जब बसपा के एक दिग्गज नेता पार्टी छोड़ गए तो कांशीराम जी ने कहा…

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Kanshiram

बहुजन समाज पार्टी के लिए पिछले कुछ साल ठीक नहीं रहे हैं. उसे पहले लोकसभा चुनाव में हार मिली, फिर उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी जीत नहीं सकी. पार्टी से जुड़े कुछ पुराने नेता भी पार्टी छोड़ कर चले गए. उन्होंने बसपा पर तमाम आरोप भी लगाएं. पार्टी छोड़ कर गए नेता बसपा में रहने के दौरान अम्बेडकरवाद की कसमें खाते थे और खुद को मान्यवर कांशीराम का अनुयायी बताते थे.

लेकिन जब वो बहुजन समाज पार्टी को छोड़कर दूसरे दलों में चले गए तो उनका चोला ही बदल चुका है.

बात करते हैं बहुजन नायक मान्यवर कांशीराम से जुड़े एक और किस्से की. और आपको बताते हैं कि जब कांशीराम जी के समय में कोई नेता पार्टी छोड़ जाता था तो मान्यवर क्या कहते थे?

बात उन दिनों की है, जब मान्यवर कांशीराम बहुजन समाज पार्टी को देश भर में बढ़ाने में लगे हुए थे. उस दौरान एक बार एक बड़ा आदिवासी चेहरा अरविन्द नेताम पार्टी से अलग हो गए. नेताम बसपा छोड़कर कांग्रेस में चले गए. आमतौर पर किसी बड़े चेहरे के पार्टी से अलग हो जाने के बाद कुछ दिनों तक पार्टी में हलचल रहती है. लेकिन नेताम के कांग्रेस से अलग हो जाने के बावजूद भी कांशीराम जी को कोई फर्क नहीं पड़ा. पार्टी में भी सबकुछ सामान्य तौर पर चलता रहा. पत्रकार जो इसे मुद्दा बनाने में लगे थे, उन्हें बड़ी निराशा हुई. उन्हें चटपटी खबरें बनाने को नहीं मिल रही थी, क्योंकि कांशीराम जी उस नेता पर कोई भड़ास नहीं निकाल रहे थे.

पत्रकारों से नहीं रहा गया. कांशीराम जी से पत्रकारों ने पूछा- साहब आपकी पार्टी का दिग्गज नेता पार्टी छोड़कर चला गया, लेकिन आपको चिंता ही नहीं है. आप उसको मना क्यों नहीं लेते? साहब ने जवाब में कहा- भाई पहली बात तो वो माना हुआ होता तो पार्टी छोड़ता ही नहीं. दूसरी बात अब आप लोगों ने उसको दिग्गज़ बना दिया तो अब उसको मनाने की रेट भी दिग्गज़ हो गयी है जो कि मेरे पास है नहीं. इसीलिए मैं इसके जाने की विदाई पार्टी देता हूं ताकि किसी दूसरी पार्टी में रहकर मेरी सिखाई बातों पर थोड़ा बहुत तो अमल करेगा. वो भी मेरे मिशन का ही हिस्सा है.

कांशीराम जी ने कहा कि बसपा में किसी को लालची रस्सी से बांधकर नहीं रखा जाता और ना ही किसी नेता को नोट की कोर दिखाकर बुलाया जाता है. इसीलिए जिस किसी को बसपा समझ में आये वो यहां काम करे. यहां आने जाने वालों के लिए दरवाज़े हमेशा खुले रहते हैं.

असल में कांशीराम हमेशा इस बात पर जोर देते थे कि बहुजन समाज पार्टी एक मिशन है और मिशन में किसी को जबरदस्ती बांध कर नहीं रखा जा सकता. बहुजन समाज पार्टी के बनने से लेकर अब तक तमाम नेता पार्टी छोड़ कर गए तमाम नेताओं को निकाल दिया गया, लेकिन यह राजनैतिक आंदोलन आज भी चल रहा है. क्योंकि मान्यवर कांशीराम ने बहुजन समाज पार्टी को ऐसे तैयार किया था कि इसमें बहुजन समाज हमेशा सबसे ऊपर रहे.

शायद यही वजह है कि नेता बदलते रहते हैं और राजनैतिक दल चलता रहता है. मान्यवर कांशीराम यह भी कहा करते थे कि कोई किसी को नेता बना नहीं सकता, नेता खुद अपनी प्रतिभा से सामने आता है.

अशोक दास

अशोक दास

बुद्ध भूमि बिहार के छपरा जिले का मूलनिवासी हूं।गोपालगंज कॉलेज से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक (आनर्स) करने के बाद सन् 2005-06 में देश के सर्वोच्च मीडिया संस्थान ‘भारतीय जनसंचार संस्थान, जेएनयू कैंपस दिल्ली’ (IIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा। 2006 से मीडिया में सक्रिय। लोकमत, अमर उजाला, भड़ास4मीडिया और देशोन्नति (नागपुर) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। पांच साल तक कांग्रेस, भाजपा सहित तमाम राजनीतिक दलों, विभिन्न मंत्रालयों और पार्लियामेंट की रिपोर्टिंग की।
'दलित दस्तक' मासिक पत्रिका के संस्थापक एवं संपादक। मई 2012 से लगातार पत्रिका का प्रकाशन। जून 2017 से दलित दस्तक के वेब चैनल (www.youtube.com/c/dalitdastak) की शुरुआत।
अशोक दास

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