यहां के आदिवासी परिवारों के लिए न पानी है, न बिजली

Details Published on 02/01/2017 16:37:26 Written by Dalit Dastak


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मध्य प्रदेश। सरकारें दलितों-आदिवासियों के लिेए लाख सुविधा देने की घोषणा करती रहे, वह जमीन पर नहीं उतर पाती. खासकर हिन्दूवादी सरकारें दलितों-आदिवासियों के हित और सुविधाओं का ख्याल सबसे बाद में रखती है. मध्य प्रदेश में एक ऐसा ही गांव है, जहां के आदिवासियों के लिए न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही बिजली की.


उनाव दतिया मार्ग से घिसलनी बायपास मार्ग पर बसे आदिवासी परिवार मूलभूत सुविधाओं के लिए मोहताज हैं. कस्बा उन्नाव से 1 किमी दूर मैनापार पहाड़ी पर 5 साल पहले आदिवासी परिवारों ने डेरा डाला था. यहां लगभग 20 आदिवासी परिवार रहते हैं. जीवन गुजारने के लिए ये लोग लकड़ी बेचकर व मजदूरी कर वह अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं. लेकिन यहां के प्रशासन ने इनके सुविधाओं की कोई सुध नहीं ली है. उनके लिए न तो शुद्ध पानी की व्यवस्था है और न ही मकानों की. आदिवासियों ने मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रशासन के पास कई बार गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन ने इनकी सुध नहीं ली.


यहां रहने वाले आदिवासी समाज के मंगू कहते हैं कि उन्होंने मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास के लिए आवेदन दिया, लेकिन आज तक कुछ नहीं हुआ. पार्वती आदिवासी  पानी को लेकर परेशान हैं. उनका कहना है कि टीला पर पांच साल से रह रहे हैं लेकिन यहां एक हैंडपंप भी नहीं लग सका. यहां के सारे लोग पानी के लिए पास के गांव जाने के लिए मजबूर हैं. खास बात यह है कि इन दिनों स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्रशासन घर घर शौचालय बनवाने के लिए प्रयास कर रहा है, बावजूद इसके यहां एक भी शौचालय नहीं है.


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