नीतीश और शरद यादव की जंग में बाजी नीतीश के हाथ

पटना। चुनाव आयोग ने जनता दल यूनाइटेड के बागी नेता शरद यादव द्वारा पार्टी के चुनाव चिन्ह पर किए गए दावे को खारिज कर दिया है. आयोग ने सबूत के अभाव में यादव गुट का दावा खारिज कर दिया है. शरद यादव गुट का दावा खारिज करने की एक वजह यादव के दावे में किसी भी विधायक या सांसद का समर्थन नहीं होना था.

इस बारे में चुनाव आयोग ने पत्र भेजकर शरद यादव को फैसले की जानकारी दे दी है. आयोग ने कहा है कि शरद यादव कैंप की तरफ से दावे को लेकर सांसद या विधायकों के समर्थन का किसी तरह का कोई सबूत या एफिडेविट पेश नहीं किया गया. शरद यादव गुट की ओर से सबसे बड़ी चूक यह हुई है कि बागी गुट की तरफ से जो आवेदन जावेद रज़ा की तरफ से दिया गया था उस पर रज़ा का ही हस्ताक्षर नहीं था. इसके बाद आयोग ने सिंबल ऑर्डर के पैरा 15 के तहत उस आवेदन पर किसी तरह का कोई संज्ञान नहीं लिया.

दरअसल यादव गुट ने पार्टी चिन्ह को लेकर चाहे जितने दावे किए हों, उसे पता था कि उनका दावा खोखला है. क्योंकि यादव गुट चुनाव आयोग के पास तो गया, लेकिन उनके पास कागजात के तौर पर कोई सबूत नहीं था. ऐसे में जब चुनाव आयोग ने उनसे डॉक्यूमेंट्स के तौर पर सबूत मांगा तो उनके सारे दावे धरे के धरे रह गए. शरद गुट के चुनाव आयोग पहुंचने के बाद जनता दल यू के नेता भी चुनाव आयोग गए थे और अपने पक्ष में आयोग को तमाम दस्तावेज दिया था.

वहीं आयोग का फैसला आने पर शरद यादव ने कहा है कि यह एक तरह का संघर्ष और लड़ाई है. हम इसका सामना करने के लिए तैयार हैं.

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