धर्म के नाम पर वोट मांगने को सुप्रीम कोर्ट ने कहा गैरकानूनी

Details Published on 02/01/2017 12:39:52 Written by Dalit Dastak


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नई दिल्लीा। सुप्रीम कोर्ट की सात जजों की एक पीठ ने धर्म, जाति, समुदाय और भाषा के नाम पर वोट मांगने को गैरकानूनी ठहरा दिया है. पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव एक धर्मनिरपेक्ष पद्धति है और इस आधार पर वोट मांगना संविधान की भावना के खिलाफ है. शीर्ष न्यायालय ने यह भी अपील किया कि जन प्रतिनिधियों को भी अपने कामकाज धर्मनिरपेक्ष आधार पर ही करने चाहिए. आने वाले पांच राज्योंो में इसका असर होने की संभावना है.

सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में एक याचिका दाखिल की गई थी, इसके तहत सवाल उठाया गया था कि धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगना जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत करप्ट प्रैक्टिस है या नहीं. जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा-123 (3) के तहत \''''उसके\'''' धर्म की बात है और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को व्यावख्यार करनी थी कि \''''उसके\'''' धर्म का दायरा क्या है? प्रत्याशी का या उसके एजेंट का भी. इसके बाद कोर्ट ने यह फैसला सुनाया. इससे पहले पिछले 6 दिनों में लगातार मामले की सुनवाई हुई और इस मामले में सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान, अरविंद दत्तार, कपिल सिब्बल, सलमान खुर्शीद और इंदिरा जय सिंह आदि ने तमाम दलीलें पेश की. तमाम राजनीतिक दलों ने कोर्ट के इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रिया व्यक्त की है.



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