बीजेपी का चाल, चरित्र और चेहरा दोगला व जन-विरोधीः मायावती

लखनऊ। यूपी में आने वाले सभी मण्डल, जिला व विधान सभा यूनिट के सभी प्रमुख बसपा नेता और कार्यकर्ताओं की लखनऊ में बैठक हुई. बैठक में ‘बसपा का सपना, सरकार हो अपना’ के नारे साथ हर तरह से संघर्ष करने की बात हुई.

लखनऊ कार्यालय में आयोजित इस बैठक में बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फीडबैक के आधार पर यह महसूस किया कि भाजपा और आरएसएस जातिवादी और सांप्रदायिक नीतियों से गरीब, दलित, पिछड़ों को सरकारी स्तर पर काफी तिरस्कार झेलना पड़ रहा है. इसके साथ-साथ इन लोगों पर अत्याचार बढ़ गया है.

इन वर्गों का हित एवं सशक्तिकरण हर स्तर पर लगातार प्रभावित हो रहा है. जिससे ’’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’’ का मिशनरी लक्ष्य बुरी तरह से पिछड़ने लगा है, जो देशहित में बड़ी चिंता की बात है. इसके अलावा दलित व अन्य उपेक्षित वर्गों के मन में आज यह सवाल है कि देश में इन वर्गों की अपनी सरकार क्यों नहीं?

भाजपा-आरएसएस द्वारा दलितों और मुस्लमानों को भयभीत करके उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक जैसा जीवन व्यतीत करने को मजबूर करने वाला माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है. जिसके विरूद्ध बसपा का संघर्ष स्वाभाविक है क्योंकि बहुजन समाज के दोनों अभिन्न अंगों के बीच आपसी एकजुटता व भाईचारा उच्च संवैधानिक लक्ष्यों की प्रप्ति हेतु जरूरी है.

इस विशेष बैठक को सम्बोधित करते हुये बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि भाजपा और मोदी सरकार के साम, दाम, दण्ड, भेद आदि अनेकों हथकण्डों के साथ-साथ असंवैधानिक व अलोकतान्त्रिक नीति व व्यवहार के कारण आज देश में हर तरफ भय, आतंक, हिंसा, बेचैनी व एक प्रकार से अफरातफरी जैसा माहौल है.

ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं, बुद्धजीवी व व्यापारी वर्ग के साथ-साथ दलितों, पिछड़ों व मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के प्रति भाजपा सरकार का रवैया लगातार निरंकुश व दमनकारी होता जा रहा है जिससे पूरा देश चिन्तित है. लेकिन इसे महसूस कर आवश्यक सुधार करने के बजाय भाजपा सरकार का अहंकार देश को लगातार त्रासदी की तरफ अग्रसर कर रहा है.

मायावती ने कहा कि बसपा एक राजनीतिक पार्टी के साथ-साथ एक मिशनरी मूवमेन्ट भी है, जो बाबासाहेब डा. अम्बेडकर के कारवां की देश में एक मात्र सशक्त राजनैतिक पार्टी है. इसने अपने राजनीतिक सफर में अबतक काफी उतार-चढ़ाव देखें हैं. बसपा की असलियत यह है कि इसने ना बिकने वाला एक शक्तिशाली समाज बनाया है जो बाबासाहेब डा. अम्बेडकर व मान्यवर कांशीराम की असली इच्छा थी. यही कारण है कि खासकर उत्तर प्रदेश में बसपा ने सत्ता की मास्टर चाबी चार बार अपने हाथ में लेकर अपना उद्धार स्वयं करने के बाबासाहेब के सपने को जमीनी हकीकत में बदलने का काम किया है.

इसी का एक परिणाम यह है कि लगातार बेहतर वोट प्रतिशत प्राप्त करने के बावजूद भी बसपा 2014 के लोकसभा आमचुनाव में कोई सीट नहीं जीत पायी और 2017 के विधान सभा आमचुनाव में अपेक्षा से काफी कम सीटें जीत पायी. यह सब पार्टी की कमजोरी से ज्यादा उन साजिशों का ही परिणाम है जो बसपा व उसके नेतृत्व के खिलाफ लगातार की जा रही है ताकि अम्बेडकरवादी कारवाँ को सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने से दूर रखा जा सके. लेकिन यह स्थिति हमेशा बरकरार रहने वाली नहीं है.

बसपा अध्यक्ष ने कहा कि इन चुनावी नतीजों का ही दुष्परिणाम है कि आज देश व उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में भाजपा एण्ड कम्पनी की संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व जनविरोधी सोच वाली सरकारें हैं और समाज के कमजोर, उपेक्षित व शोषित वर्ग के लोगों पर हर प्रकार की जुल्म-ज्यादती, अन्याय, शोषण, भेदभाव आदि के पहाड़ टूट रहे हैं और इन लोगों की गुलामी, लाचारगी के अंधकार में दोबारा धकेलने का प्रयास लगातार किया जा रहा है तथा इनके खिलाफ लोकतान्त्रिक तरीके से आवाज उठाने पर तानाशाही रवैया अपनाकर इनकी आवाज को संसद तक में कुचला जा रहा है.

इतना ही नहीं बल्कि भाजपा की नफरत की राजनीति अब इतनी ज्यादा कट्टरवादी व द्वेषपूर्ण हो गयी है कि विरोधी पार्टी के नेताओं के खिलाफ जानलेवा हमले भी करवाये जा रहे हैं, यह सब लोकतंत्र के लिये शुभ लक्षण कतई नहीं है जिसके विरूद्ध लोगों को सचेत व संगठित करना बहुत जरूरी है. इस प्रकार की अक्रामकता व अराजकता इसलिये जारी है क्योंकि बीजेपी सरकारें इन्हें शह व संरक्षण दे रही है.

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