जानिए कांशीराम पर फिल्म बनाने वाले युवक की कहानी

Details Published on 08/08/2016 12:42:07 Written by Ashok Das


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24 साल के अर्जुन ने जब कांशीराम जी पर फिल्म बनाने को लेकर लोगों से मिलना शुरू किया तो कोई इस युवा पर भरोसा करने को तैयार नहीं था. इसकी वजह भी जायज थी. अर्जुन के पास न तो पैसे थे और ना ही वो कोई बड़े फिल्म मेकर थे, जिन पर लोग दांव लगाते. लेकिन अर्जुन को खुद पर भरोसा था. उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. मां ने बेटे पर भरोसा कर जमीन बेंच दी, पत्नी ने गहने बेच दिए और अर्जुन ने भी इस मिशन को पूरा करने में अपनी पूरी जान लगा दी. आखिर में अर्जुन के हौंसले की जीत हुई और वो “द ग्रेट लीडर कांशीराम” नाम से फिल्म बनाने में कामयाब हो गए हैं. आने वाले 9 अक्टूबर को यह फिल्म रिलिज होगी. इसी के प्रोमोशन के सिलसिले में अर्जुन दिल्ली स्थित ‘दलित दस्तक’ के कार्यालय में पहुंचे, जहां संपादक अशोक दास ने उनसे बातचीत की.

 



फिल्म के क्षेत्र में रुझान कैसे हुआ?

- इस क्षेत्र में बचपन से रुझान था. मेरी कोई प्रॉपर ट्रेनिंग नहीं हुई लेकिन फिल्मों को देखने का मेरा नजरिया अलग था. मैं हमेशा फिल्मों को मेकिंग के नजरिए से देखा करता था. इसी रुझान की वजह से सन् 2012 में मुंबई गया. वहां एक मित्र के जरिए विजय सोलंकी (डायरेक्टर) से मिला. फिर पंचमढ़ी में फिल्म ‘चक्रव्यूह’ के लिए प्रकाश झा की टीम में काम किया. वहां से लौटने के बाद मैंने एक डाक्यूमेंटरी ‘अत्याचार’ बनाई. यह एक घंटे की थी. विषय था कि सरपंच गरीबों का शोषण कैसे करता है. इसे मैंने अपने शहर ग्वालियर में लोगों को दिखाया. दर्शकों का काफी बेहतर रेस्पांस मिला. मैंने कुछ पंजाबी एल्बम भी शूट किया.

 

कांशीराम के मुद्दे पर फिल्म बनाने का ख्याल क्यों आया?

- मैंने बामसेफ के कैडर को नजदीक से देखा है. तब मान्यवर साहेब के बारे में जानकर उनसे काफी प्रभावित हुआ. जब इस फिल्ड में आया तो सोचा कि मुझे कांशीराम साहब पर फिल्म बनानी है. 2013 में तय कर लिया. पूरे साल फिल्म की स्क्रिप्ट पर काम किया. स्क्रिप्ट लिखने में इसमें मेरे साथ डॉ. एम.आर रायपुरिया भी रहे. उन्होंने मान्यवर पर पी.एचडी की है. 2014 में राजू भारती (सिंगर) से भोपाल में मुलाकात हुई. इनको पहले से सुना हुआ था सो उनसे गाने की लिरिक्स लिखने का अनुरोध किया. फिल्म अक्टूबर 2015 में फाइनल हो चुकी है. इसे सेंसर बोर्ड को जनवरी, 2016 में भेज दिया है.

 




फिल्म के बारे में बताइए

- फिल्म एक घंटे 45 मिनट की है. इसमें कांशीराम जी के बचपन से लेकर 1984 तक के जीवन को दिखाया गया है. इसमें दो गाने हैं. 50 मुख्य कैरेक्टर हैं. कांशीराम जी की भूमिका राघवेन्द्र सिंह राठौर ने निभाई है. वो एनएसडी के पूर्व छात्र हैं और फिलहाल थियेटर और टीवी कर रहे हैं. कांशीराम जी के बचपन का कैरेक्टर मास्टर अरूण मौर्य कर रहे हैं. मायावती जी का कैरेक्टर सोमा गोयल (थियेटर आर्टिस्ट), दीनाभाना का कैरेक्टर (महेश यादव), मनोहर आटे (साहब के रूम पार्टनर थे मुंबई में) का कैरेक्टर राज ने किया है. प्रोडेक्शन हेड धर्मेन्द्र बघेल हैं और सिंगर राजू भारती हैं.

 

फिल्म बनाने के समय क्या चुनौती थी?

- फिल्म प्लान करने के बाद बुद्धीजिवियों और पार्टी (बसपा) के लोगों के पास गया तो लोगों ने मुझे हल्के में लिया. किसी ने मुझ पर भरोसा नहीं किया. तब रायपुरिया जी इकलौते थे जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया. उन्होंने मुझे हर तरह से मदद भी की. मैं उनसे मिलने सायकिल से उनके घर पहुंचा था. मैंने उन्हें प्लान बताया तो उन्होंने कहा कि कैसे करोगे, तुम तो साइकिल से आए हो. उनका इशारा फिल्म में आने वाली लागत से था. मैंने कहा कि मान्यवर कांशीराम जी ने भी शुरुआत साइकिल से ही की थी. मेरे इस जवाब को सुनकर वह बेहद खुश हुए और फिल्म की स्क्रिप्ट लिखने को राजी हो गए.

उन्होंने मुझे कांशीराम जी के घरवालों से मिलने का सुझाव दिया. मैं मान्यवर के घर रोपड़, पंजाब खवासपुर गया और उनके घरवालों से परमिशन ली. तब मुझे एक प्रोडक्शन हाउस बनाना था. मैं मुंबई गया. वहां फिल्म प्रोड्क्शन हाउस का रजिस्ट्रेशन करवाया. यह मैंने बाबासाहेब के नाम पर ‘बाबा फिल्म मेकर’ करवाया. वहां से लौटने के बाद ऑडिशन किए. कलाकारों का चुनाव करने के बाद उन्हें फिल्म के कैरेक्टर के हिसाब से ट्रेंड किया. जिस पात्र के लिए जो कैरेक्टर अच्छा लगा, उसे कास्ट करता गया.

 

बजट का इंतजाम कैसे हुआ?

- मेरा बजट 20 लाख रुपये का था. स्टोरी लिखने के बाद उसे लेकर लोगों के पास गया. तब लोगों को विश्वास होने लगा. कुछ नेताओं से भी मिला. उन्होंने कहा कि बजट बढ़ाओ अच्छे से करेंगे. लेकिन अचानक नेताओं ने हाथ खींच लिया. स्थिति यह आ गई कि फिल्म रोक दी जाए. मेरे पिताजी नहीं हैं. मैंने अपनी मां से बात की. उन्होंने मुझपर भरोसा किया. इस तरह मैंने जमीन बेच कर 25 लाख रुपये जुटाए. मैं ग्वालियर संभाग के बामसेफ के लोगों से मिला जिन्होंने मुझे 3 लाख रुपये का सपोर्ट किया. बजट बढ़ता जा रहा था. तब मैंने फिल्म का ट्रेलर बनाकर स्पांसर और को-प्रोड्यूसर बनाना शुरू कर दिया. अनिल बजाज, धर्मेन्द्र राठौड़ एसोसिएट प्रोड्यूसर विनोद कुमार सेवरिया को-प्रोड्यूसर के रूप में जुड़े. हालांकि दिक्कतें खत्म नहीं हो रही थी. तब मुझे अपनी पत्नी अर्चना सिंह मौर्य ने बहुत सपोर्ट किया. उसने अपने सारे गहने बेचकर मुझे डेढ़ लाख रुपये दिए. 35 लाख रुपये में पूरी फिल्म बन चुकी है. प्रोमोशन के लिए हमने 15 लाख का बजट रखा है. हम चाहते हैं कि यह फिल्म मायावती जी को दिखाएं.

 

फिल्म रिलिज कब होगी?

- अगर सेंसर से फिल्म जल्दी मिल जाती है तो हम इस फिल्म को 9 अक्टूबर को रिलिज करेंगे. दर्शकों से अच्छा रेस्पांस मिला तो हम इस फिल्म का पार्ट-टू बनाएंगे.


  • Comments(24)  


    धूप लाल

    आप एक इतिहास तैयार कर रहे है। आने वाला समय आप को याद करेगा। आगे बढ़े हम सब का आशीर्वाद आप के साथ है। जय भीम।।


    मास्टर बादल सिंह बौद्ध

    बहुत अच्छी पहल है मान्यवर के कार्यों को हमेशा तक प्रेरणा के रूप में आगामी पीढ़ीयाँ लाभान्वित होगें सधन्यवाद माननीय अर्जुन साहब


    DEEP CHAND

    Dear Sir, Your effort will be a achievement for the Bahujan .


    R K Rajesh

    good keep it up.....one day you will a great Director........


    मास्टर बादल सिंह बौद्ध

    बहुत अच्छी पहल है मान्यवर के कार्यों को हमेशा तक प्रेरणा के रूप में आगामी पीढ़ीयाँ लाभान्वित होगें सधन्यवाद माननीय अर्जुन साहब


    raju lal bairwa

    very nice sir bahut badiya aap ke hosle ko salam.hume ummid film acchi cahlegi


    Rakesh Kumar

    Apka chattan sa adig vishwas aur dridh ichchha shakti , Poore Anrya bahujan samaj ko Chunautiyon se ladne ki prerna dega , aap swayam ek Itihas Purush Ban Chuke hain , Jai Bhim Jai Bharat . You are the Great.


    Shalik r goutam

    मान्यवर अर्जुन जी आप ने बहुत काम कर रहें हैं हमारे परिवार एवं ग्रामवासी के तरफ से आप को तथा आप की पूरी कार्यकर्ता को ढेर सारी बधाईयाँ Shalik r goutam


    Pushpendra kumar

    श्रीमानजी,आपने जो किया ,वो बहुत ही काबिले तारीफ है।आप इस फिलम को बनाने के बाद ,हमेशा हमारे बहुजन के दिलो मे राज करोगे। जय भीम


    Subhash Chandra

    Dear Arjun Ji, Jai Bhim, Aap ki is agni pariksha se lakho dalit logo ko inspration milegi.


    चंद्रिका प्रसाद

    अर्जुन भाई आप मुसीबतों से न हारने वाले चट्टान की तरह अडिग रहें तथा आगे बढ़ें। यह गूंगा बहरा समाज आप को पहचानेगा एक दिन। आप कोई ऐसा तरीका अपनायें कि फिल्म का ज्यादा से ज्यादा प्रचार प्रसार हो सके। आप को ढेर सारी शुभकामनाएँ। जय भीम नमो बुद्धाय। चंद्रिका प्रसाद


    Surinderpaul

    Arjun Ji time will come and you will become a great director as you are making film on a great person of India


    J sondhi

    pls send me ph no arjun


    Harsh

    We will definitely watch movie in theatre. Thanks for making the film.


    Rambaboo

    Thanks congratulations


    Rajesh singh

    Zabardast shaandaar zindabad


    v p chandan

    aap ke kam kawile-tariph h.me es film ka telar dekha kaphi achha tha.mughe es film ka besabri se intjar rahega... aap achhe kam kar rahe h.aager badlaw lana h to es tarah ka film aaur bhi banna chahie...jay bhim


    Tarbabugautam

    Very good brother Namo buddhay Jay bhim Jay kanshiram ji Jay Bahen kumari mayavati ji Jay may all film producer


    Rajesh Gautam

    My brother very very thank you.Aap ne Jo kary kiya hai wah kary es morden time me koi nahi kar saka,aap ne en rajnetao se es sambandh me bhikh kyo magne ki eksha ki, hum hamara bahujan samaj es mamle me chanda all world se aap ke account me send karta, bahujan samaj bhale hi ek ek rupya deta ,to bhi karoro me aap ke pass hota, aap ne es sambandh me bahujan samaj ko koie suchna Kabhi Di.rajneta aap hi bahujan sammaj ko hi bhul gaye hai. Vote ke samay yaad bahujno ki aati hai. All india me sirf bahujano ki ek hi neta hai jis ka naam hai iron ledy bahin mayawati( BSP), Kabhi aap ne bahin ji se es sambandh me batt chit ki, ager aap Na mil sako to mai aap ko Bahin Mayawati ji se milbauga mera no.8982291472 per awasay sampark karna


    Ashok kumar

    बहुत बढ़िया साथियो अपने साहब पर फ़िल्म बनाकर साबित कर दिया की दलित भी किसी से कम नहीं। आप एक माहांन इंसान हो सर आपको लाख लाख बार जय भीम


    Chandrabhan Vindravan Sudhariya

    Mai v badna chahta hun ...mai singing krta hu mai chahta hu aap k liye singing ke jariye chaar chand laga saku..


    H. Bharti

    I am very happy with that you have done good job despite in critical situation.


    sonu Sagar

    jay bheem bhai khoob mehnat karo baba saheb ki kirpa se apko aapji manjil mil jay


    Dharmendra

    Very Nice Sir, Thanks. ess movie sey humey apna etihaas yaad aa jaeyga.


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