दलितों के सामाजिक बहिष्कार पर हाईकोर्ट ने पुलिस-प्रशासन को लगाई फटकार

हांसी। भाटला में दलितों के साथ सामाजिक बहिष्कार के मामले में हाइकोर्ट जस्टिस एबी चौधरी की अदालत में आज (24 अगस्त) को सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान जब हाइकोर्ट में अदालत ने सरकारी वकील से गांव भाटला में दलितों के सामाजिक बहिष्कार के बारे रिपोर्ट तलब की तो सरकारी वकील कोई रिपोर्ट पेश नही कर सके. जिस पर हाइकोर्ट के न्यायधीश गुस्सा हो गए तथा उन्होंने सरकारी वकील को कड़ी फटकार लगाई और कहा की प्रशासन को गांव में सामाजिक बहिष्कार रोकने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए थे.

कोर्ट ने कहा कि मौके पर डीसी और एसपी को किसी जन प्रतिनिधि के साथ जाना चाहिए था. पीड़ित पक्ष ने अदालत को बताया कि गांव में अभी तक सामाजिक बहिष्कार जारी है. उन्हें रोजमर्रा का सामान भी नहीं मिल पा रहा है. बच्चो को स्कूल जाने में भी परेशानी हो रही है. दलित कार्यकर्ताओ पर जूठे मुकदमे दर्ज किये जा रहे है.

हाइकोर्ट के 12 अगस्त के आदेश के बाद गांव में 19 अगस्त को केवल एसडीएम और डीएसपी नरेंद्र कादियान गये थे. पीड़ित पक्ष ने बताया कि गांव में वह डीएसपी गए थे जिनके खिलाफ दलित समुदाय ने पक्षपात की शिकायत कर रखी है. हाईकोर्ट ने सरकारी वकील पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह गलत है. आदेश दिए की अब इस मामले में हिसार के जिला और सत्र न्यायाधीश को कोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर उनसे ज्यूडिशल इन्क्वारी कराई जाएगी.

इस मामले में 25 अगस्त को जिला और सत्र न्यायाधीश गांव में जाकर रिपोर्ट तैयार करके सोमवार 28 अगस्त को अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करेंगे. ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क और नेशनल अलायन्स फॉर ह्यूमन राइट्स के संयोजक और अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि भाटला का अजय दहिया जो सामाजिक बहिष्कार के मामले में शिकायतकर्ता है, की और से ह्यूमन राइट्स लॉ नेटवर्क ने एक याचिका दायर की थी.

इस याचिका में अजय ने सामाजिक बहिष्कार के मामले में हांसी सदर थाना में दर्ज मुकदमे में हिसार के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बिमल कुमार के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमे सामाजिक बहिष्कार के भाटला निवासी एक आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी थी. अधिवक्ता कल्सन ने बताया कि याचिका पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट जनरल को अदालत में तलब कर सामाजिक बहिष्कार मामले को सामाजिक मध्यस्था से सुलझाने के आदेश दिए थे जिस पर एडवोकेट जनरल ने भी मामले को उच्चतम स्तर पर संज्ञान में लाकर सुलझने की बात कही थी.

अधिवक्ता रजत कल्सन ने बताया कि इसके बाद गांव में अगस्त को उपमंडल अधिकारी नागरिक हांसी और डी एस पी नरेंद्र कादियान गांव में आये थे और ग्रामीणों से बातचीत करके चले गए थे. इस आदेश के संज्ञान में आने के बाद आज हांसी अदालत परिसर में भाटला के दलित समाज को अपने चैम्बर में अधिवक्ता रजत कल्सन ने इस फैसले की जानकारी दी .

कल्सन ने दलित ग्रामीणों को बताया कि हिसार के सत्र और जिला न्यायाधीश इस बारे में जल्द ग्रामीणों से संपर्क कर सकते है. दलित ग्रामीणों ने कहा कि वे भाटला प्रकरण में हांसी पुलिस जिला के एसपी, एएसपी, डीएसपी और एसएचओ थाना सदर हांसी की नकारात्मक भूमिका की जानकारी देंगे जिन्होंने जात-पात की आग भड़काने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. दलित ग्रामीणों ने कहा कि तीनों मुकदमो के आरोपियो की गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे.

गौरतलब है कि हांसी के गांव भाटला में 15 जून को सार्वजनिक हैंडपंप से पानी भरने को लेकर दलित और ब्राह्मण लड़कों के बीच झगड़ा हुआ था. दलित समुदाय ने जब मारपीट और झगड़े की शिकायत पुलिस थाने में की तो ब्राह्मणों ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया. ब्राह्माणों ने दलितों के गली में चलने से, पशुओं को खेत में चराने से, तालाब में पशुओं को पानी पीने से रोक दिया. एक तरह से दलित समुदाय के लोगों का किसी भी सार्वजनिक जगह पर जाने से प्रतिबंध लगा दिया.

रजत कल्सन की रिपोर्ट

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