वाया बीबीसी कौशल पंवार की कहानी

Details Published on 26/12/2016 18:35:25 Written by kaushal Panwar


वर्जीनिया वुल्फ की किताब  ''A Room of One''''s Own'' का प्रकाशन 1929 में हुआ था, उसका केन्द्रीय स्वर है कि एक स्त्री का अपने लेखन के लिए अपना कमरा होना चाहिए, अपने निज को सुरक्षित रखने के लिए भी अपना कमरा, इसके लिए उसकी आर्थिक स्वतंत्रता जरूरी है. अपने कमरे को हासिल करने की इसी छटपटाहट को कौशल पंवार ने बीबीसी से साझा किया, जिसे साभार यहां प्रकाशित किया जा रहा है. मेरा भी घर मे एक कोना होता, उसमें एक टेबल और कुर्सी होती, मै हमेशा इसके लिए तरसती थी. पर मेरे लिए वह कोना सुनिश्चित होना घर के एक हिस्से को घेरे रखने के बराबर होता.इसमें मेरे मां- बाप की कोई ग़लती नहीं थी, उन्होंने भी तो सारी उम्र घर की इसी कोठरी में बिता दी थी. यह घर ही इसलिए कहलाया... Read More

हमारे यहां सामाजिक, धार्मिक और राजनैतिक आंदोलन चलाने वालों का आपसी तालमेल नहीं है- एड. सुरेश राव

Details Published on 26/12/2016 18:32:11 Written by Ashok Das


उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के हेमपुर गांव के ग्रांट नंबर-18 में 1969 के मई महीने में एक बच्चे का जन्म होता है. लेकिन उसकी बदनसीबी ऐसी होती है कि उसके जन्म के दो महीने पहले ही उसके पिता गुजर जाते हैं. जन्म के बाद मां की दूसरी शादी हो जाती है और उस बच्चे को उसके दादा-दादी पालते हैं. जब वह अबोध 11 साल का होता है तो उसके दादा चल बसते हैं और 18 साल का होते-होते उसकी दादी भी साथ छोड़ जाती हैं. और वह अठारह साल का नवयुवा अपने जीवन में अकेला रह जाता है. कहानी थोड़ी फिल्मी है, लेकिन सच है.आप कल्पना करिए कि कोई आम नवयुवक होता तो ऐसे में क्या करता? शायद वह जिंदगी से निराश हो जाता. ज्यादा संभावना थी कि वह गलत संगत में पर जाता. अगर ये न भी होता... Read More

मैं अस्थायी बदलाव नहीं चाहता- कांशीराम

Details Published on 26/12/2016 18:26:15 Written by Dalit Dastak


आज जब देश में राष्ट्रवाद पर बहस छिड़ी हुई है, कांशीराम जी द्वारा दिए गए राष्ट्रवाद की परिभाषा गौर करने लायक है. मान्यवर कांशीराम दो राष्ट्रवाद के सिद्धान्त की बात कहते थे. एक वो जो सताए जाते हैं उनका राष्ट्रवाद और दूसरे जो सताते हैं, उनका राष्ट्रवाद. उनका मानना था कि अत्याचार करने और सताने वाले के लिए राष्ट्रवाद की परिभाषा सामंतवाद है, जबकि मेरे लिए राष्ट्रवाद भारत की जनता है. 8 मार्च, 1987 को कांशीराम जी द्वारा इलस्ट्रेटिड वीकली के संवाददाता निखिल लक्ष्मण को दिए साक्षात्कार के जरिए हम मान्यवर को आपके सामने रखने की कोशिश कर रहे हैं. तकरीबन तीन दशक बाद भी वह इंटरव्यू बहुजन समाज को दिशा देने में सक्षम है. प्रश्न-... Read More

वाल्मीकि ने राम को कठघरे में खड़ा किया- दर्शन रत्न ‘रावण’

Details Published on 26/12/2016 18:31:14 Written by Ashok Das


आमतौर पर ‘वाल्मीकि’ को लेकर दलित समाज दो धड़ों में बंटा नजर आता है. सफाई कर्मचारियों का एक तबका वाल्मीकि को ‘भगवान’ का दर्जा देता है तो वहीं अन्य तबका यह सवाल उठाता नजर आता है कि वाल्मीकि दलित नहीं थे. दर्शन रत्न ‘रावण’ का मानना है कि लोगों ने वाल्मीकि को ठीक से समझा ही नहीं. वह वाल्मीकि को रामायण के जरिए राम की बखिया उधेड़ने वाले के तौर पर देखते हैं. 20 साल की उम्र से सफाई कर्मचारी वर्ग के बीच काम करने वाले ‘रावण’ आधस नाम के संगठन के जरिए इस समाज में फैली अशिक्षा और गंदगी दूर करने निकले हैं. साथ ही वाल्मीकि और अंबेडकर को एक मंच पर स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. फिलवक्त जब देश भर में ‘रामलीला’ की... Read More

अजाक्स की रैली से प्रदेश में कर्मचारियों का उत्साह बढ़ा है- जे.एन. कंसोटिया

Details Published on 08/08/2016 12:43:13 Written by Ashok Das


12 जून के बाद मध्य प्रदेश में हचलच बढ़ गई है. कारण मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति कर्मचारी एवं अधिकारी संघ यानि ‘अजाक्स’ की भोपाल में हुई वह रैली है, जिसमें प्रदेश भर से पहुंचे लाखों सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों ने एक साथ अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी. इस कार्यक्रम में जुटी भीड़ को देखकर सरकार इतने दबाव में आ गई कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को खुद यह घोषणा करनी पड़ी कि आरक्षण कोई खत्म नहीं कर सकता. यह सफल कार्यक्रम अजाक्स के प्रांतीय अध्यक्ष जे.एन. कंसोटिया के नेतृत्व में हुआ. 1993 में गठित हुए अजाक्स के श्री कंसोटिया 2005 से अध्यक्ष हैं. इस कर्मचारी आंदोलन को लेकर ‘दलित दस्तक’ के संपादक अशोक दास ने भोपाल... Read More

जानिए कांशीराम पर फिल्म बनाने वाले युवक की कहानी

Details Published on 08/08/2016 12:42:07 Written by Ashok Das


24 साल के अर्जुन ने जब कांशीराम जी पर फिल्म बनाने को लेकर लोगों से मिलना शुरू किया तो कोई इस युवा पर भरोसा करने को तैयार नहीं था. इसकी वजह भी जायज थी. अर्जुन के पास न तो पैसे थे और ना ही वो कोई बड़े फिल्म मेकर थे, जिन पर लोग दांव लगाते. लेकिन अर्जुन को खुद पर भरोसा था. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. मां ने बेटे पर भरोसा कर जमीन बेंच दी, पत्नी ने गहने बेच दिए और अर्जुन ने भी इस मिशन को पूरा करने में अपनी पूरी जान लगा दी. आखिर में अर्जुन के हौंसले की जीत हुई और वो “द ग्रेट लीडर कांशीराम” नाम से फिल्म बनाने में कामयाब हो गए हैं. आने वाले 9 अक्टूबर को यह फिल्म रिलिज होगी. इसी के प्रोमोशन के सिलसिले में अर्जुन दिल्ली स्थित ‘दलित दस्तक’... Read More

स्वामी प्रसाद मौर्य ने बसपा के साथ-साथ मौर्य समाज से भी घात किया है- पारसनाथ मौर्य

Details Published on 26/12/2016 18:31:32 Written by Satnam Singh


स्वामी प्रसाद मौर्य के बहुजन समाज पार्टी से अलग होने के बाद मौर्या समाज को बसपा में जोड़े रखने की जिम्मेदारी फिर से पूर्व मंत्री पारसनाथ मौर्या पर आ गई है. स्वामी प्रसाद मौर्य के जाने के बाद बसपा के भीतर और मौर्य समाज में क्या प्रभाव पड़ा है, इसको जानने के लिए पारसनाथ मौर्या से बात की सतनाम सिंह ने. स्वामी प्रसाद मौर्य के बहुजन समाज पार्टी छोड़ने पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?- उसने पार्टी साथ के भी घात किया है और अपने साथ भी घात किया है. उसने साथ ही साथ अपने मौर्य समाज के साथ भी घात किया है. इसलिए की मानववादी महापुरुषों के विचारों को जमीन पर उतारने का कार्य यदि किसी ने किया है तो वह बहन मायावती जी ने किया है. बहन जी ने... Read More

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