यूजीसी NET का नोटिफिकेशन जारी, आधार नंबर अनिवार्य

नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के लिए नोटिफिकेशन जारी हो गया है. नेट के लिए आवेदन की प्रकिया 11 अगस्त से शुरू होगी. वहीं, आवेदन करने की अंतिम तारीख 11 सितंबर होगी. परीक्षा की फीस 12 सितंबर तक जमा कर सकेंगे. इस बार 5 नवंबर को यह परीक्षा होगी. इन सबमें सबसे जरूरी बात यह है कि इस बार इस फॉर्म में आधार नंबर को जरूरी बनाया गया है.

सीबीएसई ने यूजीसी नेट-2017 का कार्यक्रम जारी करते हुए बताया है कि बोर्ड ने इस परीक्षा को और ज्यादा पारदर्शी बनाने के लिए यह कदम उठाए है. सीबीएसई की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में बताया गया है कि आधार को अनिवार्य किए जाने के बाद परीक्षा केंद्रों में सुविधाजनक और बिना परेशानी के आवेदकों की पहचान को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी.

परीक्षा फॉर्म में आधार नंबर की अनिवार्यता जम्मू-कश्मीर, असम और मेघालय को छोड़कर सभी राज्यों में लागू होंगे. इन राज्यों के आवेदकों को फॉर्म भरते समय राशन कार्ड नंबर, बैंक अकाउंट नंबर, पासपोर्ट का नंबर या किसी अन्य सरकारी पहचान संख्या भरनी होगी. इन राज्यों के परीक्षार्थियों को अपना परीक्षा केंद्र का चयन भी वहीं करना होगा.

यूजीसी नेट की यह परीक्षा विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ाने वाले सहायक प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के चयन के लिए आयोजित की जाती है. सीबीएसई ने पहली बार इस परीक्षा में आधार नंबर को अनिवार्य किया है.

सफाई अभियान के पोस्टर पर डॉ. अम्बेडकर क्यों? ब्रांड एम्बेस्डर तो शिल्पा शेट्टी है

बचपन में नाई द्वारा बाल काटने से मना किए जाने के साथ शुरू हुआ डॉ. भीम राव अम्बेडकर के अपमान का सिलसिला 1956 ई. में बौद्ध धर्म अपनाने के पूर्व तक चलता रहा. आज भारतीय स्वतंत्रता के 70 वर्ष बाद भी यह अनवरत जारी है. कभी आजम खान द्वारा, कभी मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के शिक्षकों द्वारा आदि. आधे से ज्यादा मामले तो समाचार पत्रों में आते भी नहीं.

ताजा मामला स्वच्छ भारत निर्माण कार्यक्रम की आड़ में भारत सरकार द्वारा जारी किये गए एक विज्ञापन का है. यह विज्ञापन नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लगाया गया है, जिसमें चार्ल्स डार्विन के मानव विकास सिद्धान्त को चित्रात्मक रूप में दिखाते हुए डॉ. अम्बेडकर को विकसित मनुष्य के रूप में एक कचरे के डब्बे में “आपके अंदर के बाबासाहेब को जागृत करें” इस नारे के साथ कूड़ा फेंकते हुए दिखाया गया है. वास्तव में यह विज्ञापन नहीं बल्कि विज्ञापन की आड़ में डॉ. अम्बेडकर को अपमानित करने और दलित समाज को नीचा दिखाने की सोची समझी साजिश है.

केंद्र में सत्ता प्राप्त करने के साथ ही नव निर्वाचित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने 2 अक्तूबर 2014 को गांधी जयंती के दिन से इस संकल्प के साथ कि “गांधी जी के 150वें जयंती अर्थात 2 अक्तूबर 2019 तक पूरे देश को साफ सुथरा बना देंगे” स्वच्छ भारत निर्माण कार्यक्रम की नींव डाली थी. थोड़े बहुत विरोध के बीच पूरे देश की जनता ने स्वच्छता जागरूकता लानेवाले इस कार्यक्रम की तारीफ भी की. उनके आलोचक दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जी ने भी इसी तर्ज पर अपने राज्य में स्वच्छ दिल्ली अभियान कार्यक्रम भी संचालित किया.

इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली जी ने 2015 में 0.5 प्रतिशत सेस (टैक्स) भी लगाने की घोषणा की थी. प्रिंट व इलेक्ट्रोनिक मीडिया के दौर में कोई भी सरकार किसी कार्यक्रम को सफल बनाने, इसे आम जनमानस में पहुंचाने के लिए बॉलीवुड, खेल, समाज सेवा की दुनिया के मशहूर हस्तियों का ‘ब्रांड एम्बेस्डर’ के रूप में चुनाव करती है. भारत सरकार ने ऐसा किया भी. फरवरी 2017 में बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी को स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम का ‘ब्रांड एम्बेस्डर’ नियुक्त किया गया.

ऐसे में नियमानुसार डॉ. अम्बेडकर की जगह शिल्पा शेट्टी को कूड़ा बीनते हुए दिखाया जाना चाहिए था. लेकिन इस विज्ञापन को बनानेवाले ‘अंत्योदय ग्रुप’ और इसे अभिप्रमाणित करने वाले अधिकारी ने किया कुछ और ही. यदि डॉ. अम्बेडकर को ही स्वच्छ भारत मिशन कार्यक्रम का प्रेरणा स्त्रोत बनाना था तो शिल्पा शेट्टी को ‘ब्रांड एम्बेस्डर’ बनाने, इसपर लाखों-करोड़ों खर्च करने से मंत्रालय या सरकार को क्या लाभ हुआ?

सफाई अभियान में यें हस्तियां भी शामिल रही हैं.

भारतीय संविधान निर्माण से लेकर देश में समता मूलक समाज के निर्माण हेतु योगदान देने वाले डॉ. अम्बेडकर के प्रति विज्ञापन निर्माताओं की सोच के आधार पर तो यही कहा जा सकता है कि ऐसे लोग कभी डॉ. अम्बेडकर के समाज सुधार के संबंध में पढ़ना तो दूर इनके उल्लेखनीय कार्यों के बारे में कभी सुना भी नहीं होगा. डॉ. अम्बेडकर के संबंध में पढ़ा होता तो पता चलता कि इस समाजसुधारक ने हाशिये पर स्थित समाज के एक बड़े हिस्से को नगर का कूड़ा, गंदगी बीनना नहीं बल्कि हजारों वर्षों से तथाकथित हिंदू समाज के उस गंदगी को साफ करने की बात सिखाई जो मानव-मानव में भेद-भाव को बढ़ावा दे रहा था.

हिंदू सहित भारतीय समाज की जिस गंदगी को मिटाने की बात वे करते थे, उसे समूल नष्ट करने के लिए आज फिलहाल कम से कम दस प्रतिशत लोग जागरूक हो चुके हैं. जिस दिन 25-30 प्रतिशत जनमानस में इस गंदगी को मिटाने की भावना जागृत हो गयी उस दिन से धर्म, जाति व्यवस्था के नाम पर फैली गंदगी के साथ-साथ डॉ. अम्बेडकर को कूड़ा बीननेवालों के रूप में रूप में प्रदर्शित करनेवालों के दिमाग में मौजूद कचरा, गंदगी भी खत्म हो जाएगी.

इस आलेख का तात्पर्य केवल इतना है कि डॉ. अम्बेडकर से ईर्ष्या रखनेवाले समाज के प्रबुद्ध वर्ग से अपील है कि आप पर किसी सत्ता, संस्था का कोई दवाब नहीं है भारतीय संविधान निर्माता, समाज सुधारक डॉ. भीम राव अम्बेडकर का जबरन सम्मान करने, नाम लेने, उनके विचारों को मानने का, लेकिन आपको कोई हक भी नहीं है उन्हें नीचा दिखाने या अपमानित करने का.

यह लेख साकेत बिहारी का है.

दिलीप कुमार की हालत में सुधार

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दिलीप कुमार के फैन्स के लिए राहत की खबर आ रही है, कहा जा रहा है कि धीमे धीमे उनकी हालत में सुधार दिख रहा है. बुधवार से मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती दिलीप साहब के किडनी में समस्या बढ़ने और हीमोग्लोबिन गिरने की खबरें आईं थी. इस‍के बाद से लगातार उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हाने का अपडेट मिल रहा थी लेकिन हालिया जानकारी के मुताबिक दिलीप कुमार की तबीयत पहले से बेहतर हो रही है. हाल ही में दि‍लीप कुमार की भतीजी शाहीन ने उनकी तबीयत के बारे में अपडेट देते हुए कहा, ‘युसूफ अंकल को डिहाइड्रेशन की वजह से अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. उन्हें IV फ्लुइड दिया गया. उनका प्रोटीन लेवल हाई जिसको लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि वह जल्द ही नीचे आएगा. उनकी उम्र के चलते ये प्रोसेस धीमा है लेकिन उनके सभी अंग ठीक से काम कर रहे हैं. यहां तक कि उन्होंने कुर्सी पर बैठकर लंच भी किया है. मुझे पूरी उम्मीद है कि वो जल्द ठी‍क हो जाएंगे.’ इसके अलावा शाहीन ने ट्वीट कर इस बात के लिए भी चेताया कि दिलीप कुमार फिलहाल लीलवती अस्पताल में हैं, उन लोगों की जानकारी पर विश्वास ना करें जो गलत जानकारी देकर पब्लिसिटी कमाना चाह रहे हैं.’

दलितों को प्रोमोशन नहीं दे रहा है राजस्थान आयकर विभाग, अनशन पर बैठे

जयपुर। राजस्थान के आयकर विभाग में घमासान मचा हुआ है. मामला विभागीय प्रोमोशन का है. इस दौरान अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कर्मचारियों की अनदेखी को लेकर आरक्षित वर्ग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. लगातार अनदेखी से नाराज आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों का धैर्य तब टूट गया, जब 4 अगस्त को प्रोमोशन के लिए होने वाली DPC यानि डिपार्टमेंटल प्रोमोशन कमिटी की बैठक में एक बार फिर उनकी अनदेखी की तैयारी थी. इससे नाराज कर्मचारियों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

धरने पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि आयकर विभाग राजस्थान में एससी/एसटी वर्ग के कर्मचारियों को नियमानुसार प्रोमोशन नहीं मिल रहा है. यहां यह भी साफ कर देना जरूरी है कि ये प्रोमोशन में रिजर्वेशन का मामला नहीं है, बल्कि यह विभागीय प्रोमोशन जिसमें नियमानुसार सीनियर कर्मचारियों का प्रोमोशन पहले होना चाहिए उससे जुड़ा मामला है. अनशनकारियों का आरोप है कि प्रशासन तमाम कायदे कानून को ताक पर रख कर सामान्य श्रेणी के जूनियर कर्मचारियों का प्रोमोशन पहले कर दे रहा है, जबकि एससी/एसटी वर्ग के सीनियर कर्मचारियों की अनदेखी की जा रही है. उनका आरोप है कि यह कर्मचारियों के मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन है.

इस मामले को इस तरह और बेहतर समझा जा सकता है. मान लिजिए कि किसी विभाग में 10 सबसे सीनियर कर्मचारियों का प्रोमोशन होना है. इसमें तीन कर्मचारी एससी/एसटी वर्ग के हैं. नियमानुसार उनका भी प्रोमोशन होना चाहिए. लेकिन राजस्थान का आयकर विभाग इन तीनों कर्मचारियों को प्रोमोशन नहीं देकर बाद के उनसे जूनियर कर्मचारियों को प्रोमोशन दे दे रहा है, जो विभागीय और संवैधानिक नियमों का खुल्लम- खुल्ला उल्लंघन है.

4 अगस्त से जयपुर में अपने विभाग में आमरण अनशन पर बैठे एससी/एसटी वर्ग के अधिकारी और कर्मचारी 24 घंटे के बाद भी विभाग के कैंपस में ही डटे हुए हैं. इस अनशन में सौ से ज्यादा कर्मचारी शामिल हैं. राजस्थान आयकर विभाग का यह मनमाना रवैया पिछले कई सालों से बना हुआ है, जिसके खिलाफ आखिरकार आरक्षित वर्ग के कर्मी आर-पार की लड़ाई के लिए उतर गए हैं. उनका कहना है कि बिना न्याय मिले वो अनशन से हटेंगे नहीं.

नियमानुसार दलित और आदिवासी वर्ग के कर्मचारियों का प्रोमोशन नहीं करना सीधे तौर पर राजस्थान आयकर विभाग के जातीय विद्वेष को दिखाता है. यहां यह भी ध्यान देना जरूरी है कि आयकर विभाग केंद्र सरकार के तहत आता है और केंद्र में फिलहाल भाजपा की सरकार है, जिसके बड़े नेता दलितों के घर घूम-घूम कर खाना खाने को तो तैयार हैं, लेकिन उन्हें उनका हक देने से कतरा रहे हैं.

जडेजा ने किया ऐसा काम, बन गए नंबर एक

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नई दिल्ली। भारत और श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच में टीम इंडिया मजबूत स्थिति में है और इसकी वजह है भारतीय खिलाड़ियों का प्रदर्शन. इस मैच में दुनिया के नंबर एक टेस्ट गेंदबाज़ रवींद्र जडेजा ने अपने नाम एक और रिकॉर्ड दर्ज कर लिया. इतने ही नहीं जडेजा ने ऐसी उपलब्धि अपने नाम कर ली, जिसे पाने में बड़े- बड़े दिग्गज गेंदबाज़ों के पसीन छूट जाते हैं.

रवींद्र जडेजा टेस्ट मैच में बाएं हाथ के गेंदबाज़ों में सबसे तेज़ 150 विकेट अपने नाम करने के मामले में पहले नंबर पर आ गए हैं. जडेजा ने सिर्फ 32 टेस्ट मैच खेले हैं और उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में धनंजय डिसिल्वा को बोल्ड कर अपने नाम ये रिकॉर्ड दर्ज़ करवा लिया. जडेजा के लिए ये उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने ये कमाल करते हुए पाकिस्तान के पूर्व दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ रहे वसीम अकरम, रंगना हेराथ और ऑस्ट्रेलियाई तेज़ गेंदबाज़ मिचेल जॉनसन को भी पीछे छोड़ दिया है.

BBAU में प्रोफेसर ने पढ़ाया- बाबासाहेब के अनेक महिलाओं से थे अवैध संबंध और बुद्ध थे अत्याचारी

लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) प्रशासन और प्राध्यापक फिर से विवादों में घिर गए है. पिछले वर्ष विश्वविद्यालय प्रशासन ने जातिगत भेदभाव के आधार पर प्रशासन ने आठ दलित छात्रों को निकाल दिया था. काफी विरोध प्रदर्शन के बाद प्रशासन को अपना फैसला लेना पड़ा. बीबीएयू में एक बार फिर दलित वर्ग को टारगेट किया है.

बीबीएयू में समाजाशास्त्र की प्राध्यापिका जया श्रीवास्तव ने लेक्चर के दौरान विवादित और गैर जिम्मेदाराना टिप्पणी की है. उन्होंने बाबासाहेब और तथागत बुद्ध के बारे में जो कहा है उसे लेकर छात्र विश्वविद्यालय प्रशासन से कार्रवाई की मांग पर अड़ गए हैं.

समाजशास्त्र विभाग की प्राध्यापिका जया श्रीवास्तव ने क्लास रूम में लेक्चर के दौरान पढ़ाया कि अम्बेडकर के अपनी पत्नी के अलावा अन्य महिलाओं के साथ अवैध संबंध थे. उनका अपनी पत्नी के साथ रिश्ता नहीं था. ये मनुवादी प्राध्यापिका यही नहीं रुकी. जया ने आगे कहा कि ज्ञान प्राप्ति की चाहत में बुद्ध ने अपनी पत्नी पर अत्याचार किए, उन्हें छोड़ दिया. ऐसे में उन्हें महिलाओ का हितैषी नहीं माना जा सकता. वह अत्याचारी थे.

बहुजन छात्रों ने जब इसको लिखित में देने के लिए कहा तो वह भड़क गईं. उन्होंने प्रोफेसर से बात करने की तमीज न होने का हवाला दिया. उन्होंने यहां तक कहा है कि तुम्हे मेरी कक्षा में आने की जरुरत नहीं है.

बहुजन छात्र शशिकांत भारती ने पूरे मुद्दे को लेकर एससी/एसटी सेल, कुलपति, समाजशास्त्र के विभागाध्यक्ष समेत कई विभागों को पत्र लिखकर एफआईआर करवाने की मांग की है. छात्रों का कहना है कि बहुजन छात्र-छात्राओं को अपमानित करने और उन्हें परेशान करने के लिए इस तरह की हरकत जया श्रीवास्तव करती रहती हैं.

बहुजन छात्र बताते हैं कि कभी अम्बेडकर का फोटो फड़वा दिया जाता है. कभी लेक्चर में बाबासाहेब को अपमानित करने वाली बात की जाती है. यह सबकुछ यहां का माहौल खराब करने के लिए साजिश के तहत मनुवादी व्यवस्था के लोग करवा रहे हैं. जया श्रीवास्तव खुद शिक्षिका हैं. वह महिलाओं को अम्बेडकर से अवैध संबंध बनाने वाली करार देकर सभी को अपमानित कर रही हैं. इसका कोई भी और कहीं भी प्रमाण नहीं है. बुद्ध को भी उन्होंने जिस तरह से अत्याचारी कहा है, उससे तो साफ है कि यह सुनियोजित तरीके से बुद्धिज्म पर हमला हो रहा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बीबीएयू में आए थे तो दो छात्रों ने उन्हें काले झंडे दिखाकर वापस जाओ के नारे लगाए थे. छात्र इसी मनुवादी व्यवस्था से पीड़ित हैं. हर कोई उन्हें वोटबैंक का मोहरा बनाना चाहता है, लेकिन अम्बेडकर को कोई नहीं मानता.

हर दिल अजीज़ किशोर दा का आज जन्मदिन

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‘मेरे महबूब कयामत होगी’, ‘मेरे सामने वाली खिड़की में’, ‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’ जैसे लोकप्रिय गीतों के लिए मशहूर प्लेबैक सिंगर किशोर कुमार हिंदी फिल्म-जगत के एक ऐसे धरोहर हैं, जिसे बनाने-संवारने में कुदरत को भी सदियों लग जाते हैं. आज भले ही वह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी विरासत अमर है. किशोर कुमार के नगमों ने किसका दिल नहीं चुराया? उन्होंने लाखों के दिलों पर राज किया. उनकी मधुर आवाज का जादू लोगों के सिर चढ़ कर बोला, और आज भी बोल रहा है.

हर दिल अजीज किशोर दा का आज जन्मदिन है, और आज किशोर कुमार की जिंदगी से जुड़ी कुछ दिलचस्प पहलुओं से रू-ब-रू कराने जा रहे हैं मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में गांगुली परिवार में जन्मे किशोर कुमार के पिता का नाम कुंजालाल गांगुली और माता का नाम गौरी देवी था. उनके बचपन का नाम आभास कुमार गांगुली था. चार अगस्त, 1929 को जन्मे आभास कुमार ने फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान किशोर कुमार के नाम से बनाई. वह अपने भाई बहनों में सबसे छोटे थे.

किशोर दा के पिता कुंजीलाल खंडवा के बहुत बड़े वकील थे. किशोर कुमार को अपनी जन्मभूमि से काफी लगाव था. वह जब किसी सार्वजनिक मंच पर या किसी समारोह में अपना कार्यक्रम प्रस्तुत करते तो शान से खंडवा का नाम लेते. अपनी जन्मभूमि और मातृभूमि के प्रति ऐसा जज्बा कम लोगों में देखने को मिलता है.

किशोर कुमार की आवाज राजेश खन्ना पर बेहद जमती थी. राजेश फिल्म निर्माताओं से किशोर से ही अपने लिए गीत गंवाने की गुजारिश किया करते थे. जब किशोर कुमार नहीं रहे तो राजेश खन्ना ने कहा था कि “मेरी आवाज चली गई.” राजेश के लिए उन्होंने ‘जिंदगी कैसी है पहेली हाय’, ‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’, ‘मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने’, ‘कही दूर जब दिन ढल जाए’, ‘जिंदगी प्यार का गीत है’, ‘अच्छा तो हम चलते हैं’, ‘अगर तुम न होते’, ‘चला जाता हूं’, ‘चिंगारी कोई भड़के’, ‘दीवाना लेके आया है’, ‘दिल सच्चा और चेहरा झूठा’, ‘दीये जलते हैं’, ‘गोरे रंग पे ना इतना’, ‘हमें तुमसे प्यार कितना’, ‘जय जय शिव शंकर’, ‘करवटे बदलते रहे सारी रात हम’, ‘कोरा कागज था ये मन मेरा’, ‘कुछ तो लोग कहेंगे’, ‘मेरे नैना सावन भादो’, ‘ओ मेरे दिल के चैन’, ‘प्यार दीवाना होता है’, ‘रूप तेरा मस्ताना’, ‘शायद मेरी शादी का ख्याल’,’ये जो मोहब्बत है’, ‘ये क्या हुआ’, ‘ये शाम मस्तानी’, ‘जिंदगी का सफर’ जैसे खूबसूरत नगमे गाए.

किशोर कुमार ने वर्ष 1987 में फैसला किया कि वह फिल्मों से सन्यास लेने के बाद, अपने गांव खंडवा लौट जाएंगे. वह कहा करते थे, ‘दूध जलेबी खाएंगे खंडवा में बस जाएंगे’. लेकिन उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका. 18 अक्टूबर, 1987 को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. उन्हें उनकी मातृभूमि खंडवा में ही दफनाया गया, जहां उनका मन बसता था. वह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी खूबसूरत आवाज मधुर गीतों के रूप में आज भी लोगों के मन-मस्तिष्क में झंकृत हो रही है.

अमेठी में अंबेडकर तिराहे पर फूंका गया पीएम नरेंद्र मोदी का पुतला

अमेठी में आज अंबेडकर तिराहे पर एकत्र होकर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। इन सभी ने जमकर भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की और कल की गुजरात की घटना की जमकर निंदा की। गुजरात में कल राहुल गांधी के काफिले पर हुए हमले के विरोध में यह सभी लोग आज अमेठी के जिलाधिकारी को ज्ञापन भी देंगे।

गुजरात के बनासकांठा जाते समय कल कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कार पर जमकर पथराव किया गया था। इस हमले के विरोध में आज लखनऊ में दोपहर करीब दो बजे शहीद स्मारक पर कांग्रेस पार्टी की तरफ से विरोध प्रदर्शन किया जायेगा। कांग्रेस पार्टी के सचिव शैलेंद्र तिवारी के नेतृत्व में आज कार्यकर्ता काली पट्टी बांधकर शहीद स्मारक पर प्रदर्शन करेंगे।

पथराव में राहुल गांधी की गाड़ी के शीशे फूट गए। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को इस दौरान कोई नुकसान नहीं पहुंचा है। इस घटना के बाद राहुल गांधी ने कहा था कि हमें फर्क नहीं पड़ता। हमले के बाद राहुल गांधी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि वो दो-चार झंडों से डरने वाले नहीं हैं। राहुल गांधी कल वहां बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा करने पहुंचे थे।

सवर्णों ने तोड़ी बाबासाहेब की मूर्ति, विरोध करने वाले दलितों पर चलाई गोलियां

मेरठ। भारत को संविधान के रूप में सर्वश्रेष्ठ उपहार देने वाले बाबासाहेब भीमराव अम्बेकर केवल भारत में ही नहीं पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं. भारत में दलित उत्पीड़न के खिलाफ जितना संघर्ष बाबासाहेब ने किया है, शायद ही किसी और ने किया हो. दलितों के मसीहा कहे जाने वाले बाबासाहेब सवर्णों को एक आंख नहीं भा रहे हैं. कभी आरक्षण के नाम पर तो कभी बराबरी के नाम पर सवर्ण दलितों का शोषण आज भी कर रहे हैं. सवर्ण दलितों को विकसित नहीं होने दे रहे हैं. बाबासाहेब द्वारा दिए गए संवैधानिक अधिकारों की सवर्ण समाज धज्जियां उड़ा रहा है.

भारत के हर क्षेत्र से आए दिन दलितों के साथ अत्याचार होने की खबर आती रहती है. मेरठ के मवाना खुर्द से भी कुछ ऐसी ही खबर आई है. कुछ सवर्ण समाज के लोगों ने बाबासाहेब की मूर्ति को तोड़ दिया. जिसके बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल फैल गया है.

मवाना खुर्द के निवासी कपिल कुमार ने पुलिस थाना में हनी, सेट्टी, गोलू, विवेक, अश्वनी, साकेत, मोहित, बूंदी आदि त्यागी समुदाय से आने वाले इन सभी लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है. इन सभी लोगों पर आरोप है कि इन्होंने बाबासाहेब की मूर्ति तोड़ी है और दलितों के साथ मारपीट की है. सवर्ण जब मूर्ति तोड़ रहे थे तो दलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले श्यामू, गोविंद और बूंदी ने  इन्हें रोकने का प्रयास किया. लेकिन सवर्णों ने दलितों और बाबासाहेब को अपशब्द कह कर लड़कों को मारना-पीटना शुरू कर दिया.

जब पुलिस आई तो सवर्ण जाति के लड़के वहां से भाग गए. पुलिस ने शांति बनाए रखने के लिए बाबासाहेब की दूसरी मूर्ति स्थापित करने के लिए कहा. जब दलित समुदाय के लड़के मूर्ति लेने के लिए हस्तिनापुर जाने लगे तो सवर्ण लड़कों ने उनका पीछा किया और सुनसान जगह पर पहुंचने पर उनपर गोलियां चलाने लगे. दलित समाज के लड़कों को अपनी मोटरसाइकिल रास्ते में छोड़कर खेतों में भागना पड़ा. लेकिन सवर्ण लड़कों ने उनकी मोटरसाइकिल को बुरी तरह से तोड़ दिया. यह घटना 4 अगस्त की है.

इतना कुछ होने पर भी राज्य सरकार हो केंद्र सरकार चुप है. याद करे ये वही मोदी सरकार है जो बाबासाहेब को अपना आदर्श मानने का दावा करते हैं लेकिन दलितों पर अत्याचार और बाबा साहेब के अपमान पर खामोश रहती है. खुद को दलित हितेषी सरकार भाजपा हमेशा दलित उत्पीड़न पर चुप्पी साधे रहती है.

टिकट कैंसेलेशन से रेलवे ने एक साल में की जमकर कमार्इ

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नई दिल्ली। रेलवे में आरक्षित (रिजर्व्ड) टिकटों को कैंसिल करने के बदले वसूले जाने वाले चार्ज से रेलवे का राजस्व वित्तीय वर्ष 2016-2017 में 14.07 रुपये अरब पर पहुंच गया है. ये इसके पिछले साल के मुकाबले 25.29 फीसदी ज्यादा है. कुछ समय पहले ही एक आरटीआई के तहत भी ये जानकारी रेलवे से मांगी गयी थी, जिसके बाद रेल मंत्रालय के रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) से ये जानकारी मुहैया करायी गयी थी.

टिकट कैंसिलेशन से रेलवे को होने वाली कमाई का आलम यह है कि वित्तीय वर्ष 2015-2016 में रेलवे ने टिकट कैंसिल करने के बदले में यात्रियों से 11.23 अरब रुपये कमाये हैं. इसके पहले साल 2014-2015 में रेलवे को 9.08 अरब रुपये और वित्त वर्ष 2013-2014 में 9.38 अरब रुपये की कमार्इ हुर्इ है. वहीं, अनारक्षित टिकटिंग प्रणाली (यूटीएस) के तहत बुक पैसेंजर टिकटों के कैंसिलेशन से रेलवे ने वित्त वर्ष 2012-2013 में 12.98 करोड़ रुपये की आमदनी हासिल की थी. वित्त वर्ष 2013-2014 में इससे रेलवे ने 15.74 करोड़ रुपये की कमाई हासिल की थी.

वित्त वर्ष 2014-2015 में रेलवे ने 14.72 करोड़ रुपये की कमाई कैंसिल्ड टिकटों से हासिल की थी. वहीं, वित्त वर्ष 2015-2016 में भारतीय रेलवे ने 17.23 करोड़ रुपये रद्द कराये गये टिकटों से हासिल किये थे. राज्यसभा में मंत्री की आेर से दी गयी जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2016-2017 में 17.87 करोड़ रुपये की कमाई हासिल की है.

भारत को युद्ध की तरफ धकेल रही है मोदी सरकारः चीनी मीडिया

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बीजिंग। भारत-चीन सीमा पर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. बढ़ते तनाव के बीच चीनी मीडिया ने मोदी सरकार पर निशाना साधा है. चीनी मीडिया ने धमकी भरी लहजे में लिखा है कि मोदी सरकार भारत को युद्ध की तरफ धकेल रही है.

बता दें कि इससे पहले भी चीनी मीडिया ने भारत को धमकी देते हुए लिखा था कि यदि युद्ध हुआ तो भारत को इस टकराव का परिणाम भुगतना पड़ सकता है. सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने कहा था कि भारत में उभर रहे ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ की वजह से भारत-चीन के बीच युद्ध हो सकता है. ग्लोबल टाइम्स ने कहा था कि ‘प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी को चुने जाने से देश में राष्ट्रवादी भावनाओं को बढ़ावा मिला है.’

ईनाडु इंडिया के मुताबिक चीन ने कहा था कि उसने भारत को अपने इस दृढ़ रूख की सूचना दे दी है कि मौजूदा गतिरोध खत्म करने के लिए उसे ‘‘बिना किसी शर्त के’’ सिक्किम क्षेत्र के डोकलाम से अपनी सेना तत्काल हटा कर ‘‘ठोस कार्रवाई’’ करनी चाहिए. इसके बाद भी भारत ने इसे नकार दिया है. भारत की ओर से कहा गया है कि एक भी भारतीय सैनिक डोकलाम से नहीं हटेगा.

हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत और चीन के बीच तनाव को लेकर लोकसभा में सरकार की स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि देश में सेना होती है, तो युद्ध के लिए ही होती है. लेकिन युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है. युद्ध के बाद भी जीतने और हारने वाले पक्षों को बातचीत के लिए बैठना होता है.

क्या है डोकलाम विवाद? दरअसल डोकलाम जिसे भूटान में डोलम कहते हैं. करीब 300 वर्ग किलोमीटर का ये इलाका चीन की चुंबी वैली से सटा हुआ है और सिक्किम के नाथुला दर्रे के करीब है. इसलिए इस इलाके को ट्राई जंक्शन के नाम भी जाना जाता है. ये डैगर यानी एक खंजर की तरह का भौगोलिक इलाका है, जो भारत के चिकन नेक यानी सिलिगुड़ी कॉरिडोर की तरफ जाता है. चीन की चुंबी वैली का यहां आखिरी शहर है याटूंग. चीन इसी याटूंग शहर से लेकर विवादित डोलम इलाके तक सड़क बनाना चाहता है. इसी सड़क का पहले भूटान ने विरोध जताया और फिर भारतीय सेना ने. चीन को ये बर्दाश्त नहीं हो रहा कि जब विवाद चीन और भूटान के बीच है तो उसमें भारत सीधे तौर से दखलअंदाजी क्यों कर रहा है. 16 जून से भारत और चीन की सेना के बीच यह गतिरोध जारी है.

पाकिस्तान की सरकार में होगा एक हिंदू मंत्री

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान में शुक्रवार को प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी ने अपने कैबिनेट मंत्रियों को दिलाकर अपनी सरकार बनाई. 20 सालों में पहली बार पाकिस्तान कैबिनेट सरकार में इस बार कोई भारतीय शामिल हैं इनका नाम दर्शन लाल है, जिन्हें पाक सरकार में अहम पदभार सौंपा गया है. पाक राष्ट्रपति ममनून हुसैन ने 47 सांसदों को कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाई, जिनमें से 19 राज्यमंत्री हैं. एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, भारतीय दर्शन लाल को पाकिस्तान के चारों प्रांतों के बीच समन्वय का प्रभारी बनाया गया है. गौरतलब है कि, 65 वर्षीय दर्शन लाल पेशे से डॉक्टर हैं. लाल वर्ष 2013 में PML-N पार्टी के टिकट पर अल्पसंख्यक कोटे से दूसरी बार सांसद चुने गए थे. तत्कालीन प्रधानमंत्री अब्बासी ने शरीफ कैबिनेट में रक्षा और ऊर्जा मंत्री रहे ख्वाजा आसिफ को विदेश मंत्री का पद सौंपा गया है. मालूम हो कि, पाक सरकार में साल 2013 से ही कोई विदेश मंत्री नहीं था, आखिरी विदेश मंत्री हीना रब्बानी खार थीं. बता दें, पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बीते हफ्ते पनामा पेपर्स लीक मामले में भ्रष्टाचार का दोषी मानते हुए पीएम पद से बरखास्त कर दिया था. जिसके बाद शाहिद खाकन अब्बासी को पाकिस्तान का नया प्रधानमंत्री बनाया गया है.

उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग आज ,शाम 7 बजे आएंगे नतीजे

संसद में उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है. 10 बजे शुरू हुई वोटिंग शाम 5 बजे तक चलेगी. शाम 7 बजे तक परिणाम भी आ जाएगा. भारत के 15वें उपराष्ट्रपति के लिए चुनावी मैदान में एनडीए की ओर से वेंकैया नायडू हैं, तो वहीं विपक्ष से पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और गांधीजी के पौत्र गोपालकृष्ण गांधी हैं.

मतदान में सांसद अपनी पसंद जाहिर करने के लिए खास तौर से तैयार कलम का इस्तेमाल करेंगे. निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने परंपराओं का हवाला देते हुए बताया कि मतदान के तुरंत बाद वोटों की गिनती होगी. गौरतलब है कि इस चुनाव में राजनीतिक दल व्हिप जारी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि वोट गोपनीय मतपत्र के माध्यम से डाले जाते हैं. बता दें कि मौजूदा उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त हो रहा है. वह लगातार दो बार इस पद पर रह चुके हैं.

-विपक्ष के उम्मीदवार गोपाल कृष्ण गांधी ने कहा कि यह लड़ाई संवैधानिक सिद्धातों की है. एनडीए के प्रत्याशी अनुभवी व्यक्ति हैं. हमारे बीच में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है.

सऊदी अरब हुआ मॉडर्न, अब बिकनी पहन सकेंगी महिलाएं

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रियाद। अरब देशों में महिलाओं की स्थिति किसी से छुपी नहीं है. महिलाओं को किसी भी काम के लिए आजादी नहीं मिली है. महिलाओं को घर के बाहर जाने के लिए भी किसी पुरूष की जरूरत होती है. महिलाएं छोटे कपड़े नहीं पहन सकती. इस बीच सऊदी की महिलाओं के लिए अच्छी खबर आई हैय सऊदी अरब में जल्द एक ऐसा लग्ज़री बीच रिज़ॉर्ट खुलेगा जहां महिलाओं को बिकीनी पहनने की इजाजत होगी. देश के प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने रेड सी नाम के इस रिजॉर्ट को देश के नॉर्थवेस्ट कोस्टलाइन के पास खोलने की घोषणा की है.

सऊदी की अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण के तहत इस रिज़ॉर्ट को खोलने की घोषणा की गई है. दुनिया भर में सऊदी में महिलाओं के लिए सबसे सख्त नियम हैं, जहां महिलाएं ड्राइविंग भी नहीं कर सकतीं और अपने पुरुष रिश्तेदार की मंजूरी के बिना यात्रा तक नहीं कर सकतीं.

महिलाओं को घर से बाहर निकलते समय अपने बाल और शरीर भी ढकना जरूरी है, जिसका मतलब यही है कि उनके बिकीनी पहनने का अभी तक सवाल ही नहीं था. लेकिन सरकार ने कहा है कि इस रिजॉर्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के आधार पर चलाया जाएगा.

200 मील में फैले इस रिज़ॉर्ट में महिलाएं तब भी बिकीनी में रह सकती हैं, जब पुरुष उनके आसपास हों. सऊदी अरब के इन्वेस्टमेंट फंड के मुताबिक रेड सी प्रॉजेक्ट एक लग्ज़री रिज़ॉर्ट है जो लगून आइलैंड के पास होगा. इससे सऊदी अरब भी इंटरनैशनल टूरिजम मैप में शामिल होगा. यहां आने वाले टूरिस्ट्स को पैराशूटिंग, ट्रैकिंग जैसी ऐक्टिविटिज का मजा भी मिलेगा. यह रिज़ॉर्ट 2019 में बनना शुरू होगा और 2020 तक इसके तैयार होने की उम्मीद है.

बनासकांठा में राहुल गांधी की गाड़ी पर हुआ पथराव, दिखाए गए काले झंडे

अहमदाबाद। गुजरात के बनासकांठा में बाढ़ पीड़ित लोगों से मिलने पहुंचे कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कार पर पथराव हुआ. और उन्हें काले झंडे भी दिखाए गए. पार्टी नेता रणदीप सुरजेवाला ने बताया कि इस हमले में राहुल गांधी की कार के शीशे टूट गए. बता दें कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज ही राजस्थान के जालौर जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों का दौरा किया था.

राहुल गांधी ने सांचोर के कच्छेला, देवड़ा, दवई, अमली, हदेचा जैसे गांवों में बाढ़ से प्रभावित लोगों से मुलाकात की. ये इलाके राज्य में हाल में पैदा हुई बाढ़ जैसी स्थिति से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. कई गांवों का संपर्क अब भी टूटा हुआ है. राजस्थान के बाद राहुल गांधी गुजरात के बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा करने पहुंचे थे.

राहुल ने ग्रामीणों के साथ बातचीत में कहा, हम आपके लिए जो भी कर सकते हैं, करेंगे. उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यहां कोई भी राहत कार्य या पुनर्वास की व्यवस्था नहीं की गई है. उनके साथ राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट भी थे. राहुल शुक्रवार को गुजरात के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का भी दौरा करेंगे.

बता दें कि भारी बारिश की वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों में बाढ़ की स्थिति बन गई है. बड़ी संख्या में लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं जिन्हें बचाने के काम सेना और एडीआरएफ की टीमें कर रही हैं. पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी भी गुजरात में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे थे. उन्होंने लोगों की मदद के लिए बड़ी धनराशि का ऐलान किया था और मंत्रियों अधिकारियों से मुलाकात करके राहत-बचाव का काम तेज करने का निर्देश दिया था.

मायावती करेंगी देशभर में महासम्मेलन, खोलेगी केंद्र सरकार और भाजपा की पोल

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की नई दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक हुई. इस बैठक में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष और प्रमुख बसपा नेता और कार्यकर्ता आए हुए थे. बैठक की अध्यक्षता बसपा सुप्रीमो मायावती ने की.

कार्यकारिणी बैठक में मोदी और भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों पर विचार किया गया. बैठक में कहा गया कि मोदी सरकार के जातिवादी, तानाशाही और द्वेषपूर्ण रवैये के कारण भारत बदहाली के रास्ते पर पहुंच गया है. केंद्र में भाजपा सरकार आने से देश के किसानों, मजदूरों और आम जनता को नहीं बल्कि धन्नासेठों और पूंजीपतियों को लाभ मिल रहा है. बैठक में कहा गया कि इसके विरूद्ध संघर्ष और विरोध करना देशहित में होगा.

बसपा प्रमुख मायावती ने विभिन्न राज्यों में पार्टी को मजबूत बनाने के लिए और जनाधार बढ़ाने के लिए लगातार जारी कैडर तैयारियों की भी समीक्षा की. उन्होंने पार्टी को बेहतर काम करने के लिए नए दिशा-निर्देश भी दिए. मायावती ने वर्तमान में हो रही राजनीतिक उथल-पुथल के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा और सीमा पर तनावपूर्ण हालात पर चर्चा की. चर्चा करने के बाद मायावती ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद देश की आंतरिक स्थिति और सीमा पर हालात बेहद खराब हुए हैं. हमारे जवानों की भी शहादत की संख्या भी बढ़ी है. इससे साबित होता है की भाजपा सरकार देश चलाने में सफल नहीं हो पाई है.

छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं ने बताया की भाजपा के वरिष्ठ नेता ने सैंकड़ों हेक्टेयर जंगल और आदिवासयों की जमीन पर कब्जा कर लिया और वहां रिजोर्ट बनाने का काम शुरू कर दिया. जिसका आदिवासी समाज ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से सवाल पूछ रही है कि भाजपा मंत्री द्वारा इस प्रकार की भू-माफियागिरी और भ्रष्टाचार के खिलाफ भाजपा द्वारा ऐसा टॉलरेंस क्यों? यह कौन सी देशभक्ति है?

कार्यकारिणी की अहम बैठक को संबोधित करते हुए मायावती ने कहा की सीबीआई, आयकर, ईडी, पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसी का केंद्र सरकार गलत उपयोग कर रही है. केंद्र सरकार विपक्षी दलों को भ्रष्ट साबित करने की लगातार कोशिश कर रही है. लेकिन भ्रष्ट भाजपा नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. केंद्र सरकार भेदभाव कर रही है. क्या यही भाजपा और मोदी का भ्रष्टाचार के विरूद्ध अभियान है?

मायावती ने कहा कि मोदी सरकार गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, सीमा सुरक्षा जैसे देशहित के साथ-साथ जनहित और जनकल्याण आदि महत्वपूर्ण मुद्दों पर बुरी तरह विफल हुई है. भाजपा अपनी कमजोरियों को छिपाने के लिए ही विरोधी पार्टियों के नेताओं को बदनाम कर रही है.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि पहले मोबोक्रेसी (भीड़ की अराजकता), देशद्रोह, लव-जेहाद, एंटी-रोमियों आदि के नाम पर उत्पीड़न और फिर नोटबंदी के माध्यम से केंद्र सरकार ने लोगों का ध्यान बंटाया. अब विपक्षी पार्टियों को अस्थिर करने, उन्हें भ्रष्ट साबित करने और उनकी आवाज को संसद तक में दबाने का लोकतंत्र-विरोधी प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि इसी लोकतंत्र विरोधी प्रयास के खिलाफ में मैंने 18 जुलाई को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा भी दिया.

मायावती ने कहा कि भाजपा सरकार के अहंकारी, विद्वेषपूर्ण, पक्षपाती, जातिवादी, तानाशाही, लोकतंत्र और जनविरोधी रवैये के खिलाफ बसपा चुप नहीं बैठेगी. भाजपा का पर्दाफाश करने के लिए देशभर में और मुख्यरूप से उत्तर प्रदेश में कार्यक्रम चलाया जाएगा. जिसके तहत उत्तर प्रदेश में अगले महीने 18 सितंबर से मंडल स्तर पर कार्यकर्ता महासम्मेलन हर महीने आयोजित किए जाएंगे. जबकि देश के अन्य राज्यों में यह प्रक्रिया नवंबर महीने से शुरु होगी. प्रत्येक महासम्मेलन में बसपा सुप्रीमो मायावती मुख्त अतिथि के तौर पर शामिल होंगी.

JSSC में निकली पुलिस पद के लिए बंपर वैकेंसी

झारखंड पुलिस में सब-इंस्पेक्टर के कुल 3019 पदों पर वैकेंसी निकली है. इन पदों के लिए आवदेन ऑनलाइन ही करना होगा. आवेदन करने की अंतिम तारीख 13 अगस्त, 2017 है. अभ्यर्थियों का चयन चार चरणों में किया जाएगा.

प्रारंभिक परीक्षा की संभावित तिथि अगस्त 2017 के अंतिम सप्ताह से सितंबर 2017 के दूसरे सप्ताह तक है. वहीं मुख्य परीक्षा की संभावित तिथि नवंबर 2017 प्रथम सप्ताह है.

आयु सीमा: न्यूनतम आयु 21 वर्ष और अधिकतम आयु 26 वर्ष है. ओबीसी वर्ग के लिए अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष और एससी-एसटी वर्ग के लिए आयु सीमा 30 वर्ष तय की गई है.

शैक्षणिक योग्यता: केंद्र या राज्य सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान या यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन की डिग्री.

वेतनमान – 9,300-34,800। ग्रेड वेतन- 4200 रुपये (छठा वेतनमान)

चयन प्रक्रिया: परीक्षा चार चरणों में ली जाएगी – प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा, शारीरिक जांच, चिकित्सीय परीक्षा. प्रारभिक और मुख्य परीक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा होगी.

इच्छुक अभ्यर्थी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट Jssc.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.

आवेदन शुल्कः सामान्य वर्ग के लिए 460 रुपये और झारखंड के एससी-एसटी वर्ग के लिए 115 रुपये आवेदन शुल्क तय किया गया है.

अहम तारीखें: ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख: 13 अगस्त, 2017 आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तारीख: 14 अगस्त, 2017 फोटो और सिग्नेचर अपलोड करने की आखिरी तारीख: 16 अगस्त,2017 कंप्यूटर आधारित प्रारंभिक परीक्षा: अगस्त के आखिरी हफ्ते से लेकर सितंबर के दूसरे हफ्ते के बीच संभवत: हो सकती है मुख्य परीक्षा की तारीख: नवंबर 2017