ओमपुरी के जाने से एकदम अकेली हो गयी शबाना

Details Published on 08/01/2017 09:34:38 Written by पलाश विश्वास


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ओमपुरी के निधन के बाद शबाना स्तब्ध सी हैं और मीडिया को कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं. 66 साल के ओमपुरी के निधन की खबर से पूरा बॉलीवुड,रंगकर्मी दुनिया अब सन्न हैं.  ओमपुरी का पूरा नाम ओम राजेश पुरी है. वह 66 वर्ष के थे. ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 में हरियाणा के अम्बाला शहर में हुआ था. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने ननिहाल पंजाब के पटियाला से पूरी की. 1976 में पुणे फिल्म संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद ओमपुरी ने लगभग डेढ़ वर्ष तक एक स्टूडियो में अभिनय की शिक्षा दी. बाद में ओमपुरी ने अपने निजी थिएटर ग्रुप \"मजमा\" की स्थापना की. ओम पुरी नये सिनेमा के दौर में सुर्ख़ियों मंं आए थे.


 हाशिमपुरा मलियाना नरसंहार के बाद नई दिल्ली से पैदल चलकर आजमगढ़ की बेटी शबाना आजमी ने राजा बहुगुणा, शमशेर सिंह बिष्ट, शंकरगुहा नियोगी जैसे प्रिय जनों के साथ मेरठ पहुंचकर जनसभा को संबोधित किया था. तब मंच पर शबाना आजमी से संक्षिप्त सी मुलाकात हुई थी. लेकिन ओम पुरी या नसीर या गिरीश कर्नाड, श्याम बेनेगल, गोविंद निलहानी, स्मिता पाटिल, दीप्ति नवल, अमरीश पुरी, नाना पाटेकर जैसे समांतर फिल्मों के कलाकारों से हमारी कोई मुलाकात नहीं हुई. बाबा कारंथ ने युगमंच के साथ काम किया है.


हमारे पसंदीदा हालिया कलाकार इरफान खान और हमारे अजीज दोस्त इदरीस मलिक की तरह ओम पुरी भी एनएसडी से जुड़े हैं. अस्सी के दशक में जब समांतर सिनेमा की यादें एकदम ताजा थीं, शबाना और स्मिता परदे पर थीं, अचानक स्मिता पाटिल के निधन पर गहरा झटका लगा था. उसी के आसपास श्रीदेवी और कमल हसन की बेहतरीन फिल्म सदमा देखने को मिली थी. शबाना अपवाद हैं, जो हर फिल्म में हर किरदार के रंग में रंग जाती हैं. अब भी मशाल उन्हीं हाथों में है.


ओम पुरी हमसे कोई बहुत बड़े नहीं थे उम्र में. सत्तर के दशक से कला फिल्मों से लेकर वाणिज्य फिल्मों, हालीवुड ब्रिटिश फिल्मों में लगातार हम उनके साथ जिंदगी गुजर बसर कर रहे थे और अचानक जिंदगी में उनकी मौत से सन्नाटा पसर गया है.


उनकी जीवनी ''''अनलाइकली हीरो:ओमपुरी'''' के अनुसार 1950 में पंजाब के अम्बाला में जन्मे इस महान कलाकार का शुरुआती जीवन अत्यंत गरीबी में बीता और उनके पिता को दो जून की रोटी कमाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ती थी. ओम पुरी के पूर्व पत्नी नंदिता सी पुरी द्वारा लिखी गई इस किताब में कहा गया है कि टेकचंद (ओमपुरी के पिता) बहुत ही तुनकमिजाज और गुस्सैल स्वभाव के थे और लगभग हर छह महीने में उनकी नौकरी चली जाती थी. उन्हें नई नौकरी ढूंढ़ने में दो महीने लगते थे और फिर छह महीने बाद वह नौकरी भी चली जाती. वे गरीबी के दिन थे जब परिवार को अस्तित्व बनाए रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती.

करीब तीन सौ फिल्मों में काम किया है ओमपुरी ने. इनमें बीस फिल्में हालीवुड की भी हैं. फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से सिनेमा का प्रशिक्षण लेने वाले ओमपुरी ने दर्जनों हिट फिल्मों में काम किया. अर्धसत्य (1982), मिर्च मसाला (1986) समेत कई फिल्मों में उनके अभिनय को बेहद सराहा गया.

अपने एक इंटरव्यूम में ओमपुरी खुद यह दुख जताया था. ओमपुरी ने बताया कि उन्हेंग किसी फिल्मए के लिए एक करोड़ रुपए कभी नहीं मिले. बल्कि 40 से 50 लाख या 10 से 15 लाख रुपए तक ही मेहनताना मिलता है. वो स्टाार हैं मैं नहीं. ओमपुरी ने कहा कि इस उम्र में अब हमारे जैसे उम्रदराज कलाकारों को ध्यान में रखकर रोल नहीं लिखता. ऐसे रोल लिखे भी जाते हैं, तो इसमें स्टाकर लिए जाते हैं.


ओमपुरी ने अपने सिने करियर की शुरूआत वर्ष 1976 में रिलीज फिल्म "घासीराम कोतवाल" से की.विजय तेंदुलकर के मराठी नाटक पर बनी इस फिल्म में ओमपुरी ने घासीराम का किरदार निभाया था. वर्ष 1980 में रिलीज फिल्म “आक्रोश” ओम पुरी के सिने करियर की पहली हिट फिल्म साबित हुई.
 
अमरीश पुरी और ओम पुरी के बाद अब शबाना एकदम अकेली रह गयी हैं.  शबाना आजमी या श्याम बेनेगल या गिरीश कर्नाड नाना पाटेकर को कैसा लग रहा होगा, हम समझ रहे हैं.गौतम घोष और रुद्र प्रसाद सेनगुप्त भी उनके मित्र थे. ओमपुरी का अवसान सांस्कृतिक आंदोलन के कोरे कैनवास को बेपरदा कर गया.

- लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं. जनसत्ता से लंबे समय तक जुड़े रहे हैं।


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