पहले दलित के घर में आग लगाई, फिर पंचायत ने जबरन समझौता कराया

aagफरीदाबाद। सदर थाना क्षेत्र के नवादा गांव में बीते मंगलवार तड़के अज्ञात लोगों ने दलित के घर में आग लगा दी. आग के दौरान कुत्तों के भौंकने पर परिवार के लोग जाग गए. इस वजह से उन्होंने आग पर काबू पा लिया. आग से 2 चारपाई व भूसा जल गया. इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई. पुलिस ने जांच पड़ताल के बाद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया. दोपहर बाद गांव के लोगों की पंचायत हुई. जिसमें आरोपी व पीड़ित पक्ष के लोग शामिल हुए. पंचायत में हुए फैसले के बाद दलित परिवार ने अपना केस वापस लेने के लिए पुलिस को शपथ पत्र दे दिया. जिसके बाद पुलिस ने आगे की कार्रवाई रोक दी.

पुलिस के अनुसार नवादा गांव निवासी मामचंद की बेटी सपना ने दी शिकायत में बताया कि सोमवार रात को वह अपनी बहन शकुंत और उसके बच्चों के साथ घर में सोई हुई थी. परिवार के अन्य लोग अस्पताल गए थे. दिवाली के दिन गांव के कुछ लोगों ने उनके परिवार के लोगों को पीटकर घायल कर दिया था. सभी घायल अस्पताल में दाखिल हैं. सपना ने बताया कि मंगलवार तड़के करीब 3 बजे घर के बाहर बने चौक में जोर-जोर से कुत्ते भौंक रहे थे. इस पर सपना की नींद खुल गई और वह कुत्तों को हड़काने के लिए बाहर आ गई. तभी उसने देखा कि मकान के पास बने भूसे के कमरे में आग लगी हुई थी. आग से कमरे में रखी दो चारपाई जल चुकी थी.

सपना ने पुलिस को बताया कि घटनास्थल के पास से 3 युवक भाग रहे थे. आग लगने पर उसने शोर मचा दिया. जिस पर परिवार के लोग जाग गए और उन्होंने पानी आदि डालकर आग पर काबू पा लिया. सपना का कहना है कि 30 अक्टूबर को दिवाली के दिन नवादा गांव में रहने वाले भुप्पी, महेश, भारत, भीम, बिरन, हंसराज, बलराज व नफेसिंह आदि ने उसके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की थी. आरोप है कि इसी रंजिश में आरोपियों ने आग लगाई. रात को घटनास्थल पर दिखने वाले 3 लोग इन्हीं आरोपियों में से हैं. इस मामले की सूचना पुलिस को दी गई. सूचना पाकर एसीपी विष्णु दयाल व एसएचओ राजदीप मोर पुलिस बल के साथ पहुंच गए और घटना की गहनता से जांच की.

एसएचओ राजदीप मोर ने बताया कि सपना के बयान पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ विभिन्न आपराधिक धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया, मगर मंगलवार दोपहर के समय गांव में एक पंचायत हुई. पंचायत में गांव के सभी लोगों के अलावा पीड़ित और आरोपी पक्ष के लोग भी शामिल हुए. इस पंचायत के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस को दर्ज मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई न कराने के लिए शपथ पत्र दे दिया. इस वजह से कार्रवाई रोक दी गई है.

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