ब्राह्मणवाद की विजय

Details Published on 13/05/2017 16:38:37 Written by डॉ. अलख निरंजन


 विश्व इतिहास में बीसवीं शताब्दी महान क्रांतियों के लिए जानी जाती हैं. 1917 में रूस एवं 1949 में चीन की साम्यवादी क्रांतियों ने विश्व राजनीति को एक नया मोड़ दिया. 1789 में फ्रांस की महान क्रांति से पैदा होने वाले स्वतन्त्रता, समानता एवं बन्धुत्व जैसे आधुनिक मूल्यों को बीसवीं शताब्दी की महान क्रांतियों ने नया अर्थ तथा वैश्विक विस्तार दिया. ‘स्वतन्त्रता’ जैसे मूल्य ने सम्पूर्ण विश्व को इतना प्रभावित किया कि उपनिवेशों का अन्त हो गया, कोई भी राष्ट्र किसी अन्य राष्ट्र का राजनीतिक उपनिवेश नहीं रह गया तथा नस्ल, लिंग, धर्म, जाति, वंश आदि विभिन्न आधारों पर स्थापित दासता को उखाड़ फेंकने के लिए परिस्थितियाँ तैयार हुईं.  समानता... Read More

मनुवाद को चुनौती देते तीन महापुरूष

Details Published on 27/04/2017 13:03:54 Written by डॉ. सिद्धार्थ


अप्रैल महीने का पहला पखवाड़ा स्वतंत्रता, समता और भाईचारे पर आधारित आधुनिक भारत का सपना देखने वाले तीन महापुरूषों की जयंती का समय हैं. 9 अप्रैल (1893) को राहुल साकृत्यायन. 11 अप्रैल (1827) को जोतिबा फुले और 14 अप्रैल (1891) को बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर. इन तीनों महापुरूषों के सपनों, दर्शन, विचारों, इतिहास दृष्टि, व्यक्तित्व और कृतित्व में बहुत कुछ साझा है, लेकिन साथ ही भिन्नता भी मौजूद है. सबसे पहले तो इन महापुरुषों के मनुवाद के बारे में विचार को देखते हैं.हिन्दू धर्म की व्याख्या करते हुए बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने कहा था- “हिन्दू जिसे धर्म कहते हैं, वह कुछ और नहीं, आदर्शों और प्रतिबंधों की भीड़ है. हिन्दू धर्म वेदों व स्मृतियों,... Read More

खतरे में राजनैतिक आंदोलन

Details Published on 22/04/2017 11:05:18 Written by Ashok Das


पिछले छह महीने से यूपी चुनाव की व्यस्तताओं में उलझी मायावती के सामने जब 11 मार्च को चुनावी नतीजे आए तो उनकी हैरानी का ठिकाना नहीं था. चुनाव के दौरान अपने को सत्ता से बस एक कदम दूर मानकर चल रही मायावती और बहुजन समाज पार्टी के हिस्से आई सीटें हाथों और पैरों की ऊंगलियों की गिनती से बाहर नहीं आ पाई. बसपा को महज 19 सीटें मिली. यह एक ऐसा रिजल्ट था; जिससे सिर्फ पार्टी के नेता ही नहीं, बल्कि बसपा के समर्थक भी हताश और परेशान थे. इस नतीजे के बाद देश-विदेश में फैले बहुजन विचारधारा के हितैषी अम्बेडकरवादियों की निगाहें मायावती पर टिकी थीं. सब टकटकी लगाए बैठे थे कि वह जिस नेतृत्व में विश्वास करते हैं, इस परिणाम के बाद उसकी पहली प्रतिक्रिया... Read More

प्रजातंत्र को मजबूत करती बसपा

Details Published on 22/02/2017 17:32:23 Written by प्रो. विवेक कुमार


26 जनवरी 2017 को भारत ने अपना 67वां गणतंत्र दिवस मनाया। इन 67 वर्षों में सामाजिक, आर्थिक, न्यायिक, उच्च, तकनीकी एवं प्रबंधन शिक्षा आदि में बहुजनों (अनु. जाति/जजा/अन्य पिछड़ा वर्ग एवं धार्मिक अल्पसंख्यकों) की भागेदारी उनकी जनसंख्या के अनुपात में कत्तई सुनिश्चित नहीं हो पाई है। राजनैतिक धरातल पर भी अनेक राष्ट्रीय राजनैतिक दलों ने उनके साथ न्याय नहीं किया है। यद्यपि जनसंख्या के आधार पर यह समाज बहुसंख्यक हैं, पर इन दलों में नेतृत्व के स्तर पर इनका प्रतिनिधित्व न के बराबर है। इन सभी बहुजन समुदायों को राष्ट्रीय दल प्रकोष्ठों या सेल में बंद कर के रखने की परंपरा रही है। जैसे अनु. जाति, जजा, पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ। अपवाद को छोड़... Read More

जन्मदिन विशेषः बहनजी का धम्म कारवां

Details Published on 15/01/2017 10:25:44 Written by Lal Ji Medhankar


भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण उपरान्त लगभग 218 वर्षों के बाद विश्व के तमाम देशों को अपने धम्म-विजय अभियान द्वारा विजित करने वाले महान सम्राट अशोक ने इसी भारत-भूमि पर राज्य करना प्रारम्भ किया. न्यग्रोध नामक सात वर्षीय श्रामणेर के ‘अप्पमाद’ (अप्रमाद) से संबंधित धर्मोपदेश को सुनकर सम्राट अशोक के मन में बुद्ध, धम्म व संघ के प्रति श्रद्धा व भक्ति उत्पन्न हुई. जब सम्राट अशोक को बौद्ध धर्म में आस्था उत्पन्न हुई तो सम्राट ने युद्ध-विजय को त्यागकर अहिंसा व धम्म-विजय का अभियान शुरू किया. सम्पूर्ण जम्बुद्वीप में बहुजनों के सुख व हित के लिए बहुत सा धम्म-कार्य करने के तद्नन्तर अपने आचार्य मोग्गलिपुत्ततिस्स से पूछा,‘‘भगवान... Read More

नोटबंदी से आम जनता त्रस्त

Details Published on 19/12/2016 12:57:46 Written by डॉ. अलख निरंजन


जनसंख्या की दृष्टि से विश्व के सबसे बड़े लोकतन्त्र की राजधानी दिल्ली के आसमानों में मानव जीवन के लिए हानिकारक कणों की धुंध जमी हुई थी. पर्यावरण विशेषज्ञ और सरकारी प्राधिकरण के अधिकारी जनता को घर से न निकलने की सलाह दे रहे थे. बच्चे घर से बाहर न निकलें इसलिए स्कूल बन्द कर दिये गये थे, लोगों को मास्क पहनकर बाहर निकलने की हिदायत दी जा रही थी, इसी  बीच लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री के 08 नवम्बर 2016 रात्रि 08 बजे के एक ऐलान ने न केवल दिल्ली की जनता को बल्कि पूरे देश की जनता को अचानक घर से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया. यह ऐलान था 500 और 1000 रुपये मूल्य के नोटों के चलन पर पूर्णतः रोक लगाना. यह ऐलान काला... Read More

परिनिर्वाण दिवस विशेषः बहुजन पुर्नजागरण के सूत्रधार बने थे फुले

Details Published on 28/11/2016 12:33:02 Written by अनूप पटेल


महात्मा ज्योतिबा फुले भारत के इतिहास में एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने भारतीय के शूदों और स्त्रियों की स्वतंत्रता और समानता की पुरजोर वकालत की थी. फुले ने अपना सार्वजनिक जीवन 1848 में शुरु किया और 28 नवंबर 1890 को अपने जीवन के आखिरी दिन तक वह बहुजन (दलित-पिछड़े-स्त्रियां) समाज के कल्याण में लगे रहे. फुले आधुनिक भारत के निर्माताओं में से एक थे. फुले की कथनी-करनी में कोई फर्क नहीं था. फुले अपने समय की राष्ट्रव्यापी समस्याओं से भिड़े. उन्होंने धर्म, जाति तथा जेंडर के सवाल पर, कर्मकाण्ड, किसानों की समस्या और ब्रिटिश शासन आदि पर चिंतन किया. वे एक दार्शनिक, नेता और महान संगठनकर्ता थे. यही वजह थी कि उन्होंने अपने जीवन में शिक्षा और दलित... Read More

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