दयाशंकर मुद्दे पर यूपी के महिला आयोग में चुप्पी क्यों?

क्या किसी ने इस बात पर ध्यान दिया है कि दयाशंकर सिंह द्वारा बसपा अध्यक्ष मायावती को अपशब्द कहने पर भी देश और उत्तर प्रदेश के महिला आयोगों ने अभी तक कोई संज्ञान नहीं लिया है? ऐसा क्यों? जो राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को रोकने के लिए ही बनाये गए है, उन्होंने कोई कार्यवाही क्यों नहीं की? इसके निम्न कारण हो सकते है:- (1) महिला आयोगों को इसकी सूचना ही ना हो कि इस प्रकार का कोई अपराध हुआ है. (2) महिला आयोगों को ये लगा होगा कि यह कोई अपराध नहीं है और इसलिए इस पर संज्ञान लेने की आवश्यकता नहीं है. लेकिन जब देश की संसद में यह मामला उठाया गया है तो ऐसा असंभव है कि महिला आयोगों को इसकी सूचना ना हो पायी हो, इसलिए कोई कार्यवाही ना करने का यह कारण नहीं हो सकता कि महिला आयोगों को कोई सूचना ही नहीं मिली. अब दूसरे कारण के विषय में विचार किया जाए, जब राष्ट्रीय महिला आयोग अभिनेता सलमान खान द्वारा अभद्र टिप्पणी करने पर कार्यवाही कर सकता है, तो इस मामले में क्यों नहीं कर सकता. क्या महिला आयोग के शब्दकोष के अनुसार उक्त अपशब्द जिसका दयाशंकर सिंह ने ””बहन जी”” के विरुद्ध उपयोग किया आपत्तिजनक नहीं है? इससे यही सिद्ध होता है कि राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग द्वारा इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं करने के पीछे कोई अन्य कारण होगा.

भारतीय समाज के प्रभुत्वशाली शोषक वर्ग की सामंतवादी- ब्राह्मणवादी मानसिकता को ध्यान में रखते हुए यही बात प्रकट होती है कि क्योंकि यह मामला अनुसूचित जाति की महिला से सम्बंधित है इसलिए महिला आयोगों ने कोई कार्यवाही नहीं की. क्योंकि इन ब्राह्मणवादी शोषकों की नजर में अनुसूचित जातियों की महिलाओं के सम्मान का कोई महत्व नहीं होता. वास्तव में यह केवल स्त्री से सम्बंधित मामला ही नहीं है बल्कि यह पूरे शोषित वर्ग से सम्बंधित मामला है. शोषक वर्ग यह सहन नहीं कर सकता कि शोषित वर्ग में जागृति उत्पन्न हो, उनमें अपने शोषण के कारणों को लेकर चेतना आये और वो शोषण के खात्मे के लिए संघर्ष करने की स्थिति में आ पाएं. क्योकि ब्राह्मणवादी शोषक वर्ग जिस धन-दौलत पर ऐशोआराम करता है, अपने महल खड़े करता है, अय्याशियां करता है, वो सब धन दौलत इसी शोषित वर्ग के श्रम और पसीने से उत्पन्न होती है. शोषक वर्ग तो शोषित वर्ग का खून चूसने वाला पिस्सू है जो शोषण वर्ग के श्रम के शोषण पर अय्याशियां कर रहा है. ऐसी शोषणकारी व्यवस्था को बनाये रखने के लिए ब्राह्मणवादी शोषक वर्ग सतत प्रयत्नशील रहता है. इसी कारण वो नहीं चाहता कि शोषित वर्ग में चेतना का संचार हो और उनमें जागृति आये. लेकिन क्योंकि अब शोषित वर्ग में चेतना का संचार होने लगा है इसीलिए शोषित वर्ग पर अत्याचार बढ़ रहे है.

शोषित वर्ग की महिलाओं के साथ संगठित बलात्कार किये जा रहे है और पुलिस, प्रशासन, न्यायपालिका, फ़ौज, मीडिया और सरकार शोषक वर्ग की कठपुतलियां बने हुए है, क्योंकि इन संस्थाओं में यही ब्राह्मणवादी बैठे हुए हैं. इसीलिए सुश्री मायावती ””””बहन जी”””” का अपमान करने के बावजूद श्री दयाशंकर सिंह के विरुद्ध राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य महिला आयोग ने कोई कार्यवाही नहीं की. वास्तव में यह स्त्री – पुरुष संघर्ष नहीं है, वर्ग संघर्ष है. यह शोषक वर्ग और शोषित वर्ग का संघर्ष है. इसलिए शोषक वर्ग का प्रत्येक सदस्य चाहे वो स्त्री हो या पुरुष, इस शोषणकारी व्यवस्था को बनाये रखने के लिए कार्य कर रहा है. क्योंकि शोषित वर्ग का शोषण करते रहने में ही उनका हित है. शोषित वर्ग के शोषण करने पर ही तो ब्राह्मणवादी शोषक वर्ग का अस्तित्व टिका हुआ है.​

​-​ फेसबुक पोस्ट से​

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