हाथियों की लीद से अनाज निकालकर खाते हैं आदिवासी

Adivasi

कुंजियाम। जब देश में लोगों को पेट भर खाना भी नसीब न हो, तो काहे का देश में विकास और किस तरह का अच्छे दिनों का सपना. इस तरह की बातों में बेईमानी ही बेईमानी दिखती है. ओडिशा के कुंजियाम के लोगों के गमों पर गौर फरमाएंगे तो आप अपना सारा गम भूल जाएंगे.

दरअसल, यहां के लोगों के पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है. पेट की आग को बुझाने के लिए लोग हाथियों की लीद से अनाज निकालकर खाते हैं. सोच कर ही रुह कंपा देनी वाली इस हकीकत से एक दो नहीं बल्कि 100 से ज्यादा परिवार ऐसे हैं जो अपनी भूख को इसी तरह मिटाते हैं.

दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में यहां के लोगों का कहना है कि खाने के लिए इस तरह का जुगाड़ करते हुए इन लोगों को एक दशक से ज्यादा हो गए. हर साल हाथियों के झुंड आते हैं. खेतों को तबाह कर चले जाते हैं. खेतों में लगी खड़ी फसल को खा जाते हैं. लोगों का ये भी कहना है कि सरकार और प्रशासन से इस बात की शिकायत भी की जाती है लेकिन कुछ हल नहीं निकलता है.

वैसे सरकार ने अपनी तरफ से इनका पेट भरने के लिए एक रुपए में एक किलो अनाज देने की योजना चला रखी है. लेकिन सरकार की इस योजना में एक शख्स को ज्यादा से ज्यादा 5 किलो ही अनाज देने का नियम है. ऐसे में एक महीने में 5 किलों अनाज से लोगों का कैसे गुजर बसर होगा. जहां तक सरकार की तरफ से नष्ट हुए फसलों पर मुआवजा देने का सवाल है तो यहां के लोगों का कहना है कि मुआवजा कभी आधा मिलता है और कभी-कभी तो मिलता भी नहीं है. अब सवाल ये है कि सरकार की उन योजनाओं का क्या फायदा जिससे लोगों का पेट ही न भर सके.

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