राजस्थानः मनु की मूर्ति की रक्षा के लिए फोर्स तैनात

Details Published on 04/01/2017 14:25:48 Written by Dalit Dastak


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जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर के कैंपस में स्थित मनु की मूर्ति को हटाने की मांग को लेकर राज्य में 28 साल बाद एक बार फिर से बवाल शुरु हो गया है. राज्य के महिला और दलित संगठनों ने मनु की प्रतिमा को हाईकोर्ट से हटाने के लिए राज्यभर में आंदोलन का ऐलान कर दिया है. इससे डरे ‘मनुभक्तों’ ने हाईकोर्ट में मनु की प्रतिमा के बाहर भारी फोर्स को तैनात कर दिया है. मनु की मूर्ति को मिट्टी में मिला देने के लिए दलित संगठन इस कदर आतुर हैं कि उससे डरे मनुभक्तों ने प्रतिमा की सुरक्षा में दो सौ से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं.


 दलित संगठन भी हार मानने को तैयार नहीं हैं. राज्य के 20 से ज्यादा दलित और महिला संगठनों ने ऐलान किया है कि हाईकोर्ट जयपुर के अंदर लगे इस मनु की प्रतिमा को हटाने के लिए राज्यभर में आंदोलन शुरू किया जाए. इनका कहना है कि जिस मनु ने महिला और जाति व्यवस्था के बारे में आपत्तिजनक बातें कही हैं, उसकी प्रतिमा की छाया में हाईकोर्ट निष्पक्ष फैसले कैसे दे सकता है.


गौरतलब है कि मनु की इस प्रतिमा को हटाने को लेकर पिछले 28 सालों से राजस्थान हाईकोर्ट में मामला चल रहा है लेकिन किसी ने भी इस मामले को देखने की इमानदार कोशिश अब तक नहीं की है. इसी वजह से अभी तक कोई भी सुनवाई ठीक से नहीं हो पा रही है. सामाजिक कार्यकर्ता कविता श्रीवास्तव का कहना है इस मामले को 28 साल से जानबूझकर कोर्ट में टाला जा रहा है. हम मांग करते हैं कि जो फैसला लेना है कोर्ट उसे जल्दी ले ताकि या तो मनु की प्रतिमा हटे या फिर हम सुप्रीम कोर्ट जाएं.


दरअसल, 1989 में न्यायिक सेवा संगठन के अध्यक्ष पदम कुमार जैन ने राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एमएम कासलीवाल की इजाजत से मनु की इस बड़ी प्रतिमा को लगवाया था. तब राज्यभर में हंगामा मचा और राजस्थान हाईकोर्ट कोर्ट संपूर्ण प्रशासनिक पीठ ने इसे हटाने के लिए रजिस्ट्रार के माध्यम से न्यायिक सेवा संगठन को कहा. लेकिन तब हाईकोर्ट में स्टे की याचिका लगा दी गई. दलील दिया गया कि एक बार स्थापित मूर्ति हटाई नहीं जा सकती. तब से लेकर आज तक केवल दो बार मामले की सुनवाई हुई है. जब भी सुनवाई होती है कोर्ट परिसर में टकराव का वातावरण बन जाता है और मामला बंद कर दिया जाता है. सभी महिला और दलित संगठनों ने राजस्थान के चीफ जस्टिस से मिलने का भी समय मांगा है.



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