एक ही दलित परिवार की तीन बेटियां एक साथ बनी लेक्चरर

झुंझुनूं। बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर ने कहा था कि मैं किसी परिवार की तरक्की को इस तरह आंकता हूं कि उस परिवार में महिलाओं के शिक्षा की स्थिति क्या है. बाबासाहेब के उस सपने को झूंझुनूं के चिड़ावा की बेटियों ने साकार कर दिया है. वार्ड 25 निवासी नायक परिवार की तीन बेटियो ने एक साथ लेक्चरर (व्याख्याता) पद पर चुनी गई है.

बेटियों के पिता बाबूलाल नायक खुद नवलगढ़ पंचायत समिति में सहायक लेखाधिकारी हैं. उनकी तीनों बेटियों का प्रथम व्याख्याता पद पर चयन हुआ है. बड़ी बेटी सरिता नायक का राजनीति विज्ञान में व्याख्याता के पद पर चयन हुआ है. वह वर्तमान में भीलवाड़ा में थर्ड ग्रेड शिक्षिका के पद पर हैं. वही दूसरी बेटी संगीता नायक संस्कृत में व्याख्याता बनी हैं जो वर्तमान में धतरवाला गांव में सैकंड ग्रेड शिक्षिका हैं. वहीं तीसरी बेटी सविता नायक का इतिहास व्याख्याता में चयन हुआ है जो फिलहाल अलीपुर गांव में सैकंड ग्रेड में शिक्षिका है.

इस तीहरी सफलता से पूरे परिवार में खुशी है. पिता बाबूलाल नायक का कहना है कि बेटियां नियमित पढ़ाई करती रही, जिसके बाद उन्होंने यह सफलता अर्जित की है. उन्होंने कहा कि हर किसी को अपनी बेटियों को आगे बढ़ने में पूरा सहयोग करना चाहिए. गौरतलब है कि बाबूलाल की तीनों बेटियों की शादी हो चुकी है. बावजूद इसके तीनों ने लगातार अपनी पढ़ाई को जारी रखा है और प्रशासनिक सेवा की परीक्षा की तैयारी कर रही हैं.

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