मैला ढोने वाली 44 दलित महिलाएं दिल्ली में करेंगी मंत्रोच्चार

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अलवर। अलवर में कभी मैला ढोने की कुप्रथा से जुड़ी दलित महिलाएं अब वेद मंत्रों का उच्चारण कर धार्मिक अनुष्ठान भी करवाएंगी. डेढ़ साल के अभ्यास के बाद अब अलवर की दलित महिलाएं बुधवार को दिल्ली में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में मंत्रोच्चार करेंगी. इस कार्यक्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शरीक होंगे.

अलवर में सुलभ इंटरनेशनल स्कूल ऑफ सोशल चेंज यू नॉन वायलेंस कार्यक्रम में नई दिशा संस्था से जुड़ी करीब 44 महिलाएं बुधवार को दिल्ली जाकर वेद मंत्रों का उच्चारण कर कार्यक्रम को शुरू करवाएंगी.

नई दिशा संस्था से जुड़ी नीतू अरोड़ा ने बताया कि यह कार्यक्रम दिल्ली में बुधवार (12 जुलाई) को सुबह साढ़े 10 बजे रफी मार्ग स्थित मावलंकर ऑडिटोरियम में होगा. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत मुख्य अथिति होंगे. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास भारत के अध्यक्ष बलदेव भाई शर्मा मुख्य रूप से इस कार्यक्रम में होंगे और इस कार्यक्रम में ही अलवर में कभी मैला ढोने वाली प्रथा से जुड़ी महिलाएं वेद श्लोकों को स्वस्वर सुनाएंगी.

इस अवसर पर सुलभ इंटरनेशनल के संचालक डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक द्वारा लिखित पुस्तक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया जाएगा. यह पुस्तक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन पर आधारित है.

न्यूज 18 के मुताबिक नई दिशा की कोऑर्डिनेटर नीतू अरोड़ा ने बताया कि 44 महिलाएं मंगलवार को दोपहर बाद 4 बजे दिल्ली के लिए रवाना होंगी. इन महिलाओं के साथ इनके जिजमान भी जाएंगे. जिजमान का मतलब कि जिन परिवारों में यह मैला ढोने का काम करती थीं. इन महिलाओं को दिल्ली व बनारस के विद्वानों ने चार माह का प्रशिक्षण दिया है. इनमें अधिकतर महिलाएं न तो कभी स्कूल गईं न कभी किताब उठाई, लेकिन समारोह के लिए इन महिलाओं ने नियमित अभ्यास किया. इस संस्था में रहकर स्वरोजगार का काम कर रही हैं.

ललिता नंदा ने बताया की जब 2003 में इस संस्था से जुड़े थे. उससे पहले हम मैला ढोने का काम करते थे. धीरे-धीरे इस प्रथा को खत्म किया और आज हम देश-विदेश में होकर आए हैं और नए अनुभव लिए हैं. यहां की महिलाओं ने अमेरिका के न्यूयार्क में जाकर नामी मॉडल्स के साथ कैटवॉक भी किया है. उन्होंने बताया कि जब हम मैला ढोने का काम करते थे तो हमें इस काम से घृणा आती थी, लेकिन पेट पालने के लिए हमें यह काम करना पड़ता था और हमारा स्वास्थ्य भी खराब रहता था. जब से हमने यह काम बंद किया है तब से हम सुखी जीवन व्यतीत कर रही हैं.

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