सपा सरकार ने भर्ती परीक्षा में आरक्षित वर्ग के अभ्यार्थियों के साथ किया भेदभाव

Details Published on 30/12/2016 15:13:02 Written by Dalit Dastak


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एटा। यूपी की सपा सरकार ने लगातार चुनावी वायदे कर रही है. लगातार योजनाएं और भर्तियों की घोषणा कर रही हैं. लेकिन सपा सरकार अपने वायदे को भूलती जा रही है. ये वो वायदे है जो आरक्षित वर्ग और समुदाय से जुड़ा है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है.


एटा के रहने वाले पंकज कुमार ने 2010 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका दायर की. यह याचिका सपा सरकार की नीतियों के खिलाफ थी. मामला पुलिस आरक्षी भर्ती से जुड़ा है. जिसमें सभी अभ्यार्थियों ने फिजीकल और मेडिकल टेस्ट पास कर लिया था. लेकिन लिखित परीक्षा में 8 गलत प्रश्न दिए गए थे जिसके क्रम में कई अभ्यार्थी पास होने की दशा में भी फेल हो गए या मेरिट से बाहर हो गए.


पंकज कुमार ने और मतीन राव ने यूपी सरकार की इस तरह की लापरवाही को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 23 दिसंबर 2014 के दिन याचिका दायर की जिसका संख्या क्रमशः 38526/2010 और 38524/2010 है. इनके अलावा पूजा, यशपाल सिंह परिहार आदि कई अभ्यार्थियों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय समय-समय पर याचिका दायर की.


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इन याचिकाओं की सुनवाई की तो 6 गलत प्रश्नों के एवज में 7.50 अंक देकर दुबारा से मैरिट तैयार कर पुनः भर्ती करने के आदेश पारित कर दिए गये थे जिसके बाद पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड, लखनऊ ने इसे खारिज करवा दिया. पुलिस एवं प्रोन्नति बोर्ड ने उच्च न्यायालय को गुमराह कर  और साक्ष्यों को छिपाकर  न्यायालय की प्रथम बैंच के आदेश को खारिज करवा दिया.


एक अन्य अभ्यार्थी मनोज कुमार ने एक स्रोत का उदाहरण दिया- SLP No.- 6547/2014 मामले में दिनांक 18 जुलाई 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने 18 गलत प्रश्नों के पूरे अंक देने का आदेश पारित किया. मनोज कुमार का कहना है कि संविधान में दिए गए समानता का अधिकार के तहत हमें भी यह लाभ मिलना चाहिए.   



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