Friday, January 16, 2026
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मेरठ सरधना मामले में आरोपी की गिरफ्तारी के बाद खुले कई राज

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूबी ने पुलिस को बताया कि उसकी मां की हत्या करने के बाद उसकी भी हत्या करने की धमकी देकर पारस जबरन उसको साथ ले गया। इस बयान के बाद पारस की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि पारस ने खुद को बचाने के लिए रूबी के साथ रिश्ते में होने और उसके मर्जी से साथ ले जाने की बात कही। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि पारस और रूबी में प्रेम प्रसंग था।

मेरठ/ लखनऊ। मेरठ जिले के कपसाड़ गांव में दलित महिला की हत्या और उसकी बेटी का अपहरण करने के आरोपी पारस सोम पुलिस गिरफ्त में आ चुका है। पीड़िता रुबी भी बरामद हो गई है। अगवा की गई रूबी को रविवार 11 जनवरी की दोपहर ACJM-2 नम्रता सिंह की कोर्ट में पेश कराकर बयान दर्ज करवाया गया। खबर है कि रूबी ने पारस के खिलाफ बयान दर्ज कराया है। रूबी के बयान को लिफाफे में सील बंद कर दिया गया है।

इसके बाद कोर्ट ने रूबी को वन-स्टॉप सेंटर यानी आशा ज्योति केंद्र भेजा है। इसी दिन पारस को स्पेशल सीजेएम कोर्ट में पेश किया गया। पारस का हत्या और अपहरण की धाराओं में रिमांड बनाया गया और 14 दिन के रिमांड में जेल भेजा गया है। पारस और रूबी को पुलिस ने शनिवार 10 जनवरी को ही हरिद्वार से बरामद कर लिया था। दोनों को देर रात मेरठ लाया गया और पूछताछ की गई।

बीते दो दिनों से मीडिया और पारस के स्वजातीय लोग सारा आरोप लड़की पर लगाकर मामले को नया मोड़ देने की कोशिश में जुटे थे, लेकिन पीड़िता रूबी के बयान ने सारे झूठ का पर्दाफाश कर दिया है। जो सूचना सामने आ रही है, उसमें रूबी ने पारस के खिलाफ बयान दिए हैं और जबरन उठाकर ले जाने की बात कही है।

सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रूबी ने पुलिस के सामने बयान दिया है कि पारस ने उसका अपहरण किया था। रूबी ने पुलिस को बताया कि उसकी मां की हत्या करने के बाद उसकी भी हत्या करने की धमकी देकर पारस जबरन उसको साथ ले गया। इस बयान के बाद पारस की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

हालांकि पारस ने खुद को बचाने के लिए रूबी के साथ रिश्ते में होने और उसके मर्जी से साथ ले जाने की बात कही। पुलिस ने भी इस बात की पुष्टि नहीं की है कि पारस और रूबी में प्रेम प्रसंग था। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है पारस की उम्र अभी 17 साल है जबकि रूबी बालिग है।

8 जनवरी को घटी इस घटना के खिलाफ अंबेडकरवादी समाज इकट्ठा हो गया था। बहुजन समाज ने जिस तरह इस मामले के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था और तमाम दलित नेताओं ने इसे बड़ा मुद्दा बना दिया था, उससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई थी और मेरठ पुलिस और यूपी पुलिस की साख दांव पर लग गई थी। देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

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