
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी ने जनता, दिहाड़ी-मजदूर और तमाम सरकारी जगहों पर ठेके पर काम करने वालों के लिए जो वादे किए थे वो उससे मुकर रही है. दिल्ली के जिस किसी विभाग में वैकेंसी निकल रही है. उसे भी रद्द कर रहे हैं. हाल ही में डीएसएससबी द्वारा निकाली गई परमानेंट पीजीटी-टीजीटी वैकेंसी को भी दिल्ली सरकार ने रद्द कर दिया था. अब दिल्ली विश्वविद्यालय में निकलने वाली एडहॉक और परमानेंट पदों पर निकली वैकेंसी को रद्द कर रहे है.
दिल्ली सरकार ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलसचिव को पत्र लिखकर कहा है कि दिल्ली सरकार चलाए जा रहे डीयू 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी की नियुक्तियों में संतुलित प्रतिनिधित्व होना चाहिए. इनमें सदस्यों की नियुक्ति विविध अनुशासनों एवं संस्थानों से होनी चाहिए.
पत्र में दिल्ली सरकार द्वारा पोषित 28 कॉलेजों की गवर्निंग बॉडी संबंधी संशोधित सूची को माननीय मुख्यमंत्री/शिक्षा मंत्री ने दिल्ली विश्वविद्यालय को अग्रिम कार्यवाई हेतु प्रेषित कर दिया है .
एकेडेमिक काउंसिल के सदस्य प्रो. हंसराज ‘सुमन’ ने बताया है कि दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय की आपसी लड़ाई के बीच एडहॉक टीचर्स, छात्र और कर्मचारियों का बहुत बड़ा नुकसान हो रहा है. दिल्ली सरकार के 28 कॉलेजों में अक्टूबर 2016 से गवर्निंग बॉडी नहीं है. सरकार के एक दर्जन से अधिक कॉलेजों में पिछले कई वर्षों से प्रिंसिपलों के पद खाली पड़े हुए हैं जिसके कारण एडहॉक टीचर्स का परमानेंट अपॉइंटमेंट और प्रमोशन नहीं हो रहे हैं.
प्रो. सुमन ने बताया है कि दिल्ली सरकार द्वारा डीयू को भेजे गए पत्र में कहा है कि 28 कॉलेजों में एडहॉक या परमानेंट कोई भी नियुक्तियां जब तक ना की जाए तब तक कि दिल्ली विश्वविद्यालय इन सूचियों को जारी नहीं कर देता.
प्रो. सुमन ने वाइस चांसलर और दिल्ली सरकार से मांग की है कि वे लंबे समय से रुके हुए 28 कॉलेजों में परमानेंट प्रिंसिपल की अपॉइंटमेंट, लगभग दो हजार एडहॉक टीचर्स की परमानेंट अपॉइंटमेंट, सैंकड़ो टीचर्स की प्रमोशन और कर्मचारियों की नियुक्ति व पदोन्नति के न होने से कॉलेज एडहॉकीज्म पॉलिसी पर चल रहे हैं. उनका कहना है कि जल्द ही 28 कॉलेजों में सरकार व विश्वविद्यालय के व्यक्तियों की सूची भेजे ताकि गवर्निंग बॉडी बनाई जा सके और जल्द से जल्द परमानेंट अपॉइंटमेंट व प्रमोशन का कार्य शुरू कराया जा सके.

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