कूड़ा बीनने वाले बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं दलित छात्र

कानपुर। कूड़ा बीनकर दो वक्त की रोटी के जुगाड़ में जो बच्चे दिनभर सड़कों पर मारे-मारे फिरते थे, आज वे हिंदी, अंग्रेजी और गणित की पढ़ाई कर रहे हैं. कभी अक्षर ज्ञान इन बच्चों के लिए एक सपना था. उत्तर प्रदेश वस्त्र प्रौधोगिकी संस्थान (यूपीटीटीआई) के दलित छात्रों ने कानपुर की गली-गली बनी झुग्गी झोपड़ियों में जाकर इन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित किया. ईदगाह के समीप कूड़े की बोरियों से भरी एक गली में ये छात्र स्कूल चला रहे हैं. इस स्कूल में सौ से अधिक बच्चे यहां शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य संवार रहे हैं.

यूपीटीटीआई के दलित छात्रों ने लगभग दो साल पहले इन बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला शुरू किया था. तब उनके पास न तो कमरा था और न ही संसाधन. जब वे झुग्गी झोपड़ी में जाकर इन बच्चों के माता-पिता से मिलकर उन्हें पढ़ाने के लिए कहते तो उनका जवाब ना होता था. धीरे-धीरे छह बच्चों के साथ इंस्टीट्यूट के उन्मूलन समूह के छात्रों ने इस स्कूल की शुरूआत की. इसके बाद दूसरे बच्चों के माता-पिता भी अपने बच्चों को भेजने लगे.

बच्चों को पढ़ाने के लिए जगह का इंतजाम एएनडी डिग्री कॉलेज की काजल के सहयोग से हुआ. यूपीटीटीआई के टेक्सटाइल केमिस्ट्री के छात्र आशीष कुमार ने बताया कि वर्तमान समय में यहां पर 15 छात्र, छात्राएं इन बच्चों को अपना समय निकालकर पढ़ा रहे हैं. रोजाना दोपहर में दो से साढ़े चार बजे तक उन्हें पढ़ाया जाता है.

यूपीटीटीआई के छात्र निर्भय सिंह खरवार ने बताया कि लगभग दो साल पहले इस स्कूल की नींव पड़ी थी. शुरूआत में बहुत परेशानी हुई. कई माता-पिता अपने बच्चों को यहां नहीं भेजते थे. घर-घर जाकर उन्हें जब शिक्षा का महत्व बताया गया तब उन्होंने अपने बच्चों को भेजना शुरू किया.

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