बाप-बेटे के बीच झगड़ा नहीं रगड़ा हो रहा है जो चुनाव से ऐन पहले सुलझ जाएगा

Details Published on 09/01/2017 18:26:24 Written by Ashok Das


समाजवादी पार्टी का झगड़ा जिसे मैं रगड़ा कह रहा हूं, लखनऊ से दिल्ली पहुंच गया है. दिल्ली में चुनाव आयोग से मिलने के बाद मुलायम सिंह यादव ने कहा कि अखिलेश मेरा बेटा है उससे मतभेद दूर कर लेंगे. असल में मुलायम सिंह ने बाप-बेटे के रिश्ते की दुहाई देकर जो विश्वास जताया है वह विश्वास कभी टूटा ही नहीं था. आप पिछले तकरीबन तीन महीने जबसे समाजवादी पार्टी के परिवार का झगड़ा चल रहा है, कि मीडिया रिपोर्ट पर ध्यान दीजिए. इस बीच कभी भी न तो समाजवादी पार्टी के गुंडई की बात हुई न ही भ्रष्टाचार की, और न ही परिवारवाद की. बस बाप-बेटे और परिवार के बीच इमोशन झगड़े की चर्चा ही होती रही. इस बीच चुनाव की तारीख घोषित होने तक यह ड्रामारूपी झगड़ा अपने... Read More

दलित समाज के लिए शर्म की बात, शहीद उधम सिंह के परपोते को एक अदद नौकरी की तलाश

Details Published on 03/01/2017 18:30:18 Written by Ashok Das


यह खबर मुझे एक चैनल के वेबसाइट पर पढ़ने को मिली. हेडिंग थी- ‘जनरल डायर को मारने वाले शहीद उधम सिंह के परपोते को नहीं मिल रही चपरासी की नौकरी’ खबर पढकर मुझे लगा कि जैसे हमारे दलित समाज की इज्जत को चौराहे पर निलाम किया जा रहा है. हो सकता है कि खबर लिखने वाले पत्रकार की ऐसी मंशा ना हो और उसने अपनी खबर को सनसनी बनाने के लिए यह हेडिंग दी हो, लेकिन चूंकि मैं क्रांतिकारी शहीद उधम सिंह के बलिदान के बारे में जानता हूं इसलिए मुझे यह खबर अखर गई. लेकिन पहले उधम सिंह के परपोते जग्गा सिंह के बारे में जानते हैं. फिर दूसरी बात.शहीद उधम सिंह के परपोते पंजाब सरकार में नौकरी पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. नौकरी के नाम पर वह दस साल से पंजाब... Read More

क्या आप उस युद्ध के बारे में जानते हैं, जिसमें 500 अछूतों ने 28 हजार की पेशवा सेना को धूल चटा दी थी

Details Published on 31/12/2016 16:19:31 Written by Ashok Das


1 जनवरी सन् 1818 के दिन एक ऐसी ही घटना घटी थी, जिसने दलित समाज के शौर्य को दुनिया भर में स्थापित किया था. मुख्यधारा की मीडिया और दलित समाज के विरोधी हमेशा से इस घटना का जिक्र करने से कतराते रहे हैं. क्योंकि यह घटना जहां दलितों की शौर्यगाथा है तो वहीं मनुवादियों के मुंह पर कालिख. बहुजन समाज के लोगों का इस घटना को जानना बहुत जरूरी है. इस महान गाथा में 500 नायकों ने हिस्सा लिया था. ये सारे लोग बहुजन समाज के नायक हैं. इस ऐतिहासिक दिन को याद करते हुए डॉ. बाबासाहेब आम्बेडकर प्रतिवर्ष 1 जनवरी को उस महान स्थान पर जाकर उन वीर दलितों का नमन किया करते थे.यह दिन कोरेगांव के संघर्ष के विजय का दिन है, जिसमें महारों ने ब्राह्मणवादी पेशवाओं... Read More

नेतृत्व में आस्था जारी रखिए पासवान जी, शुभकामनाएं

Details Published on 19/12/2016 15:10:35 Written by अशोक दास


हाजीपुर वाया पटना होते हुए एक खबर दिल्ली पहुंची है. खबर यह है कि ‘हिन्दु ह्रदय सम्राट’ नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आस्था रखने वाले और उनके मंत्रीमंडल में शामिल केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए अपने कार्ड से हाजीपुर में रविवार को खरीददारी की. उन्होंने एक दुकान से मिठाई खरीदी (जाहिर है अच्छी दुकान में गए होंगे), एक गारमेंट के दुकान से कपड़े खरीदे और एक जगह चाय भी पी. यह सारा कार्यक्रम उन्होंने हाजीपुर के शहरी क्षेत्र में किया. ऐसा कर उन्होंने कैशलेस सिस्टम को बढ़ावा दिया. जाहिर है कि ऐसा कर उन्होंने अपनी सरकार के नेतृत्व में जो कि मोदी जी हैं, आस्था रखते हुए अपना फर्ज निभाया. खबर भी... Read More

बहुजन नायकों को पढ़ने से मिलेगी लड़ने की शक्ति

Details Published on 03/12/2016 12:58:40 Written by Ashok Das


क्या आपने महात्मा ज्योतिबा फुले को पढ़ा है? तथागत ने दुनिया को जो संदेश दिया, क्या आप उसके बारे में जानते हैं? बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने जो लिखा क्या आप उससे वाकिफ हैं? मान्यवर कांशीराम सहित तमाम बहुजन नायकों ने बहुजन समाज को जो समझाने की कोशिश की क्या आप उसे समझ पाए हैं? अगर नहीं तो इनलोगों को पढ़ना और समझना शुरू करिए, क्योंकि अगर आप सच में अन्याय, अत्याचार और भेदभाव का प्रतिकार करना चाहते हैं तो इनको पढ़ना और समझना बहुत जरूरी है.आज अचानक से बहुजन नायकों को पढ़ने-समझने की बात करने की भी एक वजह है. वजह बिहार के मुज्जफरपुर जिले के केंद्रीय विद्यालय का वह बच्चा है, जिसको पीटे जाने का विडियो पिछले दिनों वायरल हुआ था. फिर... Read More

हिंदू त्यौहार और बहुजन समाज

Details Published on 31/10/2016 15:34:39 Written by Ashok Das


अभी-अभी दस दिनों का दशहरा बीता है. मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि दुर्गा कौन थीं और उनका महिषासुर के साथ क्या संबंध था और राजा महिषासुर ने दुर्गा का क्या बिगाड़ा था जो उन्होंने उसे मार डाला. और मार भी डाला तो नौ दिनों का वह क्रम क्या था और उन नौ दिनों में क्या हुआ था? क्योंकि समाज के एक बड़े हिस्से से अब यह सवाल भी उटने लगा है. मैं यह भी नहीं समझ पाता कि दशहरे में रामलीला क्यों दिखाते हैं, जबकि होना यह चाहिए था कि दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों में जो हुआ था उसे लोगों को बतातें, तब जाकर दशहरा ज्यादा सार्थक होता. मैं तो महज यह पूछना चाहता हूं कि जो ''भक्तजन'' इन दस दिनों तक धूनी रमाए रहें आखिर उन्हें मिला क्या? क्या आपका... Read More

अस्सी और नब्बे के दशक में अनबुझ पहेली जैसे थे कांशीराम

Details Published on 08/10/2016 19:47:08 Written by Ashok Das


मान्यवर कांशीराम का जन्म पंद्रह मार्च1934 को हुआ. प्यार से लोग उन्हें साहब या आदरवश मान्यवर कहते हैं. वह अभी तक के एक ऐसे नायक रहे हैं, जिनका समग्रता से आंकलन होना बाकी है. अस्सी और नब्बे के दशक में उनका व्यक्तित्व अनबुझ पहेली की तरह रहा. परंतु नब्बे के दशक के बाद से उन्होंने भारतीय राजनीति को अकेले दम पर एक नई दिशा दी. उन्होंने गरीबों, मजलूमों, अशिक्षित, ग्रामीण अंचल के लोगों का एक ऐसा आंदोलन किया, जो पढ़े-लिखे शहरी तथा पूंजीपतियों द्वारा समर्थित दलों को मुंह चिढ़ाता है. मान्यवर कांशीराम का व्यक्तित्व साधारण मनुष्य का था. जो कि एक सामान्य समाजिक परिवेश से उठकर भारतीय राजनीति में सूर्य की तरह चमके. वह गांधी नेहरू, टैगोर,... Read More

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