मॉनसून सत्र: किसानों, दलितों के मुद्दों पर विपक्ष ने सरकार को घेरा

नई दिल्ली। संसद में कल मायावती ने राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया था तो मॉनसून सत्र में आज का दिन भी काफी हंगामेदार रहा. किसानों, दलितों के मुद्दे पर कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा किया. हंगामे के बाद लोकसभा में सदन की कार्यवाही दोपहर तक स्थगित कर दी गई.

लोकसभा में हंगामे के बीच बुधवार को कार्यवाही शुरू हुई. विपक्षी दलों की नारेबाजी के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह इसरो की उपलब्धियों की जानकारी देते रहे. एक रॉकेट से 104 सैटलाइट्स की कामयाब लॉन्चिंग का भी जिक्र किया पर सदन ज्यादा देर नहीं चल सका और कार्यवाही को दोपहर तक के लिए स्थगित करना पड़ा.

वहीं, राज्यसभा में सदन की कार्यवाही की शुरुआत सांसदों की सैलरी बढ़ाने की मांग के साथ हुई. कांग्रेस और जेडीयू के नेताओं ने किसानों के मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया. नेताओं ने किसानों की आत्महत्या, न्यूनतम समर्थन मूल्य और मंदसौर में हुई घटना को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की.

जेडीयू नेता शरद यादव ने दाल बाहर से आयात करने का मामला उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना की. वहीं  कांग्रेस के सीनियर नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि 150 से ज्यादा किसान संगठन जंतर-मंतर पर बैठे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की समस्या देशव्यापी है, लेकिन सरकार मौन है. दिग्विजय ने कहा कि किसानों को कीमत के बजाए गोलियां दी जा रही हैं. इंपोर्ट ड्यूटी भ्रष्टाचार का माध्यम बन गया है. उन्होंने रूल 267 के तहत किसानों के मुद्दे पर डिस्कशन की मांग की जिसे उप सभापति ने मान लिया.

जेडीयू नेता अली अनवर ने दलितों पर अत्याचार का मामला भी उठाया. बता दें कि कांग्रेस ने दलितों के मुद्दे पर बुधवार को चर्चा के लिए नोटिस भी दे रखा है पर सरकार इस बारें में कोई चर्चा नहीं चाहती जिसके आसार दिख गये हैं.

 

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