दो दिन दलित को थाने में पुलिस ने बर्बरता से पीटा, बाद में बताया निर्दोष

कोच्चि। सवर्णों को दलित अब इतने खटकने लगे है कि जुर्म कोई भी करें लेकिन आरोपी दलित को ही बनाएंगे. ऐसा ही एक मामला केरल के वेंदीपेरियार में हुआ. जहां की पुलिस ने पहले बेकसुर दलित को घर से उठाया और उसके बाद थाने में ले जाकर बर्बर अत्याचार किया. पुलिस ने दो दिन बाद दलित को छोड़ दिया और कहा कि हमने गलती से पकड़ लिया था. पीड़ित अब पेरंबवूर तालुक अस्पताल में भर्ती है.

पीड़ित मुरूकन के अनुसार, पुलिस ने उसे वेंदीपेरियारंद में रहने वाले उसके साले यहां से उठाया. रिश्तोंदारों के सामने ही उसे पुलिस ने मारापीटा और उसे नंगा किया. पुलिस स्टेशन ले जाते समय पुलिस ने बुरी तरह से पकड़ रखा था.

पुलिस स्टेशन पहुंचने पर सीनियर इंस्पेक्टर और अन्य पुलिस अधिकारी ने मुरूकन को निर्दयता के साथ मारा-पीटा. अगले दिन जब उसकी पत्नी और रिश्तेदार थाने में आए और पुलिस से पूछा कि कौन से केस मुरूकन को बंद किया है तो पुलिस ने कहा कि जिसे हम पकड़ रहे थे वो मुरूकन नहीं है और इसे गलती से पकड़ लाए.

अगले दिन दोपहर में मुरूकन को पुलिस ने छोड़ दिया. घर पहुंचने पर मुरूकन डरा-डरा और असहज महसूस कर रहा था. पुलिस ने उसकी बुरी तरह पिटाई की थी जिसके कारण उसके पूरे शरीर में दर्द हो रहा है. मुरूकन की पत्नी और रिश्तेदार उसे पेरंबवूर तालुक अस्पताल ले गए जहां वह भर्ती है.

पीड़ित मुरूकन ने कहा कि पुलिस ने उसे डराया और धमकाया भी है. पुलिस ने उसे धमकी दी है कि अगर वह इस घटना की जानकारी मीडिया को देता है तो पुलिस उसे किसी और केस में आरोपी बनाकर जेल में भेज देगी.

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