्सिटी से स्नातक की पढ़ाई करने वाली आरती ने बताया कि जब अंतिम नतीजा आया तब मुझे ऐसा लगा मानों मेरे पंख लग गए हों. मेरे अंदर आसमान में उड़ने की इच्छा और मजबूत हो रही थी.

अमर उजाला बेव के मुताबिक लुधियाना के खन्ना कस्बे की रहने वाली आरती ने कहा कि मैं दुनिया को बताना चाहती हूं कि बेटियां कुछ भी कर सकती हैं. आरती के लिए यह बहुत ही गौरव की बात है. आरती के कॉलेज की मित्र राशिका जैन और दक्षिण भारत से तीन अन्य छात्रों को भी इस पूर्णकालिक छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है. दक्षिण भारत से चेन्नई के एसआरएम यूनिवर्सिटी के ईशान प्रकाश (22), बेंगलूरू के एमएस रमैया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के कार्तिक वेंकटरमन और सागर शेनॉय मणिकर का चुनाव किया गया है.

प. बंगाल: गौ तस्करी के शक में भीड़ ने की तीन लोगों की हत्या

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दिनाजपुर। पश्चिम बंगाल के दिनाजपुर जिले में गौ तस्करी के नाम पर हत्या का ताजा मामला सामने आया है. जानकारी में बताया गया कि गौ-तस्करी के शक में भीड़ ने तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी. यह घटना 22 जून की है. मारे गए तीनों के लोगों पर इलाके से गाय चोरी करने का आरोप लगाया गया है.

गाय चोरी के आरोप में नसीरुल हक,  मोहम्मद समीरुद्दीन और मोहम्मद नासिर नाम के शख्स को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. भीड़ की पिटाई से घायल हुए नसीरुल को पास ही हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. जबकि अन्य दो नासीर और समीरुद्दीन की मौके पर ही मौत हो गई थी.

जानकारी के मुताबिक करीब 10 लोगों का एक समूह गुरूवार रात गांव में घुसा. कथित तौर पर वे लोग गायों को चुराने के लिए आए थे. गांव में इससे पहले भी जानवर चोरी हो चुके थे जिसके चलते गांव वाले सतर्क थे. कथित तौर पर उन लोगों ने दो घरों से गायों को उठा लिया और जैसे ही वे तीसरे घर की ओर बढ़ रहे थे उस दौरान किसी ने शोर मचाकर सबको इकट्ठा कर लिया. बाकि लोग भाग गये पर 3 लोगों को भीड़ ने घेर लिया जिसके बाद उनकी बुरी तरह से पिटाई की गयी, भीड़ ने उन्हें इतनी बुरी तरह से मारा की उनकी दो लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया तथा एक व्यक्ति की मौत अस्पताल में हो गयी.

इसके बाद पुलिस ने जानकारी देते हुए बताया कि केस दर्ज होने के बाद तीन लोगों असित बसु, असीम बसु और कृष्णा पोदा को पकड़ा गया है. पकड़े गए तीनों लोग एक गांव के निवासी हैं जो हत्या में मुख्य आरोपी के रुप में सामने आये हैं.

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत छत्रपति शाहू जी महाराज की 143 वीं जयंती आज

Chhatrpati Sahu ji Maharaj

छत्रपति शाहूजी महाराज महाराष्ट्र राज्य के निकट कोल्हापुर संस्थान के राजा थे. ये शूद्र जाति से थे. महाराज ने अपने शासन में लगे सी ब्राह्मणों को हटा दिया था. ब्राह्मणों को हटाकर बहुजन समाज को मुक्ति दिलाने का क्रांतिकारी कदम छत्रपति शाहूजी ने ही उठाया. साथ ही शूद्रों एवं दलितों के लिए शिक्षा का दरवाजा खोलकर उन्हें मुक्ति की राह दिखाने में बहुत बड़ा कदम उठाया.

सामाजिक क्रांति के अग्रदूत छत्रपति शाहूजी महाराज राजर्षि का जन्म 26 जून 1874 को कोल्हापुर में हुआ था. उनके पिता का नाम श्रीमंत जयसिंह राव आबा साहब घाटगे तथा उनकी माता का नाम राधाबाई साहिबा था. शाहूजी के जन्म का नाम यशवंतराव था. आबा साहब, यशवंतराव के दादा थे. श्रीमान आबा साहब ने यह शासन कार्य चौथे-शिवाजी महाराज की कब्द होने के कारण किया गया था. पश्चात चौथे शिवाजी का अंत होने के बाद शिवाजी महाराज की पत्नी महारानी आनंदी बाई साहिबा ने 1884 में यशवंत राव को गोद ले लिया था. इसके बाद यशवंतराव का नाम शाहू छत्रपति रखा गया था. इन्हें कोल्हापुर संस्थान का वारिस बना दिया गया था. शाहू महाराज की शिक्षा राजकोट में स्थापित राजकुमार कॉलेज में हुई. राजकोट की शिक्षा समाप्त करके शाहूजी को आगे की शिक्षा पाने के लिए 1890 से 1894 तक धाराबाड में रखा गया. शाहू महाराज ने अंग्रेजी, इतिहास और राज्य कारोबार चलाने की शिक्षा ग्रहण की. अप्रैल 1897 में राजा शाहू का विवाह खान बिलकर की कन्या श्रीमंत लक्ष्मी बाई से संपन्न हुआ. विवाह के समय लक्ष्मी बाई साहिबा की उम्र महज 11 वर्ष की ही थी.

जब छत्रपति शाहूजी महाराज की आयु 20 वर्ष थी, तो इन्होंने करविर (कोल्हापुर) संस्थान के अधिकार ग्रहण करके सत्ता की बागडोर अपने हाथ में ले ली तथा शासन करने लगे. 1894 में इनका राज्याभिषेक समारोह हुआ. आमतौर पर सभी राजाओं की छवि जनता की आमदनी को करों के माध्यम से हड़पने एवं जबरन वसूली की थी लेकिन छत्रपति शाहू ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने सबसे बड़ा काम राजव्यवस्था में परिवर्तन करके किया. उनका मानना था कि संस्थान की वृद्धि में उन्नति के लिए प्रशासन में हर जाति के लोगों की सहभागिता जरूरी है. तब उनके प्रशासन में सिर्फ ब्राह्मण जाति के लोग ही रे हुए थे. जबकि बहुजन समाज के केवल 11 अधिकारी हैं. इसके लिए ब्रह्मणों ने एक चाल के तहत बहुजन समाज को शिक्षा से दूर रखा था. ताकि पढ़-लिखकर ये सरकारों में शामिल न हो सकें. शाहूजी इस बात से चिंतित रहते थे. उन्होनें प्रशासन में ब्राह्मणों के इस एकाधिकार को समाप्त करने के लिए तथा बहुजन समाज की भागीदारी के लिए आरक्षण कानून बनाया. इस क्रांतिकारी कानून के अंतर्गत बहुजन समाज के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था थी.

देश में आरक्षण की यह पहली व्यवस्था थी. तब तक बहुजन समाज के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद थे. उन्हें तिरस्कार की जिंदगी जीने के लिए मजबूर किया जाता था. इधर दूसरी ओर शाहूजी महाराज द्वारा बहुजन समाज को आगे बढ़ाने का प्रयास ब्राह्मण वर्ग सहन नहीं कर सका. शूद्र राजाओं के सहारे जीने वाले ब्राह्मण पुरोहितों ने ही अपने ब्राह्मणी धर्म का वर्चस्व को बचाने के लिए छत्रपति शाहू महाराज को शूद्र कहकर अपमानित किया था. शाहू महाराज हर साल कार्तिकी स्नान के लिए पंच गंगा नदी पर जाते थे. सन् 1899 में उनके ही राजपुरोहित ने महाराज को शूद्र कहकर नीचा दिखाया. शूद्रों के स्नान के समय ब्राह्मण पुराणोक्त मंत्र बोल कर स्नान की विधि करते थे, तभी स्नान का ला माना जाता था. शाहू राजा की स्नान विधि भी राज पुरोहित ने पुराणोक्त पद्यति से कराई थी. इससे महाराज शाहू आग बबूला हो उठे और राजपुरोहितों की तनख्वाह बंद कर उनको इस धर्म के कार्य से हटा दिया. इस घटना से शाहू राजा के क्रांतिकारी अंतरमन को धक्का पहुंचा.

अब शाहूजी ने पूर्ण निष्ठा व विश्वास के साथ इस व्यवस्था (ब्राह्मणवादी) को खंडित करने का निश्चय किया. उनके जीवन पर ज्योतिबा फुले का काफी प्रभाव था. फुले के देहांत के बाद महाराष्ट्र में चले सत्य शोधक समाज आंदोलन का कारवां चलाने वाला कोई नायक नेता नहीं था. 1910 से 1911 तक शाहू महाराज ने इस सत्यशोधक समाज आंदोलन का अध्ययन किया. 1911 में राजा शाहूजी ने अपने संस्थान में सत्य शोधक समाज की स्थापना की. कोल्हापुर संस्थान में शाहू महाराज ने जगह-जगह गांव-गांव में सत्यशोधक समाज की शाखाएं स्थापित की. सन् 1932 से कोल्हापुर में सत्यशोधक समाज आंदोलन द्वारा जागृति जत्था लगाना प्रारं किया. सत्यशोधक पाठशाला से बहुजन समाज के विद्यार्थियों को धर्म ज्ञान का प्रशिक्षण देकर पुरोहितों के मुंह पर थप्पड़ लगाया. महाराज ने कोल्हापुर शहर में सत्यशोघक समाज कार्यालय की स्थापना की. धर्म के नाम पर होने वाले शोषण के विरूद्ध बहुजन समाज का मुक्ति संग्राम चलाकर शाहूजी ने संस्थानों के इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई.

18 अप्रैल 1901 में मराठाज स्टुडेंटस इंस्टीट्यूट एवं विक्टोरिया मराठा बोर्डिंग संस्था की स्थापना की और 47 हजार रूपये खर्च करके इमारत बनवाई. 1904 में जैन होस्टल, 1906 में मॉमेडन हॉस्टल और 1908 में अस्पृश्य मिल क्लार्क हॉस्टल जैसी संस्था का निर्माण करके साहू जी महाराज ने शिक्षा फैलाने की दिशा में महत्वपूर्ण काम किया जो मिल का पत्थर साबित हुआ. अज्ञानी और पिछड़े बहुजन समाज को ज्ञानी, संपन्न एवं उन्नत बनाने हेतु छत्रपति राजा ने अपने जीवन का एक-एक क्षण समर्पित कर दिया. शाहूजी महाराज ने 1912 में प्राथमिक शिक्षा अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा देने के बारे में कानून बनाया तथा उसे अमल में भी लाए. 1917 में पुनर्विवाह का कानून भी पास किया. जब उन्हें पता चला कि डॉ. अंबेडकर अमेरिका से पढ़ाई पूरी करके देश में वापस आ गए हैं, तो वे उनसे मिलने के लिए सीमेंट चाल (मुंबई) में पहुंचे. उन्होंने बाबा साहेब को गले लगाया और कहा कि डॉक्टर तुम्हारे रूप में दलित समाज को सही नेता मिल गया हैं. सामाजिक परिवर्तन के कार्य को गतिमान करने के लिए शाहूजी ने मूकनायक पाक्षिक पत्रिका के लिए आर्थिक योगदान किया. 6 मई 1922 को बहुजन समाज के हित दक्ष राजा छत्रपति शाहू महाराज का देहांत हुआ, जिससे आरक्षण के प्रवर्तक का अंत हो गया.

केजरीवाल के खिलाफ सबूत देंगे कुमार विश्वास

kumar viswasनई दिल्ली। दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने बीते रविवार को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इंडिया अगेंस्ट करप्शन के कार्यकर्ता सम्मेलन में कहा कि आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास ने केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार संबंधी सबूतों को स्वीकार कर लिया है और तीन दिन में कोई जवाब देने की बात कही है.

बीते दिनों भ्रष्टाचार के सबूत लेकर कपिल मिश्रा कुमार विश्वास के घर भी गए थे पर उस वक्त कुमार नहीं मिले थे. तब से कपिल मिश्रा लगातार कुमार विश्वास से भ्रष्टाचार के मामलों पर उनकी राय जानने की कोशिश में जुटे थे. कपिल ने इस मसले में ट्वीट करके बताया कि कुमार विश्वास ने 16 हजार पन्नो का सबूत इंडिया अगेंस्ट करप्शन के एक कार्यकर्ता प्रभात के द्वारा स्वीकार कर लिया है और कहा है कि तीन दिनो में इसका जवाब देंगे.

कपिल मिश्रा ने इन सभी सबूतों को दो दिन के भीतर यानी मंगलवार तक लोकायुक्त को देने की बात कही है. कपिल ने कहा कि वो पहले ही केजरीवाल और उनके सहयोगियों के खिलाफ कई एफआईआर, सीबीआई और एसीबी में दर्ज करा चुके है अब लोकायुक्त में भी भ्रष्टाचार के सबूत देंगे. आम आदमी पार्टी से बर्खास्त होने के बाद कपिल मिश्रा लगातार केजरीवाल और दिल्ली सरकार पर हमला बोल रहे हैं. उन्होंने कई बार प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सार्वजनिक तौर पर दिल्ली सरकार और केजरीवाल पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं.

जमीन से समुद्र तक  ISRO के सैटलाइट्स से भारतीय सेना मजबूत

ISRO के सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में भेजे गए कार्टोसैट-2 सीरीज के ‘आई इन द स्काई’ सैटलाइट के सफलत लॉन्च के बाद भारतीय सेना और मजबूत हो गई है. भारतीय सेना के पास अब दुश्मन देशों पर नजर बनाए रखने के लिए 13 सैटलाइट्स हो गए हैं.

भारतीय सेना सैटलाइट्स के माध्यम से जल और थल दोनों जगहों पर सेना देश के दुश्मनों पर रखेगी. सूत्रों की माने तो इन रिमोट सेंसिंग सैटलाइट्स में से अधिकांश को पृथ्वी के काफी करीब रखा गया है. रिमोट सेंसिंग उपग्रह की विभेदन क्षमता 0.6 मीटर की है. इसका अर्थ यह है कि यह पहले से भी छोटी चीजों की तस्वीरें ले सकता है.

सूत्रों की माने तो इसके माध्यम से आतंकी शिविरों और बंकरों आदि की पहचान के लिए किया जा सकता है. वहीं भारतीय सेना अब अब भारतीय सेना कार्टोसेट-2 सैटेलाइट के साथ कार्टोसेट-1, रीसेट-1 और रीसेट-2 सेटेलाइट से भी भारत के दुश्मनों की निगरानी करेगी. हालांकि इनमें से कुछ सैटलाइट्स को जिओ ऑर्बिट में भी रखा गया है.

भारतीय नेवी जी-सेट सेटेलाइट के माध्यम से समंदर में होने वाली हर हलचल पर अपनी नजर रखेगी. नेवी इसकी सहायता से दुश्मनों की हर गतिविधियों पर नजर रखेगी. इसके अलावा जरूरत पड़ने पर युद्धपोतों, पनडुब्बियों, विमानों से सम्पर्क साध सकेगें.

गुलमर्ग रोपवे केबल कार हादसे में 7 लोगों की मौत

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जम्मू कश्मीर के बारामूला जिले के स्काई रिसार्ट गुलमर्ग में रोपवे पर एक पेड़ गिर जाने से हुए हादसे में सात पर्यटकों की मौत हो गई. मृतकों में से चार लोग दिल्ली के एक ही परिवार के थे. जानकारी के अनुसार गुलमर्ग गोंदोला रोपवे पर पेड़ गिर जाने से केबल कार नीचे गिर गई. बताया गया कि तेज हवाओं के कारण पेड़ जड़ से उखड़ गया था जो सीधे केबल कार के ऊपर गिरा..

हादसे के शिकार सात लोगों चार लोग शालीमार बाग, दिल्ली के एक ही परिवार से हैं. उनकी पहचान जयंत अंद्रास्कर, उनकी पत्नी मनशिया अंद्रास्कर और उनकी दो बेटियों अनग्हा तथा जाहनवी के रूप में हुई है. अधिकारी ने बताया कि मुख्तार अहमद नाम के व्यक्ति की भी मौत हो गई.

गुलमर्ग केबल कार दो चरणों में लोगों को समुद्र तल से 13,780 फुट की ऊंचाई तक ले जाती और ले आती है. यह दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची केबल कार परियोजाना है, जिसकी परिवहन क्षमता 600 व्यक्ति प्रति घंटा है. ऊंचाई आधिक होने के कारण इस रोपवे पर हमेशा खतरा बना रहता है और अब यह हादसा सामने आया.

कमाई में फिसड्डी हुई सलमान की ‘ट्यूबलाइट’

मुंबई। सुपरस्टार सलमान खान की फिल्में हर बार अच्छा खासा कमाल दिखाती हैं, लेकिन सलमान खान की हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ ने उनके फैंस को निराश किया है. तीन दिन में इस फिल्म ने 64 करोड़ की ही कमाई की है. सलमान की पिछली फिल्मों की कमाई के मुकाबले यह बहुत ही कम है.

मार्केट एनालिस्ट तरन आदर्श ने ट्वीट करके फिल्म की कमाई का आंकड़ा बताया. फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ ने पहले दिन यानि शुक्रवार को 21.15 करोड़, दूसरे दिन 21.17 करोड़ और तीसरे दिन 22.45 करोड़ की कमाई की है. कुल मिलाकर इस फिल्म ने केवल 64.77 करोड़ की कमाई की है.

हर बार की तरह इस बार भी सलमान खान के फैंस को ईद के मौके पर सलमान की नई फिल्म के रुप में ईदी का इंतजार था, लेकिन फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ उनकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई. साल 2011 से 2016 तक लगातार ईद पर रिलीज हुई सलमान खान की फिल्मों की लिस्ट में फिल्म ‘ट्यूबलाइट’ सबसे कम कमाई करने वाली फिल्म बन गई है.

इंद्राणी मुखर्जी पर लगा जेल में दंगा करने का आरोप, एफआईआर दर्ज

मुंबई। अपनी बेटी शीना बोरा की हत्या के आरोप में जेल में बंद इंद्राणी मुखर्जी उन 200 महिला कैदियों में शामिल है, जिन पर जेल अधिकारियों ने शुक्रवार को एक महिला कैदी की मौत हो जाने के बाद दंगा भड़काने का आरोप लगाया है.

मुंबई के बीचोंबीच स्थित भायखला जेल के भीतर से मिली तस्वीरों में 44-वर्षीय इंद्राणी मुखर्जी जेल में हुए विद्रोह के दौरान जेल की छत पर अन्य महिला कैदियों के साथ खड़ी दिखाई दे रही है. इंद्राणी ने ही अन्य महिला कैदियों को कथित रूप से भड़काया और उन्हे अपने बच्चों को ढाल बनाने की सलाह दी.

उधर, जेल में महिला कैदी मंजुला शेट्टे की मौत का मामला भी गहरा गया है, और नागपाड़ा पुलिस ने महिला जेलर और पांच अन्य जेलकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर लिया है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक मंजुला शेट्टे के शरीर पर अंदरूनी ज़ख्म थे, जो मौत की वजह हो सकते हैं.

मंजुला शेट्टे के परिवार वालों ने जेलर पर मंजुला को थप्पड़ मारने का आरोप लगाया है, और परिजनों का आरोप है कि उसी पिटाई के बाद शुक्रवार शाम को मंजुला की मौत हो गई. शनिवार सुबह इसके विरोध में सैकड़ों महिला कैदियों ने जेल में धरना-प्रदर्शन किया था, और कुछ कैदी जेल की छत पर भी चढ़ गई थीं, जहां उन्होंने कागज़ भी जलाए थे.

मुंबई पुलिस प्रवक्ता डॉ रश्मि करंदीकर के मुताबिक रविवार को नागपाड़ा पुलिस ने भायखला जेल प्रकरण मामले में दो एफआईआर दर्ज की हैं. एक एफआईआर मंजुला की हत्या के मामले में दर्ज हुई है, जिसमें जेलर मनीषा पोखरकर और पांच अन्य जेलकर्मी आरोपी हैं. आईजी (जेल) बीके उपाध्याय के मुताबिक मामले में आरोपी सभी छह जेलकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.

दूसरी एफआईआर जेल की तकरीबन 200 महिला कैदियों के खिलाफ है, जिन पर जेल में मारपीट और दंगा करने का आरोप है. इन आरोपियों में इंद्राणी मुखर्जी का भी नाम है. ननद की हत्या करने के लिए उम्रकैद की सज़ा काट रही 31-वर्षीय मंजुला शेट्टे वर्ष 2005 से पुणे की यरवडा जेल में बंद थी, और उसे हाल ही में भायखला जेल में लाया गया था.

रिजर्व बैंक ने कहा की लॉकर में रखे सामान गायब हुए तो बैंक जिम्मेदार नहीं

रिजर्व बैंक ने आदेश जारी किया है जिसे सुनने के बाद लोग बेहद चितिंत हैं. बैंक का कहना है कि अगर आपका कीमती सामना बैंक लॉकर से गायब होता है इसके लिए बैंक जिम्मेदार नहीं होगा. एक आरटीआई के माध्यम से यह खुलासा हुआ है कि भारतीय रिजर्व बैंक और 19 सार्वजनिक बैंकों ने आपका सामान सुरक्षित रखने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.

जानकारी में यह भी पता चला है कि बैंक लॉकर से जुड़े समझौते के समझोतो में बैंक लॉकर में रखे आपके कीमती सामन की सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है और आपका सामान गायब होने पर बैंक की कोई जिम्मेदारी नहीं होती है. आरबीआई और 19 सार्वजनिक बैंकों की ओर से हुए इस खुलासे के बाद आरटीआई आवेदक वकील कुश कालरा ने सीसीआई यानी भारतीय प्रतिस्पर्द्धा आयोग में शिकायत दर्ज करवाई है. इस शिकायत में उन्होंने कहा है कि लॉकर सर्विस के मामले में बैंक कार्टेलाइजेशन कर रहे हैं और वह बाजार प्रतिस्पर्द्धा के खिलाफ व्यवहार कर रहे हैं.

लॉकर सुरक्षा संबंधित मामले में ग्राहक और बैंक के बीच होने वाले समझौते में यह स्पष्ट रूप से लिखा होता है कि  बैंक युद्ध, देश में फैली अराजकता, चोरी, सेंधमारी की स्थिति में बैंक लॉकर में रखे सामान के नुकसान या इसके नष्ट होने की जिम्मेदारी नहीं लेता है. लॉकर में रखे सामना की जिम्मेदारी खुद ग्राहक की होगी.

देशभर में ईद की धूम

पूरे  भारत देश में ईद का त्योहार हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईद के मौके पर ट्वीट कर देशवासियों को ईद की बधाई दी, उन्होंने लिखा है कि पवित्र माह रमजान के बाद मनाया जाने वाला ईद समाज में भाईचारे एवं सौहार्द का प्रतीक है. तो वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने ईद के शुभ मौके पर आशा व्यक्त की कि यह ईद सभी के जीवन में समृद्धि लाएगा और एकता और भाईचारे में हमारे विश्वास को सुदृढ़ करेगा, जो भारत की समग्र सांस्कृतिक विरासत रहा है.

वहीं जम्मू के श्रीनगर में लगातार हो रही हिंसा के बीच सोमवार सुबह ईद की नमाज अदा की गई. यहां भी लोगों ने एक-दूसरे को गले लगकर ईद की मुबारकबाद दी. देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने ईद के मौके पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और कश्मीर के लोगों को अमन और चैन की बहाली का संदेश दिया है. गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कश्मीर के हमारे भाइयों बहनों, बुजुर्गों, नौजवानों और बच्चों को तहे दिल से ईद की मुबारकबाद देता हूं. मैं विश्वास करता हुँ की अच्छाइयों और इंसानियत का ये त्योहार कश्मीर में अमन चैन और मेलजोल और खुशहाली का माहौल बढ़ाने में मददगार साबित होगा .

ईद पर जुनैद के गांव में  काली पट्टी बांधकर पढ़ी गयी नमाज

में ईद का जश्न मन रहा है तो एक जगह ऐसी भी है जहां मातम पसरा हुआ है. ट्रेन में नफरती हिंसा का शिकार हुए जुनैद के घर और हरियाणा के उस गांव में ईद के दिन खुशी नहीं है. परिवार और उसके गांव के लोग मिलकर मौत का इंसाफ मांग रहे हैं. ईदगाह पहुंचे सभी गांव वालों ने बाजुओं पर काली पट्टी बांध कर नमाज अता की और जुनैद की हत्या का विरोध किया.

जुनैद हाफिज़ गुरुवार की रात लोकल ट्रेन से दिल्ली से बल्लभगढ़ जा रहे थे. उनकी उम्र 16 साल थी. ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला. जुनैद,  उनके भाई हाशिम और शाकिर और पड़ोसी दोस्त मोहसिन दिल्ली के सदर बाज़ार से ईद की खरीदारी कर घर लौट रहे थे. जब वो ट्रेन में चढ़े तो ट्रेन पूरी तरह खाली थी,  तो उन्हें बैठने के लिए सीट भी मिल गई. आगे चलकर ओखला में 20-25 लोग ट्रेन में चढ़े थे. चढ़ने में धक्का मुक्की हुई. उसी में जुनैद को धक्का लगा तो वो नीचे गिर गए. इस पर जुनैद ने कहा कि धक्के क्यों मार रहे हो. उन्होंने उनके सर पर टोपी देख कर कहा कि तुम मुसलमान हो, देशद्रोही हो, तुम पाकिस्तानी हो, मांस-मीट खाते हो. उन लोगो ने सर से टोपी हटा दी और उनकी दाढ़ी पकड़ने की कोशिश की. जब उन्होंने रोकने की कोशिश की तो उन्होंने मार-पीट शुरू कर दी.

अगला स्टेशन तुगलकाबाद आने तक वो उन्हें मारते रहे. वहां से उन लोगों ने अपने भाई को फ़ोन किया और मदद के लिए बुलाया. उनके बड़े भाई बल्लभगढ़ स्टेशन पहुंचे. लेकिन बल्लभगढ़ पहुंचने पर उन लोगों ने उन्हें ट्रेन से उतरने नहीं दिया. वो नीचे गिरा कर उनके ऊपर चढ़े गए. जब उनके भाई उन्हें बचाने के लिए ट्रेन पर चढ़े तो उन लोगों ने उन्हें अंदर खींच लिया और उनके साथ भी मार पिटाई की.

बल्लभगढ़ से कुछ लोग ट्रेन से उतरे और यहां से आगे ट्रेन चालू हुई तो उन लोगों ने चाकू निकाल लिया और शाकिर को मारना शुरू किया. जुनैद ने बीचबचाव किया तो उन्होंने जुनैद को भी मारा. जुनैद को उन्होंने इतना मारा था कि वो नीचे गिर गए. उन्हें लगा कि जुनैद मर गए हैं तो अगले स्टेशन असावटी में उन्हें फेंक दिया. इसके बाद वो ट्रेन की पिछली साइड से उतरे जबकि हम प्लेटफॉर्म से उतरे.

फिर उन लोगों ने एंबुलेंस को फोन किया. जब ओखला से ट्रेन चली थी तो 20-25 ही लोग थे, लेकिन धीरे-धीरे ट्रेन में भीड़ हो गई और उन्हें छोड़ कर पूरा डिब्बा गैर मुसलमानों से भरा था. पूरे डिब्बे के लोग एक हो गए थे. सब लोगों ने कहा ये मुसलमान हैं, देश द्रोही हैं इनको मारो.

वहीं हरियाणा के डीसीपी विष्णु दयाल ने कहा कि वारदात रात में हुई और दूसरा ट्रेन में मौजूद लोगों को भी मदद करनी चाहिए थी. साथ ही कहा कि खांडावली गांव के लोगों ने काली पट्टी नहीं बांधी , बल्कि बाहर से लोग इस गांव में काली पट्टी बांधकर आए हैं. उनका कहना था वो इसी गांव से ताल्लुक रखते हैं ना कि बाहर के , तो हम उनके साथ है. उन्होंने बताया कि, इस मामले में अभी एक आरोपी गिरफ्तार हुआ है बाकी कुछ आरोपी आरोपियों की पहचान हो गई है. उनको जल्द गिरफ्तार किया जाएगा. वही गांव वालों ने इस शोक में काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज किया. इस तरह का विरोध दूसरे अन्य शहरों में भी किया गया.

टीम इंडिया ने विंडीज को 105 रन से हराया

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पोर्ट ऑफ स्पेन। वेस्टइंडीज़ में चल रही वनडे सीरीज के दूसरे वनडे में भारत ने आसानी से वेस्टइंडीज़ को हरा दिया. बारिश से बाधित इस मैच में टीम इंडिया 105 रनों से जीती. टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को क्वींस पार्क ओवल, पोर्ट ऑफ स्पेन में खेले गए दूसरे वनडे मैच में 105 रनों से मात देकर पांच मैचों की वनडे सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली है. बारिश से बाधित यह मैच 43-43 ओवर का कर दिया गया था. जिसमें पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 43 ओवर में 5 विकेट गंवा कर 310 रन बनाए और वेस्टइंडीज को 311 रनों का लक्ष्य दिया था.

जवाब में लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की टीम 43 ओवर में 6 विकेट गंवा कर 205 रन ही बना पाई और भारत ये मैच 105 रनों से जीत गया. वेस्टइंडीज की ओर से शाई होप ने सबसे ज्यादा 81 रन बनाए वहीं रोस्टन चेस ने 33 रनों की पारी खेली. भारत की ओर से कुलदीप यादव ने सबसे ज्यादा 3 विकेट झटके. अजिंक्य रहाणे को उनकी बेहतरीन 103 रनों पारी के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया.

ईद पर भी नहीं माने पत्थरबाज, CRPF कैंप पर हमला

अनंतनाग। ईद के त्योहार के मौके पर भी कश्मीर में पत्थरबाज अपनी हरकत से बाज नहीं आए. कश्मीर के अनंतनाग की जंगलातमंडी में लोगों ने सीआरपीएफ कैंप पर पत्थरबाजी की. जिसके बाद फोर्स ने उनपर आंसू गैस भी छोड़ी. पत्थरबाज वहां पर मूसा के समर्थन में नारेबाजी कर रहे थे. ईदगाह के पास पत्थरबाजी के दौरान दो सीआरपीएफ जवान घायल हो गए हैं. इसके अलावा घाटी में कई जगहों पर पत्थरबाजी की खबरें सामने आ रही हैं. राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इंडिया टुडे द्वारा पत्थरबाजों पर किए गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया.

श्रीनगर में पत्थरबाजों ने ईद के दिन भी CRPF के जवानों पर हमला किया. श्रीनगर के ईदगाह का इलाके में पत्थरबाजों ने नमाज के पहले सुरक्षा के लिए तैनात CRPF की टुकड़ी पर हमला किया. CRPF के साथ-साथ जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों पर पत्थरबाजों ने पत्थर बरसाए. पत्थरबाजी में CRPF के 2 जवान घायल हो गए. खबर यह भी है कि इस पत्थरबाजी में स्थानीय पुलिस के 4 जवान और 1 आम नागरिक भी घायल हो गए हैं. पत्थरबाजों के झुंड को भगाने के लिए सीआरपीएफ और जम्मू कश्मीर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े. लगभग 100 पत्थरबाजों के हुजूम ने CRPF जम्मू कश्मीर पुलिस पर नमाज शुरु होने से पहले ही ईद गाह इलाके में पत्थर बरसाने शुरू कर दिया.

सीआरपीएफ कमांडेंट भावेश चौधरी ने आज तक से बातचीत में कहा पत्थर बाजों ने ईदगाह इलाके में नमाज शुरु होने से पहले ही जवानों पर पत्थरों से हमला शुरु कर दिया. भावेश चौधरी ने कहा कि पत्थरबाजों ने नमाज शुरु होने से पहले ही सुरक्षा के लिए तैनात सीआरपीएफ जम्मू कश्मीर पुलिस के जवानों पर हमला कर दिया जिसमें सीआरपीएफ के 2 जवान, कश्मीर पुलिस के 4 जवान और 1 आम नागरिक घायल हो गए हैं. पत्थर बाजों ने ईद के पवित्र दिन भी हिंसा करते हुए अपना असली चेहरा आवाम के सामने रख दिया है.

आपको बता दें कि पिछले कई दिनों से लगातार कश्मीर का माहौल बिगड़ा है. अभी हाल ही में कश्मीर के नौहटा में नमाज के दौरान ड्यूटी कर रहे DSP मोहम्मद अयूब पंडित की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. जिससे माहौल बिगड़ा है.

मूसा ने किया था बड़ा खुलासा जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से लगातार आतंकियों के खिलाफ सेना बड़ी कार्रवाई कर रही है. कई आतंकी मारे भी गए हैं. अब इसको लेकर तालिबान-ए-कश्मीर के लीडर ज़ाकिर मूसा ने बड़ा खुलासा किया है. मूसा का कहना है कि आर्मी ने पिछले 7 दिनों में जिन आतंकियों को मारा है, उनमें से अधिकतर की जानकारी खुद उसने ही सेना को दी थी. मूसा ने कहा कि हाल ही में दो ऑपरेशन के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के जुनैद मट्टू और निसार अहमद जैसे लोगों के बारे में उसने ही जानकारी दी थी. मुसा के ग्रुप की ओर से एक वीडियो जारी कर इस बात की जानकारी दी गई.

पत्रिका के पांच साल और वेब चैनल के शानदार आगाज के गवाह बनें सैकड़ों लोग

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बामसेफ, डी. एस. फोर व बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक बहुजन नायक मान्यवर कांशी राम जी अपने भाषणों में अक्सर कहते थे कि अगर बहुजन समाज के पढे-लिखे नौकरी पेशा लोग अपना थोड़ा सा पैसा, थोड़ा सा समय और थोड़ा सा दिमाग भी समाज को दे दें तो हम इस देश में बहुत बड़ा आन्दोलन खड़ा करके अपनी सरकारें बनाकर समाज के प्रत्येक हिस्से के सभी अधिकारों को सुरक्षित रख सकते हैं. कांशी राम जी के इसी फार्मूले से पाँच साल पहले शुरू हुई “दलित दस्तक” पत्रिका आज अपने लाखों पाठकों के साथ जवानी की परवान चढ़ रही है और मुख्यधारा की मीडिया से टक्कर ले रही है. विगत 24 दिसंबर को दलित दस्तक ने अपना वेब चैनल भी लांच कर दिया. दलित दस्तक नाम से शुरू हुए इस वेब चैनल को यू-ट्यूब पर देखा जा सकता है. बहुजन नायकों, बहुजन आंदोलन और तथागत बुद्ध को समर्पित एक प्रोमो के जरिए वेब चैनल को लांच किया गया. इसकी लॉन्चिंग देश के संसद भवन के पास स्थित कॉस्टीट्यूशन क्लब के मावलंकर हॉल में हुई.

देश में प्रचलित छोटे-बड़े लगभग 800 चैनलों के बीच दलित दस्तक वेब पोर्टल भी सामने है. यहां दीगर बात यह है कि सामाजिक, राजनैतिक व धार्मिक क्षेत्रों के संघर्ष में दलित-बहुजन समाज में काफी अनुभव व उदाहरण नजर आते हैं, परन्तु मीडिया के क्षेत्र में बहुजन समाज ने सही ढंग से पदार्पण भी नहीं किया है तो फिर उदाहरण का तो सवाल ही नहीं उठता, हां पत्रकारिता क्षेत्र में उदाहरण मिल सकते हैं.

इतिहास में दर्ज होने लायक इस ऐतिहासिक घटना में मुख्य अतिथि चिन्तक व विचारक आनन्द श्री कृष्ण जी थे, जबकि वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश जी व बौद्ध चिन्तक बौद्धाचार्य शान्तिस्वरूप बौद्ध विशिष्ठ अतिथि के तौर पर शामिल हुए. विचारक, चिंतक व समाजशास्त्री प्रो. विवेक कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की. कार्यक्रम का संचालन दलित दस्तक के संपादक मंडल की सदस्य डॉ. पूजा और मुंबई में बतौर कलाकार काम करने वाले रंगकर्मी मानवेन्द्र ने किया.

श्रोताओं और दर्शकों से खचाखच भरे दिल्ली के संभ्रान्त क्लबों में एक कांस्टीटयुशन क्लब में यू.पी, उतराखण्ड, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, छतीसगढ़, पंजाब, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र सहित तमाम अन्य हिस्सों से भी लोग मौजूद थे. कार्यक्रम की खास बात तमाम बड़े साहित्यकारों-लेखकों की मौजूदगी भी रही. सिर्फ सोशल मीडिया और फोन के माध्यम से बात करने भर से ही बहुजन समाज के पढ़े-लिखे विद्वानों, चिन्तकों, सामाजिक-धार्मिक कार्यकर्ताओं, लेखकों इत्यादि का दिल्ली और दिल्ली के बाहर से पहुंचना कुछ ना कुछ तो दर्शा रहा था. इस विषय पर बहुत से तर्क व विचार हो सकते हैं. इन सब के बीच में एक विचार यह भी है कि ये लोग किसी मनुवादी पार्टी के विरोध में नहीं या किसी अन्य के विरोध में नहीं बल्कि अपना कुछ ना कुछ बनाने के लिए एकत्रित हुए हैं.

इस रचनात्मक व सकारात्मक सुझबुझ में दलित -दस्तक का अहम रोल नजर आता है. इस दौरान अपने वक्तव्य में बौद्धाचार्य शांति स्वरूप बौद्ध ने ‘दलित-दस्तक’ पत्रिका की शुरूआत के बारे में और पत्रिका ने कैसे बुद्ध के धर्म को पाठकों तक पहुँचाने में योगदान दिया. मुख्य अतिथि आनन्द श्रीकृष्ण ने अशोक दास को दलित दस्तक के ईमानदार एवं सफल प्रकाशन के लिए 100 में से 100 नंबर दिए. उन्होंने कहा कि अमेरिका में काले लोग जब अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे तब वे भी अपनी मीडिया के माध्यम से अपने लोगों तक आन्दोलन पहुंचा रहे थे. उन्होंने कहा कि मीडिया के बिना आन्दोलन को कभी सफल नहीं बनाया जा सकता है. वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश जी ने बताया कि वर्तमान की हिन्दुत्व से ग्रसित राजनीति के विरोध में आम्बेडकारी विचारों से प्रभावित राजनीति में ठहराव सा नजर आता है लेकिन इस सभागार में उपस्थित जोश व तेज से लबालब भरे विद्वानों, लेखकों व सामाजिक कार्यकर्ताओं को देखकर लग रहा है कि यह ठहराव जल्द ही खत्म होगा.

 अपने जोशीले सम्बोधन में उर्मिलेश जी ने कहा कि आप आज जो सुन्दर सपने देख रहे हैं, उन सपनों की कसम कि आप लोग अपनी मीडिया स्थापित करने के उद्देश्य में जरूर सफल होंगे. मीडिया में दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों की भागीदारी से सम्बन्धित विभिन्न सर्वे और आंकड़ों के आधार पर कहा कि मुख्यधारा की मीडिया में आज भी इनकी भूमिका नाम-मात्र ही है. अपने छात्र जीवन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब मैं इलाहाबाद युनिवर्सिटी में पढ़ता था तो भारत और दुनिया के तमाम छोटे-बड़े लेखकों की किताबें वहाँ आस-पास में मिलती थी लेकिन डॉ. अम्बेडकर से सम्बन्धित एक भी किताब नहीं मिलती थी. मुझे गर्व है कांशी राम जी के बहुजन आन्दोलन पर जिसकी वजह से आज सैकड़ों लेखक व लाखों पाठक पैदा हुए और साहित्य भी अब मिलने लगा. और कांशी राम जी के बहुजन आन्दोलन की वजह से दफनाए गए अम्बेडकर को फिर से बाहर निकाला जा सका. उन्होंने कहा कि मुख्यधारा के मीडिया जगत ने बहुजन समाज के लोगों और उनकी नस्लों के साथ नाइंसाफी की है, दलित-दस्तक पत्रिका और दलित दस्तक वेब पोर्टल इस नाइंसाफी को रोकेगा इसलिए दलित दस्तक से जुड़ें और अपना हक सुनिश्चित करें.

कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रो. विवेक कुमार ने दलित दस्तक पत्रिका की विचारधारा को समझाते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों के अंकों के कवर पेज को देखने और अन्दर के पेजों को पढ़ने से साफ-साफ पता चल जाता है कि पत्रिका की विचारधारा समता, स्वतन्त्रता, बंधुता और न्याय जो संवैधानिक मूल्य तथा उद्देश्य भी है पर आधारित हैं. उन्होंने कहा कि जिन्होंने समाज और राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में भाग लिया या प्रयास किए हैं सिर्फ उन्हीं के बारे में पत्रिका ने कार्य किया है. ‘दलित’ शब्द के बारे में उन्होंने बताया कि जब ‘दि हिन्दू’ अखबार चल जाता है तो दलित क्यों नहीं चल सकता. ‘दि हिन्दू’ को सिक्ख, ईसाई, मुस्लिम, जैन, यहूदी, पारसी, बौद्ध इत्यादि धर्म के लागे खरीद कर पढ़ सकते हैं तो दलित दस्तक क्यों नहीं पढ़ सकते. ‘दि हिन्दू’ अखबार खरीदते समय उनके दिमाग में अखबार व उसकी क्वालिटी होती है उसका धर्म नहीं. ठीक इसी प्रकार दलित-दस्तक पत्रिका खरीदते समय पत्रिका व उसकी क्वालिटी होनी चाहिए उसके वर्ग या जाति की पहचान नहीं. बहुजन आन्दोलन जो है वो एक बहुत बड़ी अवधारण है, वो बहुत बड़ी चीज है. इसको दलित-दस्तक सहारा देगा. दलित-दस्तक का उद्देश्य दलितों के इतिहास व संस्कृति तथा उनके नायकों व नायिकाओं की पुर्नस्थापना करना है. और पत्रिका ने विचारधारा के आधार पर विचारों को निर्मित करके उनको बहुजन समाज तक पहुंचाया भी है.

डॉ. विवेक ने आगे कहा कि विचारकों, बुद्धिजीवी, लेखकों, चिन्तकों, शोधार्थियों व सामाजिक कार्यकर्ताओं की बैठी यह विशाल भीड़ अपने आप में यह सबूत दे रही है कि पत्रिका में छपे विचारों से लाभ ले रहे हैं और पत्रिका की क्वालिटी, दिशा, एजेण्डा इत्यादि के दुरूस्त होने का प्रमाण भी है. इस पोर्टल की विचारधारा व मूल्य वही होंगे जो ‘दलित-दस्तक’ पत्रिका के हैं.

संपादक अशोक दास ने नया प्रयोग करते हुए खुद वहां उपस्थित लोगों के बीच जाकर उनसे बात की. उन्होंने कहा कि यहां कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद हैं. सबको मंच पर बुलाना संभव नहीं है और वह खुद ही दर्शकों के बीच में पहुंच गए. उन्होंने जय प्रकाश कर्दम, डॉ. कौशल पंवार, डॉ. राजेश पासवान, राजेंद्र कश्यप, डॉ. एस.एन. गौतम सहित कार्यक्रम में मौजूद तमाम गणमान्य लोगों से पत्रिका के बारे में उनकी राय पूछी. इस दौरान तमाम पाठकों, वितरकों और प्रचारकों को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया. कार्यक्रम में देहरादून से अनिल कुमार और हरिदास जी के साथ दून बुद्धिस्ट सोसाइटी के सात सदस्य पहुंचे थे, तो आगरा से सोबरन सिंह और उनके साथी आए थे. कार्यक्रम में देश के तमाम हिस्सों से तमाम लोग मौजूद थे.

कार्यक्रम के अंत में पिछले पांच वर्षों के दौरान जुड़े रहने वाले वितरकों, प्रचारकों और लेखकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम का संचालन रंगक्रर्मी मानवेन्द्र व डॉ. पूजा राय जी ने बहुत ही सुन्दर ढंग से किया. चैनल लॉन्चिंग के बाद अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने दलित दस्तक को सैंकड़ों कारपोरेट और बाजारू मीडिया चैनलों के तूफान के बीच बहुजन समाज के लोगों के लिए दिए के समान बताया. संपादक अशोक दास ने देश भर से आए सभी मेहमानों का स्वागत किया और कार्यक्रम में आने के लिए आभार जताया.

नोट- कार्यक्रम में मौजूद नहीं रहने वाले पत्रिका के पाठक और शुभचिंतक कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट YOU TUBE पर DALITDASTAK के चैनल पर जाकर देख सकते हैं।

रिपोर्ट- विनोद कुमार

शोधार्थी

म.क. भावनगर यूनिर्वसिटी भावनगर

गुजरात

भारत, चीन से जून 2018 तक नहीं खरीदेगा दूध उत्पाद और चॉकलेट

नई दिल्ली। सरकार ने चीन से दूध और उसके उत्पादों तथा चॉकलेट के आयात पर प्रतिबंध की अवधि एक साल बढ़ाकर जून, 2018 कर दी है. विदेश व्यापार महानिदेशालय की अधिसूचना में कहा गया है, ”चीन से दूध और दुग्ध उत्पादों (चॉकलेट और चॉकलेट उत्पाद, कैंडी और कनफेक्शनरी) के आयात पर प्रतिबंध की अवधि एक साल बढ़ाकर 23 जून, 2018 कर दी है.”

खाद्य नियामक एफ.एस.एस.ए.आई. ने सरकार से इस प्रतिबंध को बढ़ाने की सिफारिश की थी. सबसे पहले यह प्रतिबंध सितंबर, 2008 में लगाया गया थ. उसके बाद से समय-समय पर इसे आगे बढ़ाया गया.

अब अफगानिस्तान, आयरलैंड को भी मिला टेस्ट टीम का दर्जा

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आईसीसी ने आयरलैंड और अफगानिस्तान को टेस्ट टीमों का दर्जा दे दिया है. गुरुवार को आयरलैंड और अफगानिस्तान की टीमों को टेस्ट खेलने का दर्जा भी मिल गया . इसके साथ ही अब टेस्ट खेलने वाले देशों की संख्या 10 से बढ़कर 12 हो गई है. इन दोनों देशों को पूर्ण सदस्यता देने का फैसला एकमत से गुरुवार को लंदन में हुई आईसीसी की बैठक में लिया गया. इससे पहले ये दोनों देश आईसीसी के एसोसिएट सदस्य थे.

इससे पहले भारत, श्रीलंका, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे और बांग्लादेश सहित कुल 10 टीमों को टेस्ट टीमों का दर्जा प्राप्त था, अब अफगानिस्तान और आयरलैंड को टेस्ट टीम का दर्जा मिलने के बाद आईसीसी के टेस्ट खेलने वाले देशों की संख्या बढ़कर 12 हो गई है.

जीएसटी: टेलिकॉम, बैकिंग से लेकर होटल तक महंगी होंगी सेवाएं

1 जुलाई से जीएसटी लागू होने जा रहा है. इसके कारण देश में बहुत कुछ आर्थिक रूप से बदल जाएगा. कुछ चीजें महंगी होंगी, कुछ सस्ती. इस बीच कयास लगाए जा रहे हैं कि जीएसटी के कारण आपकी बैंकिग, टेलिकॉम सर्विस, होटल और बीमा महंगा हो जाएगा. इनसे जुड़ी कंपनियां बकायदा अपने कस्टमर्स को इसकी सूचना भी देने लगी हैं.

ऐसे पड़ेगा असर पिछले कुछ दिन से बैंक अपने ग्राहकों को मेल कर बता रहे है कि जुलाई से क्रेडिट कार्ड के बिल पर लगने वाला टैक्स 15 फीसदी से बढ़कर 18 फीसदी हो जाएगा. इसी तरह टेलिकॉम कम्पनियों नें भी कहा था कि इनपुट टैक्स क्रेडिट पर लाभ जैसे कम होगा वैसे मासिक बिल में भी वृद्धि होगी.

टेलिकॉम को 18 की जगह 5 या 12 फीसदी वाले स्लैब में रखा जाए हालांकि टेलिकॉम सेक्टर के लचर हालात को देख कर एयरटेल और आइडिया जैसी कम्पनियों ने मंत्रालय से कहा है कि टेलिकॉम सेक्टर के साथ आवश्यक सेवाओं की तरह समझना चाहिए और इसे जीएसटी के अंदर 18 फीसदी की जगह 5 या 12 फीसदी के स्लैब के अंदर रखना चाहिए. जब दरें पिछले महीने तय की गई थीं, तो सरकार ने कहा था कि इनपुट क्रेडिट जो कंपनियों के लिए उपलब्ध होगा उस पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और इससे लगभग 3 फीसदी लागत कम हो जाएगी.

महंगा होगा बीमा प्लान लेना इंश्योरेंस कम्पनियों ने भी कहा है कि लैवी के 15 से 18 फीसदी होने से यह कर प्रीमियम को आगे बढ़ाएगा और सबसे ज्यादा असर प्योर टर्म पर पड़ेगा. यदि आप 1 करोड़ का प्लान के लिए 25000 रुपए का वार्षिक प्रीमियम लेते हैं तो जीएसटी के कारण यह 4500 का हो जाएगा, जो वर्तमान में 3750 रुपए है. यूलिप के लिए इसका प्रभाव कम होगा जहां कम्पनियों द्वारा मैनेजमेंट और मृत्यु दर के लिए लिया जाता है.अगर आपका प्रीमियम 10000 रुपए साल के ऊपर टैक्स के रुप में 75 रुपए देते है तो यह बढ़ कर 90 हो जाएगा.

सरकार ने नहीं जताई सहमति इसके साथ ही 5 स्टार होटलों ने भी अपने ग्राहको को मेल कर बढ़े हुए टैक्स की जानकारी दे रहे हैं, लेकिन सरकार का कहना है कि इस टैक्स को वर्तमान के टैक्स के पास ही रखा गया है. सेवाप्रदाताओं के तर्क से सरकार नें किसी तरह की सहमति नही जताई है.

कम्पनियों को करनी होगी कीमतें कम बता दें कि एक अधिकारी नें बताया कि कम्पनियों को कम कीमतों के रुप अपनें ग्राहकों को इसका लाभ देना चाहिए, हमने मंत्रालय को इस विषय पर सेवाओं प्रदाताओं के साथ जल्द से जल्द सुलझाने के लिए कहा है ताकि ग्राहकों पर दबाव न पड़े.