दलित अस्मिता यात्रा का दूसरा दिन, 15 अगस्त को पहुंचेगी उना

अहमदाबाद। उना में दलित युवकों की पिटाई के बाद न्याय की मांग के लिए सैकड़ों दलितों और विभिन्न नागरिक अधिकार संगठनों के सदस्यों ने शुक्रवार को शहर से पैदल मार्च “दलित अस्मिता यात्रा” की शुरूआत की. गिर सोमनाथ जिले में उना शहर के वेजलपुर क्षेत्र से करीब 800 लोगों ने सुबह 380 किलोमीटर लंबी दस दिन की यात्रा की शुरूआत की. दलित अत्याचार संघर्ष समिति ने ऊना की घटना के विरोध में आंदोलन छेड़ रखा है. समिति के संयोजक जिगनेश मेवानी ने बताया कि दलितों के हित में कई मांगें रखी गई हैं. समिति की मांगों में गुजरात के भूमिहीन दलितों को पांच-पांच एकड़ जमीन, ऊना की घटना के पीड़ितों को न्याय, तय वेतन पर काम कर रहे राज्य के सफाईकर्मियों को स्थाई नियुक्ति करने आदि शामिल हैं.

जिग्नेश मेवानी ने कहा कि यह “अस्मिता यात्रा” देश भर के दलितों को पुरानी परंपराओं से आजादी की दिशा में पहला कदम है. हम अपनी यात्रा के दौरान दलितों से मृत जानवरों को उठाने के पारंपरिक काम को छोड़ने का आग्रह कर सरकार को एक कड़ा संदेश देना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य सरकार को यह संदेश देना है कि दलित अपने उपर किसी भी प्रकार अत्याचार नहीं सकेगा. अहमदाबाद वेजलपुर अंबेडकर चौक से शुरू हुई यात्रा धोलका, धंधूका, बोटाद, अमरेली, राजूला, सावरकुंडला होते हुए 14 अगस्त को उना पहुंचेगी. 15 अगस्त को ध्वजारोहण होगा.

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