जब हैरी मेट सेजल फिल्म की कमाई में नहीं आया उछाल, इम्तियाज अली ने दिया जवाब

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शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की जब हैरी मेट सेजल 4 अगस्त को रिलीज हो चुकी है. इतने बड़े स्टार की मौजूदगी के बावजूद भी फिल्म ने उतनी कमाई नहीं की जितनी की उम्मीदें थीं. फिल्म वीकेंड पर भी 100 करोड़ की कमाई नहीं कर पाई. शाहरुख खान की यह फिल्म वीकेंड टेस्ट में फेल हो गई है. तरण आदर्श के अनुसार यह एक निराशाजन फिल्म के तौर पर उभरी है. ओपनिंग के दिन फिल्म ने 15,25 करोड़, दूसरे दिन 15 करोड़ रुपए और शनिवार को 15.50 करोड़ रुपए की कमाए. तीन दिन में फिल्म का कलेक्शन 45.75 करोड़ रुपए रहा. तरण आदर्श ने कहा- कुछ महानगरों को छोड़कर, व्यापार साधारण से डल हो गया. फिल्म की कमाई में उछाल गायब है.

जब हैरी मेट सेजल शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा की दूसरी रिलीज फिल्म है. इससे पहले जनवरी में किंग खान की रईस और मार्च में अनुष्का की फिल्लौरी रिलीज हो चुकी है. रईस के साथ ऋतिक रोशन की काबिल भी रिलीज हुई थी. इसके बावजूद रईस का कलेक्शन काफी अच्छा रहा था. अपनी ओपनिंग के दिन रईस ने 20.4 करोड़ रुपए की कमाई की थी. वहीं वीकेंड पर इसने 93.24 करोड़ रुपए कमा लिए थे. उस हिसाब से देखा जाए तो शाहरुख की जब हैरी मेट सेजल अपनी ही फिल्म के कलेक्शन को पीछे छोड़ पाने में असफल रही है. शुरुआती आकंड़ों के अनुसार रक्षाबंधन के अवसर पर भी फिल्म की कमाई में उछाल नहीं आया और यह 8.5 करोड़ रुपए ही कमा सकी. इसके साथ ही 4 दिनों में फिल्म ने केवल 54. 25 करोड़ रुपए कमा लिए है.

इम्तियाज आगे कहते हैं,

“कुछ लोग कहते हैं कि इम्तियाज की फिल्में देखने के लिए आपको बहुत ही इंटेलीजेंट और इंटेलेक्चुअल टाइप होना पड़ेगा. यह मेरे लिए एक तरह से झटके जैसे होता है. क्योंकि मैं कभी भी इंटेलीजेंट और इंटेलेक्चुअल क्लब का हिस्सा नहीं रहा. मैं पूरे दिल से बहुत ही साधारण फिल्में बनाता हूं.’’

“मैंने ‘जब हैरी मेट सेजल’ को तारिफें बटोरने के लिए नहीं बनाया है, आप सब जानते हैं कि मैं एक अलग तरह का डायरेक्टर हूं और हर बार नए-नए विषयों पर फिल्म बनाता हूं. इस फिल्म को भी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए ही बनाया गया है. न कि मेरी तारीफ के लिए.”

BHIM एप यूजर्स को मिलेगा कैशबैक का तोहफा

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नई दिल्ली। स्वंतत्रता दिवस के मौके पर सरकार भीम एप यूजर्स को तोहफा देने की तैयारी में है. यह लाभ केवल उन्हीं यूजर्स को मिलेगा जो भीम एप के जरिए डिजिटल ट्रांजेक्शन करते हैं. इसे नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है. यह एप यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेड यानि UPI पर काम करता है. इस एप को नोटबंदी के बाद दिसंबर में डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा देने के लिए लॉन्च किया गया था.

NPCI के मैनेजिंग डायरेक्टर ए. पी. होता ने कहा, “हमने सरकार को सूचित कर दिया है कि लोगों द्वारा इस एप के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए कैशबैक राशि को बढ़ाया जाना है. इसे लागू करने के लिए हम सरकार के अप्रूवल का इंतजार कर रहे हैं जो 15 अगस्त तक आने की उम्मीद है. इसके साथ ही भीम एप का नया वर्जन भी जारी किया जाएगा.” ए. पी. होता ने बताया कि वर्तमान में यह कैशबैक 10 रुपये से 25 रुपये तक दिया जाता है. वहीं, अभी अगर कोई व्यक्ति भीम एप को किसी दूसरे को रेफर करता है तो उसे 10 रुपये बोनस दिया जाता है. साथ ही जिसे रेफर किया जाता है उसे 25 रुपये का कैशबैक दिया जाता है.

ए. पी. होता ने यहा भी बताया कि भीम एप का वर्जन 1.4 भी फाइनल स्टेज में है. नए वर्जन के तहत यूजर्स एप के जरिए आसानी से डिजिटल पेमेंट कर पाएंगे. साथ ही एप में भारत क्विक रिस्पॉन्स कोड को भी इंटीग्रेट किया जाएगा, जिससे ट्रांजेक्शन्स में इजा़फा होने की उम्मीद लगाई जा रही है.

देखा जाए तो भीम एप में दिए जाने वाले कैशबैक की राशि बढ़ाने पर ऑनलाइन मार्किट में दूसरे पेमेंट एप्स के बीच कॉम्पटीशन और भी ज्यादा बढ़ जाएगा. पेटीएम और फोनपे जैसी कंपनियां भी ग्राहकों को पेमेंट पर कैशबैक देकर लुभाने की कोशिश करती हैं.

दलितों की जमीन पर कब्जा करने के बाद लगाया चोरी का आरोप, विरोध-प्रदर्शन

चंडीगढ़। पंजाब के लौंगोवाल में मंडेर कलां गांव के दलितों ने लौंगोवाल पुलिस स्टेशन के सामने धरना दिया. यह धरना दलितों ने जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी की अगुवाई में किया. दलितों ने मांग की कि दलितों की जमीन पर कब्जा करने वाले सवर्णों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

दरअसल मामला यह है कि दलित परिवारों को पंचायती जमीन ठेके पर मिली हुई है. इस जमीन से लोग-आते जाते भी है. लेकिन सवर्णों को दलितों को जमीन मिलना और दलितों का आना-जाना नगवार लगा जिसके कारण उन्हें इस जमीन पर कब्जा कर लिया. दलितों ने जब इसका विरोध किया तो सवर्ण जाति के लोगों ने दो दलितों के खिलाफ चोरी का झूठा केस दर्ज करवा दिया. दलितों ने थाने के सामने प्रदर्शन करते हुए दलितों पर लगे इस झूठे आरोप को भी हटाने की मांग की.

जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के जिला नेता बलविंदर सिंह ने कहा कि दलित परिवारों ने रिजर्व पंचायती जमीन ठेके पर ली है. इस जमीन को जो रास्ता लगता है उस पर कुछ लोगों ने नाजायज कब्जा करके अपनी जमीन में मिला लिया है. उन्होंने आगे कहा कि सवर्णों ने पहले भी इस जमीन पर कब्जा कर लिया था लेकिन दलितों ने संघर्ष कर इस जमीन को छुड़वा लिया था. इस बार फिर सवर्णों ने इस जमीन पर कब्जा कर लिया.

बलविंदर सिंह ने कहा कि जब भी दलित परिवारों की महिलाएं जमीन से हरा चारा लेने जाती हैं तो सवर्ण जाति के लोग उनके साथ हाथापाई करते हैं और उन्हें जातिसूचक गालियां देते हैं. कुछ दिन पहले इस घटना को लेकर लड़ाई झगड़ा भी हुआ था अस्पताल में महिलाओं ने पुलिस को इस घटना पर बयान भी दिया था.

मामला प्रशासन के ध्यान में भी लाया गया था लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने बताया कि जमीन के जाते रास्ते पर खेतीबाड़ी औजार पड़े थे, जिन्हें दलित व्यक्तियों ने हटा दिया था. लेकिन दो दलित व्यक्तियों पर खेतीबाड़ी औजार चोरी करने के आरोप में झूठा केस दर्ज करवा दिया गया है. जिस कारण दलित परिवारों में इस बेइंसाफी के खिलाफ भारी रोष है. यह खेतीबाड़ी औजार पुलिस थाने में ही पड़े हैं.

हफ्ते में दो दिन बंद रहेंगे बैंक

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नई दिल्ली। आम लोगों के लिए बैंकों के खुलने और बंद होने का समय बदल सकता है. मुमकिन है कि बैंक सुबह 10 बजे के बजाय 9:30 बजे खुले और शाम 4 बजे तक ग्राहकों के काम निपटाए जाएं. ऐसा हुआ तो बैंक कर्मचारी हफ्ते में सिर्फ 5 दिन काम करेंगे. हर शनिवार और रविवार को बैंक बंद रहेंगे. इस बारे में एक प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है. बैंकों की संस्था इंडियन बैंक्स असोसिएशन (आईबीए) और बैंक यूनियनों के बीच पहले दौर की बातचीत हो चुकी है. इसी महीने दूसरे दौर की बातचीत के बाद अंतिम फैसला होने की संभावना है. अभी बैंक कर्मचारी आमतौर पर हर दिन करीब साढ़े छह घंटे काम करते हैं.

हालिया बैठकों में बैंक यूनियनों ने कहा कि वे ग्राहकों को अतिरिक्त समय देने को तैयार हैं, पर उन्हें 5-डे वीक चाहिए. अभी बैंकों में हर दूसरे और चौथे शनिवार को छुट्टी रहती है. नैशनल ऑर्गनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स के उपाध्यक्ष अश्विनी राणा ने कहा कि समय बढ़े तो हर शनिवार की छुट्टी मिले. सरकार का मानना है कि बैंकों के पास ग्राहकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे में बैंकों को कैश डिपॉजिट, नए खाते खुलवाना, एफडी बनवाना, एफडी तुड़वाना और पासबुक में एंट्री जैसे कामों के लिए ज्यादा समय देना चाहिए.

फिर लापता हुए राहुल गांधी, ढूंढने वाले व्यक्ति को जनता देगी ईनाम

अमेठी। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अपने ही संसदीय क्षेत्र अमेठी में उनके लापता होने के पोस्टर लगाए गए हैं. जगह-जगह लगे पोस्टर्स में राहुल गांधी को ढूंढ़कर लाने वाले को गिफ्ट देने की बात कही गई है. इस पोस्टर के नीचे लिखा है कि ये अमेठी की जनता की ओर से जारी किया गया है.

अमेठी में जगह-जगह लगा पोस्टर चर्चा का विषय बना हुआ है. उधर कांग्रेसी इसे राहुल गांधी की साख गिराने की साजिश बता रहे हैं. फिलहाल पोस्टर में न तो किसी का नाम है और न ही कोई नंबर छोड़ा गया है. अमेठी में आम दीवारों के साथ ही सरकारी कार्यालयों व केंद्रीय कांग्रेस कार्यालय की दीवार पर राहुल लापता का पोस्टर चस्पा किए गए हैं.

अमेठी में 7 अगस्त को शहर व कस्बों की दीवारों पर राहुल गांधी लापता के पोस्टर चस्पा मिले. पोस्टर को देख चर्चा में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई. वहां जायस हो या अमेठी सभी जगह पोस्टर चस्पा दिखाई पड़े. मामले की जानकारी जब कांग्रेसियों को हुई तो उनका आक्रोश भी दिखाई पड़ा. बताते चले कि लोकसभा चुनाव के बाद भी ऐसे ही पोस्टर लगाए गए थे. उस समय भी कांग्रेसियों ने उसे साजिश करार दिया था.

कांग्रेस जिलाध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि चार-पांच दिन पूर्व राहुल गांधी ने यहां के किसानों की समस्याओं को लेकर लखनऊ में एनएचआइ दफ्तर में शीर्ष अधिकारियों से मिल यहां की समस्याओं को लेकर मुद्दा उठाया था. यही नहीं जिले से भी किसान गए थे. जहां पर उनकी राहुल से मुलाकात भी हुई थी.

उन्होंने कहा राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए विरोधी दल साजिश कर रहे हैं. अमेठी में उनके निधि से कार्य किए जा रहे हैं. इसके अलावा देशभर में जहां पर भी समस्याएं हो रही हैं, वह वहां जा रहे हैं. साल भर पूर्व भी ऐसे पोस्टर लगाए गए थे. इससे किसी भी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

भारतीय आर्मी का दिखा दम, पहले राउंड में चीन का टैंक हुआ ध्वस्त

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नई दिल्ली। रूस में इन दिनों बड़े देशों की सेना के टैंक का एक जबरदस्त मुकाबला चल रहा है. रूस में चल रही अंतरराष्ट्रीय आर्मी गेम में इंडिन आर्मी ने भी हिस्सा लिया है. भारतीय आर्मी अब इस प्रतियोगिता के दूसरे राउंड में पहुंच गई है. पहले राउंड में हालांकि रूस ने बाजी मारी, वहीं भारत चौथे स्थान पर रहा.

प्रतियोगिता के दौरान चीन के टैंक के साथ कुछ अटपटा हुआ। गेम के दौरान चीन का टैंक लड़खड़ा गया. टैंक के कई हिस्से अलग-अलग हो गए. दूसरे राउंड में अगले तीन दिनों तक मुकाबला चलेगा, जिसमें टैंक के अलावा हथियार चलाने के भी गेम होंगे. भारतीय सेना का मुकाबला 10 अगस्त को है.

दूसरे राउंड में 48 किलोमीटर की रिले रेस होगी, जिसमें एक ही टैंक होगा और उसके द्वारा ही करतब दिखाए जाएंगे. दूसरे राउंड में शीर्ष पर रहने वाली टॉप 4 टीमें अगले राउंड में जाएंगी. फाइनल रेस 12 अगस्त को होगी।इस साल इस प्रतियोगिता में कुल 19 देशों ने हिस्सा लिया था, जिसमें भारत, रूस, चीन, कजाकिस्तान जैसे देश शामिल हैं. अंतरराष्ट्रीय सैन्य खेलों में 28 कार्यक्रम होते हैं जिनका आयोजन रूस, बेलारूस, अजरबैजान, कजाखिस्तान और चीन में होता है.

वर्णिका कुंडू के समर्थन में आए सहवाग, भाजपा अध्यक्ष के बेटे को मिलनी चाहिए सजा

चंडीगढ़। हरियाणा के भाजपा अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला पर आईएएस की बेटी से छेड़छाड़ के मामले में चंडीगढ़ पुलिस की ढीली कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं. विक्टिम वर्णिका का कहना है कि किसी गाड़ी का पीछा करना, उसकी गाड़ी को रोकने की कोशिश करना और गाड़ी पर हाथ मारना यह किडनैपिंग की कोशिश नहीं तो और क्या है? बता दें कि वर्णिका बार-बार यह आरोप लगाती रही हैं कि उसके अपहरण की कोशिश हुई है. इसके बाद भी पुलिस ने किडनैपिंग के प्रयास की धारा 365/511 के तहत केस दर्ज नहीं किया.

शनिवार तक चेहरा छिपाकर मीडिया से बात कर रही पीड़िता ने चेहरे से नकाब हटाते हुए राजनीतिक दबाव के सामने झुकने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि वह आखिरी दम तक लड़ेंगी, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ उनके लिए नहीं बल्कि सभी बेटियों की सुरक्षा के लिए है. इस बीच उनकी एक पुरानी तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गई.

वर्णिका के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में निष्पक्ष जांच के समर्थन में पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग भी उतर आए हैं. सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर हमेशा एक्टिव रहने वाले वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट के जरिए इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. साथ ही उन्होंने लड़कियों के साथ छेड़छड़ करने वाले मनचलों की नसीहत भी दी है.

सहवाग ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा है कि चंडीगढ़ का वकिया शर्मनाक है. बिना किसी के प्रभाव के निष्पक्ष जांच होनी चाहिए. कोई भी हो. कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे. सहवाग के इस ट्वीट से साफ है कि उनका इशारा हरियाणा भाजपा के चीफ सुभाष बराला के बेटे विकास बराला की ओर है जिनके ऊपर अपने दोस्त के साथ वर्णिका का पीछा और छेड़छाड़ करने का आरोप है.

योगीराज में शिक्षा व्यवस्था बनी मज़ाक, विद्यालय बना कूड़े का ढेर

शामली। योगीराज में एक बार फिर से शिक्षा व्यवस्था का मजाक बनाया गया है. यूपी के शामली में एक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय को कूड़ा और गंदगी डालने का ढेर बना दिया गया है. विद्यालय में इतनी मात्रा में गंदगी इकट्ठी हो चुकी है कि 1 इंच भी बच्चों के बैठने या आने जाने की जगह नहीं बची है. हालात इतनी खराब हो चुके हैं कि बच्चों ने स्कूल जाना तक छोड़ दिया है. वहीं आला अधिकारियों से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने अपना पुराना राग अलापते हुए कहा कि जांच के बाद कार्रवाई करेंगे.

केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार ‘स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत’ का नारा जोर शोर से लगा रही है. शामली जनपद के ब्लॉक थाना भवन के गांव गढ़ी अब्दुल्ला में विद्यालय ही एक मात्र गांव का कूड़ा डालने का स्थान है. जबकि इसी थाना भवन से भाजपा विधायक सुरेश राणा प्रदेश सरकार में मंत्री पद पर स्थित हैं. उनका भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं है. वहीं बच्चों को दीवार कूद कर या नाले के पानी में होकर स्कूल आना-जाना पड़ता है. मानसून सीजन में स्कूल का प्रांगण और आने-जाने का रास्ता इस समय नाला बन चुका है जिससे बच्चों को खासी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. साथ ही गंदगी की वजह से उनके बीमार होने का खतरा भी रहता है.

बीमारियों की चपेट में आ चुके हैं कई बच्चे-अध्यापिका पंजाब केसरी के मुताबिक स्कूल अध्यापिका की मानें तो ये सब कई महीनों से चल रहा है जिस कारण अध्यापक और बच्चे बीमारियों की चपेट में आ गए हैं. काफी बच्चों ने स्कूल आना भी बंद कर दिया है. कई बार ग्राम प्रधान और हेड मास्टर से शिकायत भी कर चुके हैं पर कोई समाधान नहीं हुआ. जब हमने बीएसए शामली से इस पुरे मामले के बारे में बात की तो उन्होंने जांच की बात कही. पर स्कूल में कूड़ा क्यों और किसके कहने पर डाला जाता है इसका जवाब वह भी नहीं दे पाए.

 

सेंधमारी की सियासत से कमजोर होता लोकतंत्र

लोकतंत्र की आत्मा पक्ष-विपक्ष, सहमति-असहमति से सिंचित होती है. केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने जिस तरह से कुछ खास मौके पर विपक्ष के गैर कानूनी इरादों या यूं कहें कि कथित गैर कानूनी कृत्यों पर सरकारी तंत्र के माध्यम से प्रहार कर रही है, उससे यह दुविधा हो गई है कि लोकतंत्र की आत्मा मजबूत हो रही है या कुचली जा रही है.

ताजा मामला कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है और इसी प्रदेश के ऊर्जा मंत्री डीके शिवकुमार के दर्जनों ठिकानों पर आयकर विभाग का है. सरकार की ऐसी एजेंसियों की गतिविधियों पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए तथा ऐसी कार्रवाइयां व्यापक पैमाने पर की जानी चाहिए लेकिन कर्नाटक के जिस रिसॉर्ट को निशाना बनाकर छापा मारा गया है, वहां गुजरात के विधायकों को 8 अगस्त के गुजरात राज्यसभा चुनाव के मद्दे नजर सुरक्षित ठहराया गया था. राज्यसभा के लिए चुनाव घोषित होते ही कांग्रेस विधायकों ने इस्तीफे देना शुरू कर दिये थे और कुछ भाजपा में जा मिले थे.

इस गतिविधि को कांग्रेस ने अपने प्रभावी उम्मीदवार अहमद पटेल को राज्यसभा में जाने से रोकने का सत्तारूढ़ पार्टी का इरादा बताया. वहीं भाजपा ने इसे भाजपा ने सामान्य गतिविधि कह कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की. गुजरात में पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला के विद्रोह के बाद प्रदेश की सियासत में हलचल है. यह हलचल आगामी दिनों में भारी उथल-पुथल में बदल जाए तो आश्चर्य नहीं होगा. लेकिन सवाल यह है कि केंद्रीय सत्ता यह सब कुछ विशेष मौके पर क्यों कर रही है?

अबकी बार गुजरात से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह राज्यसभा में प्रवेश पाना चाहते हैं. छापे की कार्रवाई तो यही साबित कर रहे हैं कि केंद्रीय सत्ता अमित शाह और स्मृति ईरानी को राज्यसभा में आने की राह में किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहती है. लिहाजा, विपक्षी दलों का मनोबल तोड़ना और उसमें अस्थिरता पैदा करने के लिए यह हथकंडा गैर लोकतांत्रिक लगने लगा है. संसद में भारी हंगामा हुआ. सरकार ने कहा कि इसे राजनीति से न जोड़ा जाए क्योंकि यह कानूनी प्रक्रिया के तहत समान्य कार्रवाई है. लेकिन सरकार के पास इस सवाल का कोई जवाब या स्पष्टीकरण नहीं है कि छापे से पहले की सारी गतिविधियों के मद्देनजर यह समय कार्रवाई के लिए उचित कैसे ठहराया जा सकता है?

बिहार में पूर्व मुख्यमंत्री व राजद प्रमुख लालू प्रसाद के परिवार के सदस्यों पर लक्षित छापों का परिणाम क्या जदयू-भाजपा गठबंधन की सरकार के रूप में सामने नहीं आया है? उत्तराखंड, अरुणाचल में भाजपा द्वारा विधायकों को अपने पाले में करने का खुला खेल सबने देखा. मणिपुर और गोवा में लोकतांत्रिक नियमों व कोर्ट के आदेश को दरकिनार कर सरकारों के गठन में अनावश्यक चुस्ती-फुर्ती क्यों हुई. बिहार में भी नीतीश कुमार के दोबारा सीएम पद की शपथ पांच बजे शाम को तय कर सुबह दस बजे शपथ दिला दी गई. एक के बाद एक राजनीतिक संकेत यह साबित करते हैं कि केंदीय सत्ता पूरी तरह विपक्ष की सियासत में सेंधमारी कर रही है. यदि ऐसा ही चलता रहा तो लोकतंत्र की सफलता के लिए मजबूत विपक्ष की बात महज कागजी होगी.

यह लेख संजय स्वदेश ने लिखा है.

एस श्रीसंत पर लगा आजीवन प्रतिबंध हटा, केरल हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

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कोच्चि। आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के मामले में बैन झेल रहे भारतीय तेज गेंदबाज एस श्रीसंत के लिए केरल हाईकोर्ट से राहत की खबर आई है. श्रीसंत अपने ऊपर लगाए गए बैन के खिलाफ मार्च 2016 में केरल हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिसका फैसला सुनाते हुए आज हाईकोर्ट ने श्रीसंत से बैन हटा लिया है.

साल 2013 में स्पॉट फिक्सिंग के मालमे में दोषी पाए जाने के बाद बीसीसीआई ने श्रीसंत पर आजीवन बैन लगा दिया था. इस बैन के बाद श्रीसंत बीसीसीआई द्वारा मान्यता प्राप्त कोई भी लीग मैच नहीं खेल सकते हैं और न ही बीसीसीआई या उससे संबंध रखने वाले किसी राज्य संघ के स्टेडियम में अभ्यास कर सकते हैं.

केरला हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब बीसीसीआई श्रीसंत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती है. मैच फिक्सिंग के आरोपों में श्रीसंत को 2013 में तिहाड़ जेल की भी हवा खानी पड़ी थी. श्रीसंत के अलावा अंकिच चवन और अजीत चंडीला भी इस फिक्सिंग स्कैंडल में शामिल पाए गए थे. के

आपको बता दें कि श्रीसंत केरल की तरफ से राष्ट्रीय टीम में खेलने वाले दूसरे खिलाड़ी हैं. उन्होंने 27 टेस्ट मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और 87 विकेट अपने नाम किए हैं. उन्होंने 53 एकदिवसीय मैचों में भारत के लिए 75 विकेट लिए हैं. भारत के लिए 10 टी-20 मैच खेलने वाले श्रीसंत ने इस प्रारुप में सात विकेट अपने नाम किए हैं.

जब हम बांटते थे तब बंद करवा दी, अब खुद बांट रहे हैं योगी- अखिलेश

लखनऊ। अपने प्रशंसकों के बीच लखनऊ में समाजवादी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने एक बार फिर बीजेपी पर हमला बोला. पार्टी छोड़ बीजेपी ज्वाइन करने वाले नेताओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा किजो लोग पार्टी छोड़ कर गए हैं वह डेपुटेशन पर गए हैं. जब सरकार बनेगी अगर वापस आना चाहते हैं तो कमेटी तय करेगी.

पूर्व एमएलसी बुक्कल नवाब के पार्टी छोड़ने पर उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जब एक महीने पहले ईद पर सेवैंया खाई थीं तब नहीं कहा कि बीजेपी में जाना है. उनका कुछ जमीन का मामला था इसलिए वह गए. बीजेपी के लोगों का मानना है कि जब तक हमारे यहां कोई रहता है तब तक वह बुरा है. जब उनके यहां गया तो अच्छा हो गया.”

पिछली सरकार की योजनाओं के बंद करने पर अखिलेश ने कहा, “समाजवादी पेंशन योजना बंद कर दी. लैपटॉप योजना बंद कर दी. कहते थे कि हम एक पक्ष के लोगों के लिए काम करते थे. और अब खुद 51 हजार बांट रहे हैं तब क्या है. हमें खुशी है हमारी योजना को आगे बढ़ा रहे हैं. जब हम बांटते थे तब बंद करवा दी, अब खुद बांट रहे हैं.

आजतक के मुताबिक बिहार की राजनीतिक उठापटक पर हमलावर रुख अपनाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि पहले कहते थे कि कब्रिस्तान की राजनीति कर रहे हैं और अब बिहार में नीतीश के साथ मिलकर कितने कब्रिस्तान की दीवार बनवा रहे हैं. यह किस चीज की राजनीति है.

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने दिल्ली में फूंका अगस्त क्रांति का बिगुल

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नई दिल्ली। पूना पैक्ट में आरक्षित वर्ग को विकास और कार्य के सभी क्षेत्रों में आबादी के अनुसार प्रतिनिधित्व देने का वादा किया गया था. यही समझौता आरक्षित जाति के लोगों का आधार बना. लेकिन आजादी के 70 साल बाद भी इस समाज को आनुपातिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाया है. अपने इस हक की मांग आरक्षण समर्थक वर्ग लगातार करता रहा है. प्रतिनिधित्व और अन्य मांगों को लेकर 6 अगस्त को दिल्ली के जंतर मंतर पर देश भर से आरक्षण समर्थक पहुंचे. आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले जंतर मंतर पहुंचे आरक्षण समर्थकों ने इस दौरान विशाल प्रदर्शन किया. समिति ने इसे अगस्त क्रांति सम्मेलन का नाम दिया.

समिति का नेतृत्व आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. आर.पी सिंह ने किया. इस दौरान आरक्षण पर बढ़ते खतरे को लेकर लोगों में काफी रोष था. तो दलित समाज पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ भी गुस्सा देखा गया. विरोध प्रदर्शन में आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग पदोन्नति में आरक्षण के बिल को संसद के शीतकालीन सत्र में पास कराने की रही. आरक्षण समर्थकों के दबाव में राज्यसभा में यह बिल पहले ही पारित हो चुका है. और आरक्षण समर्थक लंबे समय से इसे राज्यसभा में पारित करने की मांग कर रहे हैं. इस मौके पर समिति की ओर से सरकार के सामने अपनी पंद्रह सूत्रीय मांगों को भी रखा गया.

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति 2011 से काम कर रही है. आरक्षण विरोधी सरकारों की मंशा पर पानी फेरने और आरक्षण के हक के लिए यह समिति लगातार काम कर रही है.

जामिया मिलिया के अल्पसंख्यक दर्जे के खिलाफ SC में हलफनामा देगी मोदी सरकार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को वापस लेने का निर्णय लिया है. एचआरडी मिनिस्ट्री दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित रिट याचिका में एक नया हलफनामा दाखिल करेगी. आपको बता दें कि 22 फरवरी 2011 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग (एनसीएमईआई) ने अपने आदेश में कहा था कि यह एक अल्पसंख्यक संस्थान है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक एचआरडी मंत्रालय अब अदालत को यह भी बताएगा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया का उद्देश्य कभी भी अल्पसंख्यक संस्था नहीं था, क्योंकि इसे संसद के एक अधिनियम द्वारा स्थापित किया गया था और केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित किया जाता है. इससे पहले जब एसआरडी मंत्रालय का जिम्मा स्मृति ईरानी के पास था तब तत्कालीन एटॉर्नी जनरल रहे मुकुल रोहतगी ने मंत्रालय से कहा था कि दिल्ली का जामिया मिल्लिया इस्लामिया कोई अल्पसंख्यक संगठन नहीं है. क्योंकि इसकी स्थापना संसद के एक अधिनियम से हुई है. अटार्नी जनरल ने एचआरडी मंत्रालय को सलाह दी थी कि यह अदालत में अपना विचार बदलना और अल्पसख्यक दर्जे के खिलाफ खड़े होने का हक रखता है.

दरअसल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि सरकार 1968 के अजीज बाशा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करती है ताकि वह अपने रुख में बदलाव का समर्थन कर सके. अजीज बाशा मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि एएमयू एक अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है क्योंकि विश्वविद्यालय मुस्लिम समुदाय के बजाय, यह ब्रिटिश विधायिका द्वारा स्थापित किया गया था. ऐसे ही जामिया के अल्पसंख्यक स्थिति का विरोध कर सकते हैं. मानव संसाधन विकास मंत्रालय, जब वह ईरानी के अधीन था, तब अटर्नी जनरल की सलाह को स्वीकार कर लिया था.

जेएमआई पर रिट याचिकाओं सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हैं. जब भी सुनवाई के लिए आता है तो सरकार एक नए हलफनामा दर्ज करेगी. इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस ने उच्च शिक्षा सचिव के के शर्मा ने 4 अगस्त को ईमेल के माध्यम कुछ सवाल पूछे थे, लेकिन उसका जवाब सचिव ने नहीं दिया. वहीं जेएमआई कुलपति इस मुद्दे पर टिप्पणी नहीं करने की बात कही.

सरकार के विचार में बदलाव, कानूनी समुदाय के सूत्रों ने कहा, यह आश्चर्यजनक नहीं था क्योंकि यह एनडीए -2 के तहत केंद्र के अनुरूप है. जनवरी 2016 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एमयूयू की अल्पसंख्यक स्थिति पर अपने पूर्ववर्ती के रुख को वापस लेना. एनसीएमआई ने यह धारण किया था कि मुसलमानों के लाभ के लिए जामिया की स्थापना मुसलमानों के लिए थी और कभी भी मुस्लिम अल्पसंख्यक शिक्षा संस्था के रूप में अपनी पहचान खोई नहीं थी. यही वजह थी कि अनुच्छेद 30 (1) के तहत कवर किया गया था.

क्या इस युवा चेहरे में बहनजी अपना उत्तराधिकारी तलाश रही हैं?

बहुजन समाज पार्टी की हालिया बैठकों में मौजूद एक खास चेहरा इन दिनों चर्चा का विषय है. वह बैठक शुरू होने के समय पहुंचता है और बैठक खत्म होते ही दूसरे नेताओं के निकलने से पहले निकल जाता है. चार अगस्त को भी बसपा की बैठक में मौजूद वो चेहरा दलित दस्तक के कैमरे में कैद हो गया. तो क्या बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी का युवा चेहरा ढूंढ़ लिया है? और क्या बैठकों के दौरान उस युवा को अपने साथ रखकर वह उसे राजनीति की बारीकियां सिखा रही हैं?

उस युवा चेहरे का नाम आकाश है. आकाश पहली बार तब चर्चा में आए थे, जब बसपा प्रमुख मायावती सहारनपुर के दौरे पर गई थीं. उस दौरे में आकाश पूरे समय अपनी बुआ मायावती के साथ मौजूद थे. असल में आकाश पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और बसपा प्रमुख मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं. पिछले कुछ समय से वह पार्टी की गतिविधियों में रुचि दिखा रहे हैं.

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बसपा अध्यक्ष मायावती ने जिस दिन आनंद कुमार को पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया था, खबर है कि उसी दिन आकाश ने भी पार्टी की सदस्यता ली थी. सूचना के मुताबिक आकाश पार्टी में एक्टिव मेंबर हैं. दलित दस्तक के पास मौजूद सूचना के मुताबित आकाश तकरीबन तीन साल लंडन में पढ़ाई करने के बाद 2016 में भारत लौटे हैं. लंडन में उन्होंने बी.बी.ए और एम.बी.ए की डिग्री ली है.

तो क्या बसपा प्रमुख मायावती ने समय का रुख भांप लिया है कि देश में आधी से ज्यादा आबादी युवाओं की है और आने वाले वक्त में बहुजन समाज पार्टी को भी सफल होने के लिए एक युवा चेहरे की जरूरत है. एक सवाल यह भी है कि क्या बहनजी आकाश में अपना उत्तराधिकारी होने की संभावना ढूंढ़ रही हैं??

दो दिन दलित को थाने में पुलिस ने बर्बरता से पीटा, बाद में बताया निर्दोष

कोच्चि। सवर्णों को दलित अब इतने खटकने लगे है कि जुर्म कोई भी करें लेकिन आरोपी दलित को ही बनाएंगे. ऐसा ही एक मामला केरल के वेंदीपेरियार में हुआ. जहां की पुलिस ने पहले बेकसुर दलित को घर से उठाया और उसके बाद थाने में ले जाकर बर्बर अत्याचार किया. पुलिस ने दो दिन बाद दलित को छोड़ दिया और कहा कि हमने गलती से पकड़ लिया था. पीड़ित अब पेरंबवूर तालुक अस्पताल में भर्ती है.

पीड़ित मुरूकन के अनुसार, पुलिस ने उसे वेंदीपेरियारंद में रहने वाले उसके साले यहां से उठाया. रिश्तोंदारों के सामने ही उसे पुलिस ने मारापीटा और उसे नंगा किया. पुलिस स्टेशन ले जाते समय पुलिस ने बुरी तरह से पकड़ रखा था.

पुलिस स्टेशन पहुंचने पर सीनियर इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस अधिकारी ने मुरूकन को निर्दयता के साथ मारा-पीटा. अगले दिन जब उसकी पत्नी और रिश्तेदार थाने में आए और पुलिस से पूछा कि कौन से केस मुरूकन को बंद किया है तो पुलिस ने कहा कि जिसे हम पकड़ रहे थे वो मुरूकन नहीं है और इसे गलती से पकड़ लाए.

अगले दिन दोपहर में मुरूकन को पुलिस ने छोड़ दिया. घर पहुंचने पर मुरूकन डरा-डरा और असहज महसूस कर रहा था. पुलिस ने उसकी बुरी तरह पिटाई की थी जिसके कारण उसके पूरे शरीर में दर्द हो रहा है. मुरूकन की पत्नी और रिश्तेदार उसे पेरंबवूर तालुक अस्पताल ले गए जहां वह भर्ती है.

पीड़ित मुरूकन ने कहा कि पुलिस ने उसे डराया और धमकाया भी है. पुलिस ने उसे धमकी दी है कि अगर वह इस घटना की जानकारी मीडिया को देता है तो पुलिस उसे किसी और केस में आरोपी बनाकर जेल में भेज देगी.