राम रहीम केसः पंचकूला में हुई हिंसा से 30 लोगों की मौत और 250 घायल

पंचकूला। पंचकूला की सीबीआई कोर्ट द्वारा बाबा राम रहीम को बलात्कारी करार देने के बाद उनके लाखों समर्थक सड़कों पर उतरे थे. पंजाब और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों सहित दिल्ली और यूपी में हिंसा और आगजनी की खबरें आई है. पंचकूला में दो दिन से जमा डेरा समर्थक गुंडागर्दी और हिंसा पर उतारू हुए. जगह-जगह गाड़ियों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई.

पुलिस ने उपद्रवियों को काबू में करने के लिए फायरिंग की. इस हिंसा में पंचकूला में अब तक 30 लोगों की मौत और 250 लोगों के घायल होने की खबर है. पंचकूला में कर्फ्यू लगा दिया गया है, कोर्ट के आसपास के इलाके को खाली करा लिया गया है. शहर में सेना की 6 टुकड़ियां तैनात की गई हैं. इस बीच राज्य में बिगड़ते हालात के मद्देनजर मनोहर लाल खट्टर कैबिनेट ने आपात बैठक की है.

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बीएस संधु ने शुक्रवार को रात में कहा कि बलात्कार के एक मामले में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद पंचकूला में भड़की हिंसा के बाद करीब 550 लोगों को हिरासत में लिया गया है और कुछ हथियार एवं गोला-बारूद बरामद किए गए हैं.

डेरा समर्थकों ने निजी टीवी चैनल एनडीटीवी के ओबी बैन को आग के हवाले कर दिया है. इसके अलावा टाइम्स नाऊ और आज तक के ओबी बैन को तोड़ा गया है. बाबा के समर्थकों ने मीडिया को निशाना बनाने के साथ-साथ चंडीगढ़-शिमला हाई वे पर आम लोगों को भी निशाना बनाया है. पंचकूला में जीवन बीमा बिल्डिंग के पास 100 गाड़ियों को फूंक दिया गया है. पुलिस पर भी नाराज समर्थक पत्थर फेंक रहे हैं. पंजाब में भी उग्र डेरा समर्थकों ने दो रेलवे स्टेशन में आग लगा दिया है. पंजाब के बरनाला में टेलिफोन एक्सचेंज फूंक दिया गया है.

आज़ादी और ख्वाइशों की फीकी कहानी है ‘कैदी बैंड’

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फिल्म की कहानी एक सच्ची घटना से प्रेरित बताई जा रही है. कहानी है एक जेल के कैदियों की. सात कैदी जेल में बंद हैं, जिनपर अंडर ट्रायल का मुकदमा चल रहा है. बिंदू (आन्या सिंह), संजू (आदर जैन) पर छोटे मोटे जुर्म का केस चल रहा है. कैदी बैंड की शुरुआत मचल लालंग के परिचय से होती है, जो बिना किसी कुसूर के 54 सालों तक जेल में रहा.

एक राजनेता जेलर दविंदर धुलिया से जेल के अंदर कैदी बैंड बनाने की बात कहते हैं. इस कैदी बैंड में केवल अंडर ट्रायल कैदियों को शामिल किया जाता है और जेल के अंदर स्वतंत्रता दिवस पर एक प्रोग्राम होता है, जहां यह कैदी अपनी प्रस्तुति देते हैं.

वहीं जिस बात का पता है वही होता है..इसी बीच हीरो हिरोइन की प्रेम कहानी भी शुरू होती है और साथ ही ये जेल से भागने का प्लान भी बनाया जाता है ताकि वो अंडर ट्रायल की समस्या से दुनिया को रू-ब-रू करा सकें. इसमें वह सफल होते हैं या नहीं इसी कहानी पर बनी है कैदी बैंड.

एक इंटरव्यू में हबीब फैज़ल ने बताया था कि फिल्म के लिए आइडिया उन्हें तब आया जब वो एक बार तिहाड़ जेल के बारे में कुछ पढ़ रहे थे. ये फिल्म सामाजिक मद्दों (अंडरट्रायल के हालातों) को उजागर करती है. फिल्म फर्स्ट हाफ में तो कुछ कुछ आपको बांधे रखेगी लेकिन सेकेंड हाफ को हज्म करने में थोड़ी कठिनाई होगी. बहुत सी ऐसी चीज़ें हैं जो आपको अवास्तविक लगेंगी. ऐसा लगता है कि निर्देशक को थोड़ा और काम करना चाहिए था. कमज़ोर निर्देशन की वजह से आपका फिल्म से इंट्रस्ट कम हो सकता है.

रणबीर कपूर के कज़िन आदर जैन की ये डेब्यू फिल्म है और पहली ही फिल्म में उनकी शानदार एक्टिंग आपका दिल जीत लेगी. उनकी आवाज़ आपको कहीं ना कहीं रणधीर कपूर की याद ज़रूर दिलाएगी. कैमरा के आगे वो काफी शानदार लगे हैं. वहीं बात की जाए आन्या की तो उनकी परफॉर्मेंस भी ज़बरदस्त है. वहीं बाकी की स्टार कास्ट ने भी काफी अच्छी कोशिश की है.

निर्देशक : हबीब फैसल प्रोड्यूसर : आदित्य चोपड़ा लेखक : हबीब फैसल

म्यांमार में सेना और रोहिंग्या विद्रोहियों में झड़प, 32 की मौत

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यंगून। म्यांमार के राखिन प्रांत में सुदूरवर्ती सीमा चौकियों पर कथित रोहिंग्या उग्रवादियों के हमले में म्यांमार सुरक्षा बलों के 11 कर्मियों समेत कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई. सेना के कमांडर इन चीफ ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.

कमांडर इन चीफ मिन आंग हलांग ने फेसबुक पर कहा कि एक सैनिक और 10 पुलिसकर्मियों ने देश के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया.

उन्होंने बताया कि लड़ाई अब भी जारी है जिसमें 21 उग्रवादी भी मारे गए हैं. वहीं, स्टेट काउंसलर आंग सान सू की के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि शुक्रवार तड़के करीब 150 उग्रवादियों ने 20 से अधिक पुलिस चौकियों पर हमला किया. सैनिकों ने भी जवाबी कार्रवाई की. धार्मिक घृणा के चलते बंटे तटीय देश में पिछले साल अक्टूबर से चल रही हिंसा में यह सबसे भीषण हमला बताया जा रहा है.

कोफी अन्नान की अगुआई वाली समिति ने गुरुवार को आंग सांग सू की को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें रोहिंग्या संकट के समाधान के लिए अत्यधिक बल प्रयोग से बचने की सलाह दी गई है. इसके कुछ घंटों बाद ही विद्रोहियों ने सुनियोजित तरीके से सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया. म्यांमार की सेना ने कुछ इलाकों में मुठभेड़ जारी होने की बात कही है.

पिछले साल अक्टूबर के बाद यह दोनों पक्षों के बीच सबसे भीषण मुठभेड़ है. विद्रोही संगठन ने ऐसे और हमले की धमकी दी है. इस हमले में तकरीबन डेढ़ सौ लड़ाकों के शामिल होने की बात कही जा रही है. हालांकि, अपुष्ट सूत्रों की मानें तो इसमें एक हजार विद्रोही शामिल हैं.

वर्धा हिंदी विश्वविद्यालय में दलित छात्र को दी जातिसूचक गालियां

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वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में एक बार फिर जातीय भेदभाव की घटना सामने आई है. मास्टर ऑफ सोशल वर्क (एमएसडब्लू) के तीसरे सेमेस्टर के जातिवादी मानसिकता वाले छात्र ने बौद्ध अध्ययन में पढ़ने वाले एमए के छात्र का चीवर(चोला) पकड़ कर खींचा और जातिसूचक गालियां दी.

दरअसल, बौद्ध अध्ययन में एमए के तीसरे सेमेस्टर का दलित छात्र धम्मवीर बौद्ध बिरसा मुंडा हॉस्टल के मेस में डिनर करने के बाद वापस छात्रावास में आया तो गेट पर एमएसडब्लू के छात्र चंद्रभूषण सिंह ने उस पर हमला कर दिया. चंद्रभूषण ने धम्मवीर का चीवर पकड़कर खींचा और जातिसूचक गाली देने लगा. जब दलित छात्र ने विरोध किया तो उसने गाली देते हुए कहा कि मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता.

इस घटना का जब धम्मवीर के दोस्तों को पता चला तो वह चंद्रभूषण से बातचीत करने गए लेकिन उसने उनको भी धमकाया और कहा कि वह धम्मवीर को जान से मार देगा. उस समय चंद्रभूषण ने शराब पी रखी थी. ऐसा यह आए दिन करता रहता है और अन्य छात्रों से भी गाली गलौज करता रहता है. चंद्रभूषण को हॉस्टल में कोई रूम अलोट नहीं हुआ है. इसके बावजूद भी वह हॉस्टल में ही रहता है.

धम्मवीर बौद्ध ने इस मामले में वर्धा के रामनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत पत्र में धम्मवीर ने लिखा है कि इस घटना से मेरे चीवर की छवि धूमिल हुई है और मैं काफी अपमानित महसूस कर रहा हूं. धम्मवीर ने उचित कार्रवाई की मांग की है.

राम रहीम केस में हरियाणा और पंजाब के बाद अब दिल्ली में भी हिंसा

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नई दिल्ली। साध्वी के यौनशोषण के मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद उनके समर्थक उत्पात मचा रहे हैं. पंजाब और हरियाणा में हिंसा की आग दिल्ली-एनसीआर भी पहुंच चुकी है. दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर गुरमीत के समर्थकों ने रीवा एक्सप्रेस के 2 डिब्बों को आग के हवाले कर दी. इसके अलावा शाहदरा में डेरा समर्थक गुंडों ने डीटीसी की बस को आग के हवाले कर दिया. दिल्ली में कुल 7 जगहों पर डेरा समर्थकों द्वारा हिंसा और आगजनी की खबर है.

यूपी के गाजियाबाद में भी डेरा समर्थकों ने गुंडागर्दी की है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोनी में गुरमीत समर्थकों ने 2 बसों में आग लगा दी. लोनी में गोलचक्कर के पास यूपी की एक बस में आगजनी हुई है. बताया जा रहा है कि 2 लोगों ने बस को आग के हवाले कर दिया. मौके पर दमकल की गाड़ियां मौजूद हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद करेजरीवाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

बता दें कि पंचकूला स्थित सीबीआई अदालत ने साध्वी के यौनशोषण मामले में गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराया है. सजा का ऐलान सोमवार को होगा. गुरमीत को दोषी ठहराए जाने के बाद उनके समर्थक पंचकूला में उत्पात मचाने लगे. पंजाब के कुछ जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया है जबकि पंचकूला में सेना की 6 टुकड़ियों को तैनात किया गया है. अब तक हिंसा में 12 लोगों की मौत हो चुकी है.

बेसिक शिक्षा अधिकारी ने रोकी 211 दलित शिक्षकों की सैलरी

मुजफ्फरनगर। योगी राज में दलितों का शोषण बढ़ता ही जा रहा है. इस बात का अंदाजा आप इस बात से भी लगाया सकता है मुजफ्फरनगर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दलित शिक्षकों का वेतन मनमाने तरीके से रोक दिया है.

दरअसल, मुजफ्फरनगर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे 211 दलित शिक्षकों का मासिक वेतन गलत तरीके से रोक दिया गया है. यह दलित समुदाय के उत्पीड़न की बहुत बड़ी घटना है. इतना ही नहीं, वेतन रोकने के साथ-साथ मुजफ्फरनगर के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अनुसूचित जाति के शिक्षकों को जातिसूचक अपशब्द भी कहे. जब दलित शिक्षक अपनी बात रख रहे थे तो शिक्षा अधिकारी उन्हें कहा, “अब मुझे नीच जाति के लोगों की भी बात सुननी पड़ेगी”. अनुसूचित जाति के शिक्षकों ने शिक्षा अधिकारी की इस बात को घोर जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता वाला बताया.

दलित शिक्षकों और मुजफ्फरनगर की एससी/एसटी बेसिक टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन की शाखा ने कहा है कि मुजफ्फनगर शिक्षा अधिकारी द्वारा अनुसूचित जाति के शिक्षकों का मानसिक और जातीय उत्पीड़न किया जा रहा है. हम इसकी निंदा करते है.

दलित शिक्षक और एसोसिएशन इस मामले में 28 अगस्त 2017 को लखनऊ में बेसिक शिक्षा निदेशक से मुलाकात कर ज्ञापन देगा. साथ ही यह भी मांग की जाएगी कि दलित विरोधी मानसिकता वाले बेसिक शिक्षा अधिकारी को तत्काल निलंबित कर जेल भेजा जाए.

एसोसिएशन ने कहा है कि अगर निदेशक हमारी मांग नहीं मानते है तो हम लोग एक बड़ा आंदोलन करेंगे.

अब मुंबई में ट्रेन के 4 डब्बे पटरी से उतरे, 5 घायल

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मुंबई। मुंबई में अंधेरी-सीएसटी हार्बर लोकल ट्रेन के 4 डिब्बे पटरी से उतर गए, जिसमें 5 लोगों के घायल होने की खबर है. माहिम दक्षिण के नजदीक 9.55 पर यह हादसा हुआ. वडाला और अंधेरी के बीच ट्रेनें प्रभावित हुई हैं. दफ्तर जाने का समय होने की वजह से वहां लोगों की भीड़ काफी बढ़ गई थी.

यह लोकल ट्रेन छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस से चली थी और अंधेरी स्टेशन की ओर जा रही थी. माहिम स्टेशन के पास इसके ऊपर लगे उपकरण (ट्रेन की गति के लिए बिजली उपलब्ध करवाने वाला उपकरण) में खराबी का पता चला. पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी रविंदर भाटकर ने कहा कि इस समस्या के कारण ट्रेन को दूसरी पटरी पर भेजा जाना था. 9 बजकर 55 मिनट पर जब ट्रेन प्लेटफॉर्म से पीछे की ओर बढ़ रही थी, तभी सामने के चार डिब्बे पटरी से उतर गए. उन्होंने कहा कि डिब्बों को जल्दी से जल्दी वापस पटरी पर लाने की कोशिशें हो रही हैं.

पश्चिमी रेलवे ने एक ट्वीट में कहा, सीएसएमटी-अंधेरी हार्बर लोकल के चार डिब्बों को लगभग तीन घंटे में वापस पटरी पर लाए जाने की संभावना है. हल्की चोटों का शिकार हुए पांच यात्रियों को प्राथमिक चिकित्सा दी गई है. भाटकर ने कहा कि ट्रेन के पटरी से उतरने के कारण वडाला-अंधेरी प्रखंड पर ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हुई है, हालांकि चर्चगेट-विरार प्रखंड की सभी पश्चिमी मुख्य लाइनों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. उन्होंने कहा कि घटना की वजह का पता लगाने के लिए एक जांच गठित की जाएगी.

गौरतलब है कि हाल ही में यूपी के मुज्‍जफरनगर और ओरैया में दो ट्रेन हादसे हुए हैं. मुज्‍जफरनगर हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि ओरैया में करीब 100 से अधिक लोग जख्‍मी हो गए थे. मुंबई की लोकल में रोज लाखों लोग सफर करते हैं.

देश में लगातार बढ़ रहे ट्रेन हादसों की वजह से रेल मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इशारों में पीएम मोदी से इस्तीफे की पेशकश की थी, जिसके बाद पीएम मोदी ने उन्हें इंतजार करने को कहा था. सूत्रों के मुताबिक- 27 अगस्त को कैबिनेट में फेरबदल हो सकता है और उनकी जगह किसी और को रेलमंत्री बनाया जा सकता है.

तीन तलाक पर अब केंद्र सरकार दिखाए अपनी नियति!

21 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया. इस फैसले में मुस्लिम समुदाय का एक प्रथा जो सदियों चली आ रही थी, उसका अंत हुआ. इस प्रथा को तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत कहते हैं. अगर किसी मुस्लिम पुरूष के मुंह से 3 बार तलाक शब्द निकल जाए तो उसे तलाक मान लिया जाता है. कुरान मैं इसका कोई ज़िक्र नहीं है, यह बस एक कुप्रथा है. दुनिया में ऐसे बहुत से मुस्लिम देश हैं जहां 3 तलाक पर कानूनी रूप से रोक लगा दी गई है, लेकिन भारत मे यह प्रथा पिछले 1400 वर्षों से चली आ रही है.

भारत में तीन तलाक का मुद्दा 1978 से शुरू हुआ. इंदौर की रहने वाली शाहबानो को उनके पति मोहम्मद एहमद खान ने 1975 में घर से निकाल दिया था. लेकिन शाहबानो के 5 बच्चे थे. घर से बाहर निकालने से पहले एहमद खान दूसरी शादी कर ली थी और दोनों पत्नियों के साथ रहने लगे. एहमद खान ने शाहबानों के साथ जो 14 साथ साल बिताए थे उसने मात्र तीन बार तलाक बोल कर खत्म कर दिया और शाहबानो को बच्चों सहित घर से बाहर निकाल दिया. प्रथा के अनुसार जो मेहर होती है वह भीं देने से इंकार कर दिया.

उसके बाद शाहबानो अदालत मैं गई, फैसला भी आया लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने कानून में बदलाव कर दिया. इसे अभी तक एक गलती मानी जाती है. इसका जिक्र पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अपनी पुस्तक में किया है. शाहबानो के केस से शुरू हुआ ये मामला 2015 तक आया. इसके बाद 7 और मामले प्रकाश में आए जो शायरा बानो, आफरीन रेहमान, गुलशन परवीन और अतिया साबरी ने दायर किए थे. सुप्रीम कोर्ट में ऐसे और भी कई मामले थे जिन्हे देखते हुए इन पर सुनवाई शुरू की गई और तुरंत फैसला सुनाया गया.

पांच जजों की बेंच ने 3-2 के बहुमत से यह फैसला सुनाया की तलाक असंवैधानिक हैं, रीति रही हो या फिर परंपरा, लेकिन ये कानून की कसौटी पर खरी नहीं उतरती है, न्यायाधीशों के बेंच में चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर, जस्टिस कूरियन जोसेफ, जस्टिस रोहिंताम फालिमिस्ट्री, जस्टिस उदय प्रकाश ललित और जस्टिस अब्दुल नाज़ी शामिल थे. यह सभी अलग-अलग धर्म के हैं.

2011 जनगणना के अनुसार करीब 20,30,000 महिलाएं ऐसी हैं जिन्हें बिना तलाक दिए घर से बाहर निकाल दिया गया. इनके सामने एक नहीं बल्कि कई सारी समस्याएं हैं, एक तो पति ने घर से निकाल दिया और अब वह अपने मां-बाप के पास भी चली जाती हैं तो वहां लावारिस बन कर रह जाएंगी. पारम्परिक रूप से लड़कियों को पराया धन माना जाता है. ये अब दूसरी शादी भी नहीं कर सकती क्योंकि यह तलाकशुदा नहीं हैं.

वृन्दावन हो, बनारस हो या फिर हरिद्वार, यहां ऐसी विधवाएं हैं जिन्हें उनके घर वालो ने भी छोड़ दिया है, क्योंकि भारत में आज भी विधवाओं को बोझ माना जाता है. अकेले वृन्दावन मैं ऐसे 4 आश्रम है जहां इन्होंने पनाह ली है और भीख मांगने को मजबूर हैं. हम सरकार से यह उम्मीद करते हैं कि जब भी वह तीन तलाक के ऊपर कानून बनाएं तो इन सभी महिलाओ के बारे में भी सोचें जिन्हे उनके पतियों ने छोड़ दिया है.

अब देखना होगा कि न्यायपालिका के फैसले के बाद केंद्र सरकार तीन तलाक पर कैसा कानून बनाती है? तीन तलाक पर सरकार द्वारा कानून बनाना एक चुनौती पूर्ण काम होगा. सरकार के तीन तलाक को कानूनी अमलीजामा पहनाया जाएगा तो सरकार के पक्ष और विपक्ष दोनों में मुस्लिम लोग और संस्थाए शामिल होगी. हालाकिं कुछ मुस्लिम संस्थाएं और धर्मगुरू न्यायपालिका के इस आदेश का विरोध कर रहे हैं. केंद्र सरकार का तीन तलाक मुद्दे पर कानून बनाना उनकी राजनीति को प्रभावित करेगा.

लेखक पत्रकार हैं

दलित से मारपीट और जातिसूचक गाली देने के मामले में AAP नेता संजय सिंह की 26 को पेशी

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के नेता और प्रवक्ता संजय सिंह 24 अगस्त को अचानक एससी-एसटी कोर्ट पहुंचे. संजय सिंह दलित उत्पीड़न और मारपीट के मामले में पिछले 10 साल से फरार चल रहे थे. गुरूवार को उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया.  एससी-एसटी कोर्ट ने उन्हें जमानत देते हुए 26 अगस्त को फिर से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया है.

दरअसल, संजय सिंह ने अपने साथियों के साथ दस साल पहले सदर तहसील के रजिस्ट्री कार्यालय में कार्यरत दलित लिपिक रामसागर के साथ मारपीट की और उन्हें जातिसूचक गालियां भी दी. रामसागर ने संजय सिंह और उनके साथ अनिल द्विवेदी और आशुतोष सिंह पर सरकारी कार्यालय में घुसकर मारपीट करने और दलित उत्पीड़न का मुकदमा नगर कोतवाली में दर्ज करवाया था.

पुलिस दर्ज एफआईआर के मुताबिक पांच जून 2007 को रजिस्ट्री कार्यालय में संजय सिंह अपने भाई की शादी का प्रमाण पत्र बनवाने गए थे. औपचारिकताएं अपूर्ण होने के कारण लिपिक ने दस्तावेज पूरा करने की बात कही. इसी बात पर रामसागर को संजय और उनके साथ में अनिल और आशुतोष ने जातिसूचक गालियां देकर पिटाई की.

तीनों के खिलाफ पुलिस ने 29 अगस्त 2007 को चार्जशीट दाखिल की थी. उसके बाद कोर्ट में उन्हें समन भेज कर तलब किया था. आरोपितों के हाजिर नहीं होने पर बीते साल तीन फरवरी से कोर्ट ने गभड़िया निवासी संजय सिंह, अनिल द्विवेदी तथा निरालानगर निवासी आशुतोष सिंह पर गैर जमानती वारंट जारी किया है.

घटना के समय संजय सिंह, सपा के पूर्व विधायक अनूप सण्डा के पीआरओ थे. संजय ने वारंट के बाद अधिवक्ता रुद्र प्रताप सिंह, अरविन्द सिंह राजा के माध्यम से कोर्ट में सरेंडर किया. विशेष कोर्ट के जज उत्कर्ष चतुर्वेदी ने उन्हें अन्तरिम जमानत दी. साथ ही 26 अगस्त को फिर से हाजिर होने का आदेश दिया है. उस दिन नियमित जमानत पर सुनवाई होगी. मामले में अनिल द्विवेदी और आशुतोष सिंह अब भी हाजिर नहीं हुए हैं.

यौन शोषण मामले में राम रहीम दोषी करार, सेना की निगरानी में जाएंगे जेल

पंचकुला। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम के खिलाफ दायर यौन उत्पीड़न के मामले में सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने बाबा राम रहीम को दोषी करार दे दिया है. इस महीने की 28 तारीख को सजा का ऐलान होगा. सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार राम रहीम को अंबाला जेल में रखा जाएगा. हालांकि कोर्ट आने के दौरान राम रहीम के अंबाला समर्थकों ने पुलिस से झड़प की थी.

अब राम रहीम को सेना कड़ी सुरक्षा के बीच अंबाला जेल लेकर जाएगी. लेकिन अंबाला में समर्थकों के व्यवहार को देखते हुए राम रहीम को किसी अन्य जेल में भी बंद किया जा सकता है.

गौरतलब है कि हरियाणा के सिरसा और पंचकुला में हालात को देखते हुए गुरुवार रात से ही कर्फ्यू लगा दिया गया है. पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में 72 घंटों के लिए इंटरनेट, डाटा सर्विस सस्पेंड कर दी गई है. रेलवे ने हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़ और राजस्थान जाने वाली 74 ट्रेनों को रद्द कर दिया. रोडवेज ने कई रूट्स की बसें बंद कर दीं.

आज सुबह बाबा की गाड़ियां जैसे ही डेरे से कोर्ट के लिए निकलीं, कई भक्त उनकी गाड़ियों के आगे लेट गए, लोगों ने उन्हें आगे से हटाया. इसके बाद डेरे से काफिला रवाना हुआ. सिरसा से राम रहीम के रवाना होने के बाद उनके कई भक्त रो रहे थे तो कई बेहोश हो गए. शुक्रवार को जम्मू से पंजाब जाने वाली सभी ट्रेनों को अगले आदेश तक रद्द कर दिया गया है.

पंचकुला में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आर्मी के हेलिकॉप्टर से नजर रखी जा रही थी. कैथल में राम रहीम के समर्थकों ने करीब 40 मिनट तक काफिले को रोके रखा था. वे सड़क पर लेट गए और सुरक्षाकर्मियों को उन्हें हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी.

पर्सनल लॉ बोर्ड पर बरसे बुखारी, कहा- मुसलमानों और शरिया का बनाया मजाक

नई दिल्ली। तीन तलाक पर कोर्ट का फैसला आ चुका है, जिसके बाद ही लोगों ने फैसले के ऊपर प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को ‘असंवैधानिक’ करार दिया है. जिसके बाद बुधवार को जामा मस्जिद के शाही इमाम मौलाना अहमद बुखारी ने अपनी प्रतिक्रिया देते ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को फटकार लगाई है. शाही इमाम ने कहा कि लॉ बोर्ड ने अदालत में दोहरा रूख अपनाया है.

बुखारी ने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भ्रम पैदा किया है. उन्होंने कहा कि एक तरफ तो उनका कहना है कि तलाक-ए-बिद्दत गुनाह है तो दुसरी तरफ उसने इसे वैसे ही रहने दिया. उन्होंने कहा कि पहले तो एक बार मे तलाक दुरस्त नहीं है ऐसे लोगों का बहिष्कार किया जाएगा.

शाही इमाम ने कहा है कि जब कोई चीज गुनाह है तो उसे शरिया द्वारा कैस अनुमति दी जा सकती है? बुखारी ने कहा कि इस मामले में प्रतिवादी बनाए गए एआइएमपीएलबी ने अदालत में पक्ष रखने से पहले परामर्श लिया था? इस्लाम के जानकारों से बात की थी? बुखारी ने हालांकि अदालत के फैसले का स्वागत किया.

दलितों के सामाजिक बहिष्कार पर हाईकोर्ट ने पुलिस-प्रशासन को लगाई फटकार

हांसी। भाटला में दलितों के साथ सामाजिक बहिष्कार के मामले में हाइकोर्ट जस्टिस एबी चौधरी की अदालत में आज (24 अगस्त) को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान जब हाइकोर्ट में अदालत ने सरकारी वकील से गांव भाटला में दलितों के सामाजिक बहिष्कार के बारे रिपोर्ट तलब की तो सरकारी वकील कोई रिपोर्ट पेश नही कर सके. जिस पर हाइकोर्ट के न्यायधीश गुस्सा हो गए तथा उन्होंने सरकारी वकील को कड़ी फटकार लगाई और कहा की प्रशासन को गांव में सामाजिक बहिष्कार रोकने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए थे.

कोर्ट ने कहा कि मौके पर डीसी और एसपी को किसी जन प्रतिनिधि के साथ जाना चाहिए था. पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि गांव में अभी तक सामाजिक बहिष्कार जारी है. उन्हें रोजमर्रा का सामान भी नहीं मिल पा रहा है. बच्चो को स्कूल जाने में भी परेशानी हो रही है. दलित कार्यकर्ताओ पर जूठे मुकदमे दर्ज किये जा रहे है.

हाइकोर्ट के 12 अगस्त के आदेश के बाद गांव में 19 अगस्त को केवल एसडीएम और डीएसपी नरेंद्र कादियान गये थे. पीड़ित पक्ष ने बताया कि गांव में वह डीएसपी गए थे जिनके खिलाफ दलित समुदाय ने पक्षपात की शिकायत कर रखी है. हाईकोर्ट ने सरकारी वकील पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह गलत है. आदेश दिए की अब इस मामले में हिसार के जिला और सत्र न्यायाधीश को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर उनसे ज्यूडिशल इन्क्वारी कराई जाएगी.

इस मामले में 25 अगस्त को जिला और सत्र न्यायाधीश गांव में जाकर रिपोर्ट तैयार करके सोमवार 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करेंगे. ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क और नेशनल अलायन्स फॉर ह्यूमन राइट्स के संयोजक और अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि भाटला का अजय दहिया जो सामाजिक बहिष्कार के मामले में शिकायतकर्ता है, की और से ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क ने एक याचिका दायर की थी.

इस याचिका में अजय ने सामाजिक बहिष्कार के मामले में हांसी सदर थाना में दर्ज मुकदमे में हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिमल कुमार के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमे सामाजिक बहिष्कार के भाटला निवासी एक आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी थी. अधिवक्ता कल्सन ने बताया कि याचिका पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट जनरल को अदालत में तलब कर सामाजिक बहिष्कार मामले को सामाजिक मध्यस्था से सुलझाने के आदेश दिए थे जिस पर एडवोकेट जनरल ने भी मामले को उच्चतम स्तर पर संज्ञान में लाकर सुलझने की बात कही थी.

अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि इसके बाद गांव में अगस्त को उपमंडल अधिकारी नागरिक हांसी और डी एस पी नरेंद्र कादियान गांव में आये थे और ग्रामीणों से बातचीत करके चले गए थे. इस आदेश के संज्ञान में आने के बाद आज हांसी अदालत परिसर में भाटला के दलित समाज को अपने चैम्बर में अधिवक्ता रजत कल्सन ने इस फैसले की जानकारी दी .

कल्सन ने दलित ग्रामीणों को बताया कि हिसार के सत्र और जिला न्यायाधीश इस बारे में जल्द ग्रामीणों से संपर्क कर सकते है. दलित ग्रामीणों ने कहा कि वे भाटला प्रकरण में हांसी पुलिस जिला के एसपी, एएसपी, डीएसपी और एसएचओ थाना सदर हांसी की नकारात्मक भूमिका की जानकारी देंगे जिन्होंने जात-पात की आग भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. दलित ग्रामीणों ने कहा कि तीनों मुकदमो के आरोपियो की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे.

गौरतलब है कि हांसी के गांव भाटला में 15 जून को सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने को लेकर दलित और ब्राह्मण लड़कों के बीच झगड़ा हुआ था. दलित समुदाय ने जब मारपीट और झगड़े की शिकायत पुलिस थाने में की तो ब्राह्मणों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया. ब्राह्माणों ने दलितों के गली में चलने से, पशुओं को खेत में चराने से, तालाब में पशुओं को पानी पीने से रोक दिया. एक तरह से दलित समुदाय के लोगों का किसी भी सार्वजनिक जगह पर जाने से प्रतिबंध लगा दिया.

रजत कल्सन की रिपोर्ट

‘झारखंड में बनेगा आदिवासी स्वयंसेवक संघ’

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रांची। आदिवासी सरना महासभा का वार्षिक सम्मेलन 21 अगस्त को हुआ. यह सम्मेलन रांची के संगम गार्डेन मोरहाबादी में आयोजित हुआ. सम्मेलन का आयोजन पूर्व विधायक देवकुमार धान ने किया.

देवकुमार धान ने सम्मेलन में कहा कि आदिवासियों की रक्षा के लिए आदिवासी स्वयंसेवक संघ बनाने की जरूरत है, जो शिक्षा, अंधविश्वास उन्मूलन, आर्थिक विकास, राजनीतिक जागरूकता जैसे मुद्दों पर काम करेगा. संघ के गठन के बाद इसमें समाज के युवाओं को जोड़ा जाएगा. उन्होंने कहा कि जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कोड और इसके लिए किसी एक नाम पर सहमति बनाने के लिए 14 नवंबर 2017 को रांची तथा तीन एवं चार फरवरी 2018 को दिल्ली में सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. पांच फरवरी 2018 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर में महाधरना देंगे. सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में गलत संशोधन करने का प्रयास कर रही है. देवकुमार धान ने कहा कि किसी परियोजना की शुरूआत से पहले सोशल इंपैक्ट के मूल्यांकन का प्रावधान समाप्त करना चाहती है. इसके खिलाफ लड़ेंगे. विश्वनाथ तिर्की ने कहा कि आदिवासियों को अपना अधिकार जानना होगा. मौके पर मांग की गई कि सरकार राजधानी रांची और दिल्ली में आदिवासी भवन बनवाये.

25 अगस्त से मार्केट में आएगा 200 रूपए का नोट

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) कल (25 अगस्त) को 200 रुपए का नया नोट जारी कर देगा. यह महात्मा गांधी की नई सीरीज वाला नोट होगा. माना जा रहा है कि यह नोट नकदी की समस्या को हल करने के साथ साथ 100 रुपए के नोट पर पड़ रहे दबाव को भी कम करने की कोशिश करेगा.

आरबीआई ने एक रिलीज के जरिए जानकारी दी है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया 25 अगस्त 2017 को महात्मा गांधी की नई सीरीज वाले 200 रुपए के नए नोट जारी कर देगा. इस नोट में गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे.

माना जा रहा है कि 200 रुपए का नया नोट बाजार में फुटकर की किल्लत को खत्म कर सकता है. क्योंकि 500 और 2000 रुपए के नोट के बीच कोई अन्य मूल्यवर्ग का नोट नहीं होने के कारण छोटे नोटों की उपलब्धता को लेकर परेशानियां सामने आ रही हैं. वहीं आरबीआई का यह भी मानना है कि 200 रुपए का नया नोट तेजी से पापुलर हो जाएगा.

जानिए कैसा दिखेगा 200 रुपए का नया नोट:

  • महात्मा गांधी की नई सीरीज के साथ जारी किए जाने वाले 200 रुपए के नोट में उर्जित पटेल के हस्ताक्षर होंगे.
  • यह नोट हल्के पीले रंग का होगा.
  • इसमें देवनागरी लिपि में 200 रुपए लिखा हुआ होगा.
  • केंद्र में महात्मा गांधी की तस्वीर होगी.
  • माइक्रो लेटर में ‘RBI’, ‘भारत’, ‘India’ और ‘200’ लिखा हुआ होगा.
  • सिक्योरिटी थ्रेड पर भारत और आरबीआई लिखा होगा, जो रंग बदलने वाला होगा.
  • गारंटी क्लाज, गवर्नर के सिग्नेचर, प्रॉमिस क्लॉज और आरबीआई का एंबलम महात्मा गांधी की तस्वीर के बाईं तरफ होंगे.
  • दाहिनी ओर अशोक स्तंभ की छवि होगी.
  • 200 रुपए के नोट में इस्तेमाल होने वाली स्याही कलर बदलने वाली होगी.
  • नंबर पैनल में अंक छोटे से बड़े आकार में होंगे, जो कि ऊपरी हिस्से में बाईं ओर निचले हिस्से में बाईं ओर होंगे.
  • नेत्रहीनों के लिए महात्मा गांधी के चित्र की इटैग्लिओ छपाई, अशोक स्तंभ का प्रतीक, 200 रुपए के साथ पहचान चिह्न एच को उठाया गया है.

सड़क पर लड़की को छेड़ा, शोर मचाया तो तलवार से काट दिया हाथ

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लखीमपुर खीरी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बुधवार को एक मनचले ने युवती से छेड़छाड़ की कोशिश की जिसका विरोध करने पर मनचले ने युवती का तलवार से हाथ काटकर अलग कर दिया. मौके पर मौजूदा भीड़ ने मनचले की पिटाई करने के पुलिस के हवाले कर दिया.

जिसके बाद खून से लथपथ युवती को पुलिस ने इलाज के लिए जिला अस्पताल मे भर्ती करया. हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उसे लखनऊ रेफर कर दिया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित लड़की निघासन रोड पर किसी काम से जा रही थी.

इस बीच रोहित चौरसिया ने लड़की से छेड़छाड़ की. यवती ने जब विरोध किया तो युवक आग बबूला हो गया. उसने लड़की को दौड़ाया और तलवार से उसका हाथ कलाई के पास से काट दिया.

सीओ सिटी ने बताया कि इस मामले में केस दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया. एडीजी लॉ ऐंड ऑर्डर के मुताबिक शुरुआती जांच में पता चला है कि मोबाइल के चार्जर को लेकर पीड़िता का युवक से विवाद हुआ है. पुलिस अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है.

केजीएमयू के डॉ. ने बताया डॉक्टरों ने रात को ही उसका कटा हाथ जोड़ने के लिए सर्जरी शुरू कर दी. प्लास्टिक सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एके.सिंह ने बताया कि लड़की का हाथ जोड़ने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है. न्यूरो विभाग से क्लियरेंस का इंतजार है.

BJP सरकार की दलित-मुस्लिम विरोधी नीतियों के खिलाफ BSP का विरोध पदर्शन

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जयपुर। केन्द्र सरकार की मुसलमानों एवं दलितों विरोधी नीतियों के खिलाफ बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जयपुर कलेक्ट्रेट के सामने धरना प्रदर्शन किया. लोगों ने बसपा अध्यक्ष मायावती के समर्थन में धरने नारेबाजी भी की.

बसपा कार्यकर्ताओं ने धरने प्रदर्शन के दौरान कहा कि पार्टी अध्यक्ष मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा भी भारतीय जनता पार्टी की साम्प्रदायिक एवं दलित विरोधी नीतियों को उजागर करने के लिए दिया था. उन्होंने कहा कि दलित उनके साथ है और आज उनके समर्थन में धरना दिया गया है.

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि दलितों की लड़ाई लड़ने के लिए मायावती के आगे आने से लगने लगा है कि अब दलित अपने हको की लड़ाई लड़ सकेंगे और मजबूत बनेगें. भाजपा दलितों को दबा नहीं सकेगी.

गौरतलब है कि मायावती ने 18 जुलाई को राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था. मायावती राज्यसभा में सरहानपुर हिंसा पर अपनी बात रख रहीं थी लेकिन उपसभापति ने उन्हें बोलने से रोक दिया. राज्यसभा में भी हल्ला होने लगा था. इसके बाद मायावती ने तुरंत इस्तीफे की पेशकश की.

योगी सरकार दलित अफसर को कर रही है साइड लाइन

लखनऊ। लगता है योगी सरकार में दलित अफसरों को साइड लाइन कर दिया गया है! जानकारी के अनुसार, मौजूदा सरकारी विभाग में कोई भी दलित अफसर महत्वपूर्ण विभाग में तैनात नहीं है. पिछली सरकारों की अपेक्षा योगी सरकार ने उच्च जाति के अफसरों पर भरोसा जताया है. जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.

यूपी की नौकरशाही में बीते दो दशक के इतिहास में नजर डालने पर पता चलता है कि जितनी भी प्रदेश में सरकारें रहीं, उन्होंने बगैर भेदभाव के दलित आईएएस अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती दी. पूर्ववर्ती अखिलेश यादव सरकार में कुछ दलित अफसरों को महत्वपूर्ण पदों का चार्ज मिला था.

उच्च पदों पर काम कर चुकें हैं कई दलित अफसर दलितों में पूर्व आईएएस अफसर राय सिंह, पी.एल. पुनिया, नेतराम, डी.सी. लाखा, एस.आर. लाखा, स्वर्गीय कालिका प्रसाद, फतेह बहादुर, एस.डी. बागला, राम कृष्ण, श्रीकृष्ण, चंद्रपाल, हरीश चंद्रा, जे.एन. चेम्बर, गंगाराम बरूवा, एस.पी. आर्या, किशन सिंह अटोरिया आदि नाम हैं, जो अपनी कार्यप्रणाली से हर दल के अजीज हुए दलित अफसरों के महत्वपूर्ण पदों पर रहने से दलित समाज को न्याय मिलने की आशा रहती है.

मौजूदा सरकार में कई दलित अफसर कार्यरत मौजूदा योगी सरकार में अधिकतर दलित अफसर महत्वहीन पदों पर तैनात कर दिए गए हैं. दलित अफसरों में सुखलाल भारती, छोटे लाल, मनमोहन चौधरी, आनंद कुमार सिंह, राम केवल, अनिल सागर, पिंकी जोवल, प्रकाश बिन्दु, गौरव दयाल, पवन कुमार, ओ.पी. आर्या, सुरेन्द्र राम, उदई राम, के.के. सिंह, सूर्य मणि लाल चंद, सुधा वर्मा, केदार नाथ, विद्या सागर, भगेलू राम शास्त्री, रेनू भारती, चंद्र प्रकाश, सुरेश चंद्रा, एन.एस. रवि हैं. सुरेश चंद्रा को छोड़कर अधिकतर अफसर महत्वहीन पद पर तैनात किए गए हैं.

पीएल पुनिया ने साधा सरकार पर निशाना एससी-एसटी आयोग के पूर्व अध्यक्ष पी.एल. पुनिया के मुताबिक सबका साथ, सबका विकास का दावा करने वाली भाजपा सरकार भेदभाव पूर्ण रवैया अपना रही है. यूपी में सबसे अधिक दलितों की उपेक्षा हो रही है. उन्होंने कहा कि योगी सरकार जानबूझ कर दलितों अफसरों को साइड लाइन कर रखा है, जो सैद्धांतिक न्याय के प्रतिकूल है.

क्या कहते हैं जानकार पूर्व आईजी और दलित चिंतक एस.आर. दारापुरी के मुताबिक अब राजनीतिक दल दलित अफसरों को राजनीतिक चश्मे से देखने लगे हैं, उनकी काबलियत देखने के बजाए द्वेश भावना से महत्वहीन पदों पर तैनाती दी जाती है. यह अच्छी परम्परा नहीं है. उन्होंने योगी सरकार में अधिकतर दलित अफसर साइड लाइन हैं.

राजनीतिक जानकर विजय गौतम के नज़र में अब राजनीतिक दल अफसरों को उनकी जाति और वोट बैंक के हिसाब से महत्वपूर्ण पदों पर तैनाती देते हैं. अफसर भी अपने फायदे के लिए राजनीतिक दलों का कार्यकर्ता बनने से गुरेज नहीं करते हैं. इसी कमजोरी के चलते अफसरों को उनकी योग्यता का न तो समाज को लाभ मिल नहीं सरकारों की नीतियां जनता के पास जाती हैं.

साभारः ईनाडु इंडिया

राम रहीम पर फैसले से पहले 5 राज्यों में हाईअलर्ट, 3 में धारा 144

 

चंडीगढ़। साध्वी यौन शोषण केस में राम रहीम पर कल फैसला आना है. डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर नाबालिग से बलात्कार के मामले में 25 अगस्त (शुक्रवार) को पंचकुला सीबीआई कोर्ट का फ़ैसला आना है. लेकिन दो दिन पहले से ही उनके समर्थक बड़ी संख्या में चंडीगढ़ से लेकर पंचकुला तक इकट्ठा हो गए हैं. पांच राज्यों में हाईअलर्ट और तीन में धारा 144 लागू है. पुलिस प्रशासन और सरकार भी हाई अलर्ट पर है. हरियाणा-पंजाब के कई जगहों पर कर्फ्यू जैसे हालात हैं.

हरियाणा के पंचकुला, सिरसा, चंडीगढ़ छावनी में तब्दील हो चुका है. किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए अर्धसैनिक बलों की 167 कंपनियों की तैनाती की गई है. सभी बड़े अधिकारियों की छुट्टियां रद्द होने का आदेश जारी कर दिया गया है. फ़ैसले के बाद अगर राम रहीम के समर्थक हंगामा करते हैं तो उनको काबू कर चंडीगढ़ क्रिकेट स्टेडियम में बंद कर दिया जाएगा. स्टेडियम को अस्थाई जेल में बदल दिया गया है.

इसके साथ ही ड्रोन और सीसीटीवी कैमरे से लोगों पर नज़र रखी जा रही है. एसएसबी के जवान और पुलिस हर चप्पे-चप्पे की तलाशी कर रहे हैं. वहीं पंजाब, हरियाणा के अलावा हिमाचल प्रदेश और यूपी की सीमा को भी सील कर दिया गया है. हरियाणा और पंजाब के सभी स्कूल और कॉलेजों को फैसला आने तक बंद कर दिया गया है. इस बीच खट्टर सरकार ने अपने सभी मंत्रियों और विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में रहने और डेरा सच्चा सौदा के प्रतिनिधियों से मिलकर शांति व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करने के निर्देश दिए हैं.

गुरमीत राम रहीम की कोर्ट मे पेशी को लेकर अब तक चंडीगड़, हरियाणा और पंजाब में पैरामिलिट्री की 167 कंपनिया तैनात की गई हैं. 10 और कंपनियों की मांग की गई है. एक कंपनी में 100 जवान और अफसर हैं. हर कंपनी मे करीब 35 गन और बाकी नॉन लीथल गन होती हैं. नॉन लीथल गन में डंडा, टियर गैस , मिट्टी वाला ग्रेनेड, वाटर कैनन जैसे हथियार आते हैं. हर कंपनी में महिलाएं भी तैनात की गयी हैं.

चंडीगढ़ में 10 कंपनियां तैनात की गई हैं. इनमें 6 कंपनियां रैपिड एक्शन फोर्स की हैं. 40 कंपनियां रिज़र्व रखी गयी हैं. आपात हालात से निपटने के लिए पंचकुला में यहीं से जवान भेजे गए हैं. हरियाणा में 35 कंपनियां तैनात हैं. पंजाब में 75 कंपनियां तैनात हैं. वहीं सेना को तैनात करने पर अभी कोई फैसला नहीं किया गया है. प्रशासन सेना के संपर्क में है और हर हालात की जानकारी दी जाएगी. फिलहाल पंचकुला में दो लाख से ज्यादा डेरा समर्थक आ चुके हैं. पंचकुला के बाहर डेरा में 40 से 50 हज़ार समर्थक जमा हैं. दो से तीन दिन का रेडीमेड खाना लेकर आए हैं.