मायावती के समर्थन में सड़कों पर उतरा दलित संगठन

kodarama

कोडरमा। कोडरामा जिले के झुमरीतिलैया में मायावती के समर्थन में विरोध मार्च निकाला गया. इस विरोध मार्च में लोगों ने केद्र सरकार की अलाचोना की और मायावती के समर्थन में नारे बाजी की.

बसपा प्रमुख मायावती को राज्यसभा में बोलने से रोकने के विरोध में दलित शोषण मुक्ति मंच ने 19 जुलाई की शाम को विरोध मार्च निकाला. यह मार्च झुमरीतिलैया के पानी टंकी रोड से शुरू हुआ. विरोध मार्च मुख्य सड़कों से होते हुए झंडा पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया.

विरोध मार्च में कार्यकर्ता संसद के अंदर दलित नेताओं का अपमान करना बंद करो, जनादेश के नाम पर दादागिरी बंद करो, संसद एवं सड़कों पर लोकतंत्र को बहाल करो, सहारनपुर के दलितों को इंसाफ दो आदि नारे लगाए. विरोध मार्च का नेतृत्व मंच के संयोजक प्रेम प्रकाश, वार्ड पार्षद घनश्याम तुरी, गणपत भुईयां, शंभू पासवान, सहदेव दास, बसंती देवी कर रहे थे.

इस दौरान आयोजित सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार भारी जनादेश के घमंड में लोकतंत्र को कुचलना चाह रही है. संसद के अंदर दलित नेता मायावती को सहारनपुर के दलितों की पीड़ा तक की बात रखने का मौका नहीं दिया. ऐसा करके सरकार अपने दलित विरोधी चेहरे को सामने लाई है. सरकार के एजेंडा में दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक एवं प्रगतिशील बौद्धिक तबके को बर्बाद करने पर तुली है.

गौरतलब है कि मायावती मानसून सत्र के दूसरे दिन सहारनपुर हिंसा पर अपनी बात रख रही थी. लेकिन राज्यसभा  के उपसभापति पीजे कुरियन ने उन्हें बोलने का मौक नहीं दिया. इससे नाराज होकर मायावती ने सभा में इस्तीफे की पेशकश की और शाम होते-होते उन्होंने सभापति को इस्तीफा दे दिया. लेकिन उस समय उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया. दो दिन बाद मायावती ने दोबार इस्तीफा दिया और सभापति ने उसे स्वीकार कर लिया.

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