चीफ जस्टिस की खिलाफत करने वाले न्यायमूर्ति चेलमेश्वर का आखिरी दिन

नई दिल्ली। न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर अपने ऐतिहासिक फैसलों के लिए हमेशा हमें याद रहेंगे. इन्होंने अपने कार्यकाल में प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर देश के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ आवाज उठाई थी. चेलमेश्वर के साथ सुप्रीम कोर्ट के तीन और जजों ने चीफ जस्टिस पर गंभीर आरोप लगाए थे. जे. चेलमेश्वर शुक्रवार, 22जून को रिटायर हो रहे हैं.

वरिष्ठतम न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने देश की सबसे बड़ी अदालत में करीब सात साल तक सेवा दीं. न्यायाधीश चेलमेश्वर आज 65 साल के हो गए. वह नौ न्यायाधीशों की उस पीठ का हिस्सा थे जिसने ऐतिहासिक फैसले में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था.

बता दें कि आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के मोव्या मंडल के पेड्डा मुत्तेवी में 23 जून 1953 को जन्मे चेलमेश्वर की शुरुआती पढाई कृष्णा जिले के मछलीपत्तनम के हिन्दू हाईस्कूल से हुई. उन्होंने स्नातक चेन्नई के लोयोला कॉलेज से भौतिक विज्ञान में किया. उन्होंने कानून की डिग्री 1976 में विशाखापत्तनम के आंध्र विश्वविद्यालय से ली.

वह तीन मई 2007 को गौहाटी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने थे और बाद में केरल हाईकोर्ट में स्थानान्तरित हुये. न्यायमूर्ति चेलमेश्वर 10 अक्टूबर, 2011 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बनाए गए थे. न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, एम बी लोकुर और कुरियन जोसेफ के साथ मिलकर चेलमेश्वर ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश बीएच लोया की रहस्यमय मौत के संवेदनशील मामले सहित अन्य मामलों के चुनिंदा आवंटन पर सवाल उठाए थे. लोया की एक दिसंबर 2014 को मौत हो गई थी.

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