उन्नाव और कठुआ गैंगरेप पर खुलकर बोले बॉलिवुड सितारे

उन्नाव और कठुआ रेप केस से पूरे देश के लोग गुस्से में हैं. बॉलिवुड सिलेब्स से लेकर आम आदमी तक हर कोई बुरी तरह मार दी गई बच्चियों के सपॉर्ट में है. मुंबई में भी साइलंट प्रोटेस्ट किया गया जहां कई बॉलिवुड सिलेब्स ने रेपिस्ट्स को कड़ी सजा दिलाने की मांग की. अभिनेत्री भूमि पेडनेकर, शबाना आजमी, अदिति राव हैदरी, सुनील शेट्टी, विशाल डडलानी,हेलन, पायल रोहतगी, समीरा रेड्डीऔर एकता कपूर जैसे सितारों ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के मामले में कड़े कानून बनाए जाने चाहिए और घर में लड़कों को शिक्षा देनी चाहिए कि महिलाओं की इज्जत करें.

मुझे बहुत दुःख लगता है और घबराहट होती है.

भूमि कहती हैं, ‘हमारे देश में जिस तरह का माहौल है, ऐसे में एक लड़की होते हुए मुझे बहुत दुःख लगता है और घबराहट होती है. सोचती हूं कल आनेवाली जो जनरेशन है उनका क्या होनेवाला है. पता नहीं ह्यूमैनिटी किस तरफ जा रही है? महिलाओं के मामले में माहौल में एक दरिंदगी और जानवर जैसी भावना देखने को मिल रही है. यह सब सचमुच बेहद हार्टब्रेकिंग है. मैं सिस्टम में विश्वास रखती हूं और आशा करती हूं उन्नाव और कठुआ गैंगरेप मामले में जल्द ही न्याय मिलेगा. इस तरह के घिनौने और नीच अपराध के लिए इतनी कड़ी सजा निर्धारित की जानी चाहिए जिससे अगली बार कोई ऐसा अपराध करने से पहले डरे, किसी को ऐसा नहीं लगना चाहिए कि वह इतना घिनौना अपराध करके बच कर निकल जाएगा, इस तरह एक अच्छा उदाहरण सेट होगा.’

बेटी को पढ़ाने के लिए उसे जिंदा भी तो रखना पड़ेगा

शबाना आजमी ने कहा, ‘हिन्दुस्तान एक ऐसा मुल्क है जो कई सदियों में एक साथ जीता है. हम हिन्दुस्तानी 18वीं, 19वीं, 20वीं और 21वीं सदी में एक साथ रहते हैं और यह सबसे ज्यादा नजर आता है हमारे देश की औरतों में. एक तरफ हम देखते हैं हमारी औरतें बहुत ऊंचाइयों तक पहुंची हैं और बहुत बड़ी लीडर भी हैं और दूसरी ओर ऐसी खबरे पढ़ते, देखते, सुनते हैं कि कुछ कहने के लायक नहीं रह जाते. मुझे ऐसा लगता है कि हम एक आवाज के साथ पूरी तरह उठकर मेहनत करें ताकि जिस तरह के कांड रोजमर्रा में हो रहे हैं वह बंद हो जाएं. हम बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ कहते हैं और यह होना भी चाहिए, लेकिन उसके लिए बेटी को जिंदा भी तो रहना चाहिए.’

भारतीय होने में हमको शर्म आनी चाहिए

सुनील शेट्टी कहते हैं, ‘बेहद शर्मनाक घटना है. इस तरह की घटना के बाद भारतीय होने में हमको शर्म आनी चाहिए कि बार-बार हम ऐसी घटनाएं होने देते हैं. इस बार पूरा देश एक हो गया है और अपराधियों को सजा मिल भी रही है, लेकिन यह सजा ऐसी होनी चाहिए कि दोबारा ऐसा सोचने पर भी उन्हें डर लगना चाहिए.’

इन अपराधों को कतई भी पॉलिटिक्स और धर्म से न जोड़ें

पायल रोहतगी ने कहा, ‘आज भारत देश दुनिया भर में गलत रीजन की वजह से फेमस हो रहा है. कुछ वर्ष पहले निर्भया केस हुआ था और लगातार ऐसे केस सामने आते रहे हैं और अब एक साथ कई रेप और गैंगरेप के मामले सामने हैं. इन अपराधों को कतई भी पॉलिटिक्स और धर्म से न जोड़ें. मुद्दा यह है कि हमारे भारतीय पुरुष महिलाओं को क्यों इस नजर से देखते हैं. हमारे लड़के घरों में कैसे बड़े हो रहे हैं जो वह महिलाओं की रिस्पेक्ट नहीं कर पा रहे हैं. महिलाओं को लेकर भारतीय पुरुषों की सोच पर हमें बात करनी चाहिए. सुधार लड़कों की परवरिश और सोच में करना जरूरी है.’

यह कोई धर्म या किसी खास समुदाय से जोड़नी वाली घटना है क्या?

अदिति राव हैदरी कहती हैं, ‘जब तक हम सब मिलकर आवाज नहीं उठाएंगे कोई बदलाव नहीं आएगा. उन्नाव और कठुआ गैंगरेप मामले में जब आम जनता ने आवाज उठाई है तब जाकर इस मामले को इतनी गंभीरता से लिया गया है. अब हमें लगातार ऐसे मामले में खुलकर सामने आकर आवाज उठाते रहना होगा. यह मामला जनवरी महीने का है, कितने महीने गुजर गए हैं. इसी तरह तमाम परिवार और बहुत सी लड़कियां इस तरह की घटनाओं का शिकार हो रही हैं. अब इसे धर्म से जोड़ रहे हैं. यह कोई धर्म या किसी खास समुदाय से जोड़नी वाली घटना है क्या? यह एक बेसिक मांग है… देश की लड़कियां सुरक्षित रहें और खुद को सुरक्षित महसूस करें. पता नहीं लड़कों को क्या हो गया है. मुझे लगता है लड़कों को पढ़ाने की बहुत ज्यादा जरूरत है. जब तक एक लड़की मजबूत नहीं होगी देश विकास नहीं करेगा.’

तू-तू, मैं-मैं से ऊपर उठकर ऐक्शन लेना होगा

समीरा रेड्डी ने कहा, ‘शुरू से शुरू करना होगा. हर मां को अपने बेटे को लड़कियों और महिलाओं की इज्जत करना सिखाना होगा. बदलाव तो आएगा लेकिन थोड़ा वक्त लगेगा. इस मामले में किसी सरकार, धर्म, समुदाय और माहौल को जिम्मेदार ठहराने का कोई मतलब नहीं है. बदलाव लाने के लिए तू-तू, मैं-मैं से ऊपर उठकर अपने लड़कों को महिलाओं की इज्जत करना… सिखाने की जरूरत है. मैं एक मां हूं और सभी माताओं को कहना चाहती हूं बचपन से ही बेटे की परवरिश में महिलाओं की इज्जत करने की बात को शामिल करें.’

सुधार तभी होगा जब कड़े कानून बनेंगे

एकता कपूर कहती हैं, ‘यह घटना बेहद पेनफुल है. सुधार तभी होगा तब कड़े कानून बनेंगे और पुराने कानून में परिवर्तन होगा. कम से कम समय में अपराधी को कड़ी सजा मिलनी चाहिए.’

इसे धर्म से जोड़ना बंद करें

विशाल डडलानी कहते हैं, ‘उन्नाव और कठुआ में जो हुआ है उसे जो हिन्दू-मुस्लिम या धर्म-समुदाय से जोड़ा गया वह बिल्कुल बकवास बात है. इसे धर्म से जोड़ना बंद करें. बच्चियां सबकी होती हैं. वह बच्ची भी सबकी है. इस देश को हिन्दू-मुसलमान में बांटने की सोच जो अंग्रेज हमें विरासत में देकर गए हैं, यह भावना और सोच बंद होनी चाहिए. सोच ऐसी बननी चाहिए कि आप हिन्दू या मुसलमान नहीं बल्कि एक भारतीय हैं. यह देश हमारा है. यह प्रजातंत्र है. हम जैसे चाहेंगे देश वैसा चलेगा और हम चाहते हैं बलात्कार जैसी सभी तरह की घटनाएं बंद हों. कड़े कानून बनें और उसपर अमल भी किया जाए. कुछ लोग बलात्कारियों को बचाने में जुटे थे अब सब सामने है.’

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