गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पिछले 6 दिनों में 63 बच्चों की मौत

गोरखपुर। इंसेफेलाइटिस जैसी घातक बिमारी से गोरखपुर को हर साल सामना करना पड़ता है. गोरखपुर में हर साल सैंकड़ों बच्चे और नवजात इस खतरनाक बिमारी से मर जाते हैं. लेकिन यूपी सरकार कभी भी इस बिमारी को समाधान नहीं निकाल पाई है. इस साल भी गोरखपुर के बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में पिछले छह दिनों में 63 बच्चों की मौत हो गई. आज सुबह भी एक बच्चे की मौत हो गई. ये बच्चा इंसेफेलाइटिस से पीड़ित था.

यूपी सरकार ने इस मामले मेजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं. बाल चिकित्सा केंद्र में बच्चों की मौतों के लिए इंफेक्शन और ऑक्सीजन की सप्लाई में दिक्कत को जिम्मेदार ठहराया गया है, लेकिन अस्पताल और जिला प्रशासन ने ऑक्सीजन की कमी को मौत का कारण मानने से इनकार किया है. सीएम ने अपने दो मंत्रियों को भेज मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है.

9 तारीख की आधी रात से लेकर 10 तारीख की आधी रात को 23 मौतें हुईं जिनमें से 14 मौतें नियो नेटल वॉर्ड यानी नवजात शिशुओं को रखने के वॉर्ड में हुई जिसमें प्रीमैच्योर बेबीज रखे जाते हैं. यह भी हैरतअंगेज है कि 10 अगस्त की रात को ऑक्सीजन की सप्लाई खतरनाक रूप से कम हो गई. ऑक्सीजन खत्म होने से अबतक 30 बच्चों की मौत हो चुकी है. इस मामले में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने दो मंत्रियों को मामले की जांच के लिए गोरखपुर भेजा है.

स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह और तकनीकी व चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन वहां पहुंचने वाले हैं. रवानगी से पहले उन्होंने कहा कि मामले की पूरी जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उधर मामले को गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने अस्पताल की सुरक्षा बढ़ा दी है और वहां काफी संख्या में पुलिस के जवानों को तैनात कर दिया गया है.

दो दिन पहले नौ अगस्त की शाम को सीएम योगी आदित्यनाथ मेडिकल कॉलेज का हाल देखकर गये थे. बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी. लिक्विड ऑक्सीजन तो गुरुवार से ही बंद थी और आज सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों ने दो घंटे तक अम्बू बैग का सहारा लिया. वहीं यूपी सरकार का कहना है कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की कमी के कारण किसी रोगी की मौत नहीं हुई है.

हिंदुस्तान के मुताबिक ताज्जुब है कि इतनी बड़े संकट के बावजूद डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा. जबकि मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों का कहना था कि दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी. प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचते तो क्राइसिस मैनेजमेंट आसान हो जाता. बुधवार को ही लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक पूरी तरह से खाली हो गया था. मंगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गए. इसके बाद कालेज में हाहाकार मच गया. बेड पर पड़े मासूम तड़पने लगे. डॉक्टर और तीमारदार एम्बू बैग से ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे. हालांकि उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरने वालों में जुनैद, अब्दुल रहमान, लवकुश, ज्योति, शालू, खुशबू, फ्रूटी, शिवानी और अरूषी शामिल थी.

गुरुवार से शुरू हुआ संकट
बीआरडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति का संकट गुरुवार को तब शुरू हुआ जब लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हो गई. संकट को देखते हुए गुरुवार को दिन भर 90 जंबो सिलेंडरों से ऑक्सीजन की सप्लाई हुई. रात करीब एक बजे यह खेप भी खप गई. जिसके बाद अस्पताल में कोहराम मच गया. साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडरों की खेप लगाई गई. यह सुबह साढ़े सात बजे तक चला.

सुबह फिर मचा कोहराम
वार्ड 100 बेड में भर्ती इंसेफेलाइटिस के 73 में से 54 मरीज वेंटिलेटर पर हैं. सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म फिर खत्म हो गई. जिसके बाद वार्ड 100 बेड में हंगामा शुरू हो गया. एम्बुबैग के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई. तीमारदारों के थक जाते ही डॉक्टर एम्बुबैग से  ऑक्सीजन देने की कोशिश करने लगे. हालांकि उनकी यह कोशिश नाकाफी साबित हुई. इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरने वालों में जुनैद, अब्दुल रहमान, लवकुश, ज्योति, शालू, खुशबू, फ्रूटी, शिवानी और अरूषी शामिल थी.

30 मौतों की जांच हो, आश्रितों को 20-20 लाख दिए जाएं
उत्तर प्रदेश के भूतपूर्व चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री एवं सपा नेता राधेश्याम सिंह ने बीआरडी मेडिकल कॉलेज में दो दिन में 30 मासूमों की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषियों पर मौत की धारा में मुकदमा कायम करने और मृतक आश्रितों को फौरन 20-20 लाख रुपये की मदद करने की प्रदेश सरकार से मांग की है. उन्होंने कहा कि सीएम मेडिकल कॉलेज का जिस दिन दौरा करते हैं, उसके दूसरे ही दिन आक्सीजन की कमी से मासूम तड़प-तड़प कर मरने लगते हैं. यह बताता है कि कॉलेज प्रशासन कितना गैरजिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि इतने गंभीर मामले में लीपापोती नहीं होनी चाहिए. दोषी अधिकारियों को सीधे बर्खास्त किया जाना चाहिए. सपा इस घटना को बहुत गंभीरता से ले रही है. पार्टी पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है. प्रदेश सरकार इन परिवारों को तत्काल 20-20 लाख रुपये की मदद दे.

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