आर-पार की लड़ाई में गुजरात के दलित, आधे दर्जन युवकों ने जहर पिया

गुजरात। गुजरात के उना में दलितों पर जुल्म के बाद आंदोलन तेज हो गया है. ताजा घटनाक्रम में सोमवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान इस मामले में सरकार की उदासीनता के खिलाफ आधे दर्जन से ज्यादा युवकों ने जहर पी लिया. इसके बाद उनको जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है. ऊना में 12 जुलाई को मरे हुए जानवर का चमड़ा उतारने गए चार दलित युवाओं के साथ निर्ममता के साथ मार-पीट की गई थी. इस घटना के बाद ही पूरे प्रदेश में दलित समाज आंदोलित है.

इसी क्रम में पिछले तीन दिनों से चल रहा आंदोलन सोमवार को उग्र रूप में आ गया. इस दिन प्रदेश के अहमदाबाद, राजकोट, गांधी नगर, जूनागढ़, बड़ौदा, पाटण, मेहसाना आदि प्रमुख जिलों में जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन हुआ. दलित दस्तक के गुजरात प्रतिनिधि के मुताबिक राजकोट जिले के गोंडल तहसील में विरोध प्रदर्शन के दौरान पांच युवकों ने जहर खा लिया. उनको सिविल हॉस्पीटल में रेफर किया गया है. दूसरी जगह झामनगर का झाम कंडोड़ना में भी दो लोगों ने आत्महत्या की कोशिश की, उनको राजकोट जिला अस्पताल में भर्ती किया गया है. इन युवाओं का कहना है कि दलितों के साथ हुई इस अमानवीयता पर राज्य सरकार चुप है. वो इंसाफ की मांग कर रहे थे. राजकोट में भी बड़ी संख्या में लोगों ने रैली की है. सुरेन्द्र नगर में दलित समाज के लोगों ने मरे हुए जानवरों को कलेक्टर ऑफिस के पास रख दिया. साथ ही दलितों ने अब मरे हुए को नहीं उठाने की कसम खाई है और धर्म परिवर्तन की भी धमकी दी है. दलित समाज के लोगों का कहना है कि इंसाफ मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा. स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि दलित युवाओं के साथ मारपीट करने वाले चार या छह नहीं बल्कि चालिस लोग थे.

गौरतलब है कि इस मुद्दे पर राज्यसभा में बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी गुजरात सरकार पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने केंद्र सरकार पर भी हमला किया और मांग की कि केंद्र सरकार गुजरात सरकार को जल्द से जल्द दोषियों पर कार्रवाई करने का आदेश दें. इस मामले में वह रोक-टोक करने पर भाजपा नेता वैंकैया नायडू पर भी खूब बरसीं.

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