सुशील मोदी की चचेरी बहन भी सृजन घोटाले में शामिल

पटना। बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में एक नया खुलासा सामने आया है. सृजन घोटाले के तार बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की चचेरी बहन रेखा मोदी से जुड़ गए हैं. उन पर करोड़ों रुपये का भुगतान सृजन के खाते से लेने के आरोप लगे हैं. जानकार कहते हैं कि इस घोटाले में अभी और कई बड़ी मछलियों का नाम उजागर होना बाकी है.

जांच एजेंसियों को पता लगा है कि सृजन के कर्ता-धर्ता अफसरों और राजनेताओं को खुश करने के लिए उनके परिजनों को बड़ी मात्रा में गिफ्ट दिया करते थे. इनमें से अधिकांश हीरे की ज्वेलरी होती थी. इन ज्वेलरी की खरीद के लिए सृजन के खाते से रेखा मोदी को भुगतान होता था, फिर रेखा मोदी उन्हें अपनी कंपनी के जरिए या नकद हीरे व्यापारी को देती थीं. पटना के जालान जेम्स के मालिक रवि जालान ने कबूल किया है कि रेखा मोदी ने उन्हें हीरों की खरीद के बदले कई बार भुगतान किया है.

फिलहाल रेखा मोदी पटना से फरार हैं. उनके घर पर कोई यह बताने में सक्षम नहीं है कि वो कहां हैं. रेखा मोदी और सृजन की सचिव मनोरमा देवी के बीच रिश्ते काफी मधुर थे. यह बात भी सबको पता है मगर उनके रिश्ते सुशील मोदी से अच्छे नहीं हैं. साल 2005 में भी सुशील मोदी को रेखा मोदी की वजह से बदनामी झेलनी पड़ी थी. रेखा मोदी ने एक बार अपने ही भाइयों पर कपड़े फाड़ने के आरोप लगाए थे.

इस घोटाले में अभी तक केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, पूर्व सांसद शाहनवाज़ हुसैन, झारखंड के सांसद निशिकांत दुबे, भाजपा से अब निलंबित किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष विपिन शर्मा, उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी के दीपक वर्मा के नाम भी सामने आए हैं और अब इस मामले में एक नया नाम रेखा मोदी का जुड़ गया है. इन लोगों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तरीके से सृजन की दिवंगत सचिव मनोरमा देवी या उनके बेटे अमित कुमार या बहू प्रिया से संबंध रहे हैं.

गौरतलब है कि सृजन घोटाले की जांच सीबीआई ने अपने हाथ में ले ली है और इस सिलसिले में दर्ज एफआईआर और दूसरे जरूरी कागजातों का बारीकी से अध्ययन कर रही है. साथ ही घोटाले से जुड़े सरकारी व बैंक अधिकारियों, कर्मचारियों, सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के पदधारकों और फायदा लेने वाले लोगों की सूची बनाकर इनकी चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा जुटाने में लगी है. मामले की जांच एएसपी सुरेंद्र मल्लिक की अगुआई में 15 सदस्यीय सीबीआई टीम कर रही है. पहले इस मामले की जांच बिहार एसआईटी और आर्थिक अपराध की ईकाई कर रही थी.

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