गुंडा शब्द की कहानी

भाषावैज्ञानिकों ने बगैर सोचे-समझे बता दिए हैं कि बदमाश के अर्थ में गुंडा पश्तो भाषा का शब्द है. यदि गुंडा पश्तो भाषा का शब्द होता तो इसका सर्वाधिक प्रयोग शेरशाह और उनके उत्तराधिकारियों के समय में मिलता. कारण कि वे अफगान थे और पश्तो अफगानिस्तान की ही भाषा है.

उर्दू में पश्तो के भी शब्द शामिल हैं. यदि गुंडा पश्तो भाषा का शब्द होता तो वली, आबरू, हातिम, सौदा, मीर, मोमिन से लेकर गालिब और दाग तक कोई न कोई उर्दू का कवि गुंडा का इस्तेमाल जरूर करता. मगर ऐसा है नहीं.

हिंदी में 1910 से पहले बदमाश के अर्थ में गुंडा का प्रचलन नहीं था. विद्यापति, कबीर, सूर, तुलसी से लेकर बिहारी और भारतेंदु तक किसी ने गुंडा शब्द का प्रयोग नहीं किया. 1930 के दशक में जयशंकर प्रसाद ने गुंडा कहानी लिखी थी, जिसमें नायकत्व का भाव है.

अंग्रेजी अखबारों में गुंडा का प्रचलन 1920 के आस-पास हुआ. अंग्रेजी साहित्य में इसका प्रयोग 1925 – 30 के बीच में मिलता है.

गुंडा मूलतः द्रविड़ भाषा का शब्द है, जिसकी परंपरा पुरानी है. इसमें उभार, गोलाई या नायकत्व का भाव है. गुंडा का प्रयोग दक्षिण में धड़ल्ले से मिलेगा. तीनों भाव में मिलेगा. तमिल में गुंडा एक ताकतवर नायक का अर्थ देता है जैसे गुंडराव, गुंडराज आदि. तेलुगु में भी बतौर नायक गुंडूराव मौजूद है. मराठी में गाँवगुंड ग्राम नायक का अर्थ देता है.

सही बात यह है कि छत्तीसगढ़ के बस्तर के एक छोटे से गाँव नेतानार में पले – बढ़े गुंडा धुर ने 1910 में अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकने और उन्हें इस कदर तंग तथा तबाह किए कि अंग्रेजी फाइलों में गुंडा का एक अर्थ बदमाश हो गया. यह गुंडा धुर की ताकत थी.

राजेन्द्र सिंह

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