हिमाचल में शराब बांट रही थी भाजपा, पत्रकार ने कैमरे में कैद किया तो भाजपाईयों ने जम कर पीटा

हिमाचल प्रदेश

हिमाचल प्रदेश में चुनाव हो चुका है. रिजल्ट भी तय तारीख पर निकल जाएगा. लेकिन इस दौरान वहां एक पत्रकार के साथ जो भी हुआ, वह लोकतंत्र के मुंह पर तमाचा है. हिमाचल का चुनाव कवर करने गए एक पत्रकार के साथ भाजपा कार्यकर्ताओं ने जो किया, उसने एक बार फिर पार्टी विद डिफरेंट की हकीकत खोल कर रख दी है. पत्रकार से खुद सुनिए उसकी कहानी…

शायद मैं हिमाचल अब कभी न जाऊं…
हम और हमारी टीम लगातार पिछलें एक महीने से डीपीआर से आज्ञा लेकर चुनावी कवरेज पर थे. सब कुछ अच्छा जा रहा था हिमाचल को बेहद करीब से देखा, जैसा सुना वैसा लगा भी. पर शायद मैं किसी भ्रम में ही था, या शायद कोई बुरा सपना जो परसों रात टूट गया.

हम पौंटा साहिब में राहुल की रैली कवर कर के नाहन के लिए निकलें क्योंकि वहां सीएम राजा वीरभद्र की रैली थी. बहुत अच्छा जा रहा था और हम निकलने वाले थे कि स्थानीय लोगों से पता चला यहां रात को शराब बंटती हैं. एक गजब की स्टोरी हमारे सामने थी और हमने सुबह से उस स्टोरी पर काम करना शुरू भी कर दिया था.

चूंकि हम बाहरी थे तो हमारे चैनल को वहां के रिपोर्टर का साथ चाहिए था, जो कि मिला भी. दिन में मैं हरियाणा के कुछ मंत्री और एमएलए से मिला, जिनकी मैंने बाईट भी ली. चुनावी माहौल पर चर्चा भी की. पर हमें वहां कुछ ऐसा नहीं लगा जो सूत्रों से पता लगता.

मेरे जीवन की सबसे काली रात में से एक थी 7 नवम्बर की रात. शाम 5 बजे तक प्रचार थमने वाला था, जैसे शाम हुई वाकई सरेआम चुनाव आचार संहिता की धज्जियां उड़ाई जा रही थी. भाजपा कार्यालय में शराब का बांटी जा रही थी. ग्रामीणों को एक पर्ची दी जा रही थी जो किसी निजी होटल में दिखा शराब लें सकतें थे.

मैं और मेरे सर चंद्र मौली शर्मा ने जैसे पूरा माहौल देखा और कुछ हिला देने वाले विजुअल हमारे हाथ लगें तो हम भी हिल गयें कि शराब की इतनी खेप.

हमारे हाथ इतना मैटिरियल लग चुका था की हम चैनल पर चला सकें. उसके साथ हमें नाहन से भाजपा प्रत्याशी का पक्ष भी जानना था तो हमने स्थानीय पत्रकार को कॉल की, पर उस समय वो बाहर थे तो हमने भाजपा के मीडिया सलाहकार से समय मांगा की एक बाईट चाहिए तो भाजपा प्रत्याशी ने हमारी टीम को ऑफिस में बाईट लेने का समय दिया. जैसे ही हमने बिंदल जी को बाहर ही पार्टी के ऑफिस के बाहर बाईट लेनी चाही और बताया की आपके यहां के कुछ दृश्य भी हाथ लगें हैं तो भाजपा प्रत्याशी वहां से निकल पड़े और उनके जाने के करीब 2-3 मिनट बाद सभी पार्टी कार्यकर्ता हम पर टूट पड़े.

#Mob_lynching को आज तक सिर्फ टीवी पर देखा था. शिकार पहली बार हुए थे. जैसे ही हमारे साथ छीना-झपटी हुई तो उन्होंने सबसे पहले मेरा कैमरा छीना और मुझे अंदर खिंचने लगे. जैसे ही मेरे सर चंद्र मौली जी बीच बचाव को आयें तो उनको वे भाजपा कार्यालय में ले जा रहें थे, तभी सर ने कहा भाग और SP को फोन करो… मैंने जैसे फोन किया पुलिस 1 घंटे बाद आकर उल्टा हमें ही थाने ले जाती है.

गुन्नूघाट (नाहन) के थाना प्रभारी युद्धवीर सिंह थाने ले जाकर कहते हैं, “तुम साले पत्रकार हो जुत्ती खाने लायक” और भी न जानें क्या-क्या कहा.. मेडिकल में जान बुझ कर रात से अगले दिन की शाम करना, ताकि बिना मेडिकल के बात रुक जाये..

सहन बहुत किया पर कुछ स्थानीय पत्रकारों की वज़ह से बहुत सहायता हुई. सर का फोन नही था सिर्फ मेरा फोन था. किस-किस प्रकार का दबाव झेला, एफआईआर वापिस लेने के लिए फोन पर फोन… मैं टूट चुका था, पर सर की हिम्मत से संघी और भाजपा के गुंडों से लड़ाई जारी है… जो सहा सब लिखना चाहता हूं पर हिम्मत नहीं है अब…

गौरव सगवाल की फेसबुक वॉल से साभार

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