दलित छात्र की मदद करने पर आदिवासी प्रोफेसर को विश्वविद्यालय ने नौकरी से निकाला

अजमेर। फेडरेशन ऑफ सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष और प्रोफेसर रामलखन मीणा ने आरोप लगाया है कि सेन्ट्रल यूनिवसिर्टी ऑफ राजस्थान में एक दलित छात्र की मदद करने पर उन्हें नौकरी से हटा दिया गया है. मीणा ने बताया कि पिछले तीन साल से वह यूनिवर्सिटी में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं. हाल ही में उन्होंने एक दलित छात्र की मदद की है जिससे नाराज होकर उन्हें सेवाओं से हटा दिया गया जबकि तीन जून 2015 को उनकी सेवाएं पक्की करने के आदेश हो चुके हैं. उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में अनियमितताओं के खिलाफ उन्होंने राष्ट्रपति को भी पत्र लिखा है.

प्रोफेसर ने बताया कि हाल ही में उन्होंने एक दलित छात्र उमेश किशोर जोनवाल की मदद की थी जिसे विश्वविद्यालय ने प्रताड़ित किया और बाद में गैरकानूनी तरीके से निकाल दिया. इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने पर भी दलित छात्र को बकाया स्कॉलरशिप की राशि नहीं दी गई बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ढाई लाख रुपये की छात्रवृत्ति नहीं देने के लिए साढ़े तीन लाख रुपये वकील पर खर्च कर दिए.

प्रोफेसर को निकालने के विरोध में विश्वविद्यालय के दलित छात्रों ने कुलपति का पुतला फूंका. छात्रों ने मीणा की बहाली को लेकर नारेबाजी की और साथ ही छात्रों को स्कॉलरशिप देने के लिए भी आवाज उठाई. छात्रों ने कहा कि अगर विश्वविद्यालय आदिवासी शिक्षक की बहाली नहीं करेगा तो राज्य व्यापी आंदोलन किया जाएगा.

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