यहां सेक्शन से नहीं, जाति के हिसाब से होते हैं अलग टीचर और क्लास

ग्वालियर (एमपी)। शिवपुरी के ढकरौरा के प्रायमरी स्कूल में बच्चों के साथ भेदभाव का मामाल सामने आया है. यहां दलित और उच्च जाति के बच्चे एक साथ एक क्लास में बैठकर नहीं पढ़ते. इनको पढ़ाने के लिए शिक्षक भी अलग-अलग है. यही नहीं मिड डे मील को आदिवासी रसोइया बनाता है इसलिए दबंग बच्चे उसे खाते भी नहीं है. बीते शुक्रवार को (डिपार्टमेंट प्रोमोशन कमेटी) डीपीसी के शिरोमणि दुबे ने जब इस स्कूल को निरीक्षण किया तो इस बात का खुलासा हुआ. डीपीसी ने इस मामले में शिक्षकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा.

ढकरौरा प्रायमरी स्कूल का शुक्रवार को जब दो अलग-अलग कतारों में बच्चे बैठे दिखे उन्होंने इसका कारण पूछा तो शिक्षकों ने बताया कि गुर्जर समाज और आदिवासी बच्चे यहां अलग-अलग कतार में बैठाकर पढ़ाया जाता है. जब बच्चे से यह पूछा गया कि उसे पढ़ाने वाला अतिथि शिक्षक संग्राम भी आदिवासी ही हैं, तो उसने बेबाकी से जवाब दिया कि ये हमारे नहीं आदिवासियों बच्चों के शिक्षक है, हमें तो दूसरे शिक्षक पढ़ाते हैं.  जब मिड डे मील के बारे में पूछा तो गुर्जर समाज के बच्चों ने बताया कि वह स्कूल में मिड डे मील नहीं खाते हैं, क्योंकि वह आदिवासियों द्वारा बनाया गया है.

छात्र वकील गुर्जर का कहना था कि वह ऊंची जात के हैं, आदिवासियों के हाथ का बना खाना कैसे खा सकते हैं. आज बच्चे कम है इसलिए एख क्लास में बैठें, ज्यादा बच्चे आने पर अलग-अलग लगती है. रामवरण आदिवासी नाम के एक बच्चे ने बताया कि यदि वह गुर्जरों के बच्चों के साथ खेलते हैं या साथ बैठकर पढ़ने का प्रयास करते हैं तो उनके बीच झगड़ा हो जाता है. पूर्व में कई बार झगड़ा हो चुका है.

अतिथि शिक्षक संग्राम आदिवासी ने बताया कि बच्चों को कई बार समझाते है कि वह ऊंच-नीच, जात-पात की बात न करा करें, लेकिन वह मानते ही नहीं हैं. वह एसडीएम भी इसीलिए नहीं खातें है कि वह आदिवासी द्वारा बनाया जाता है.

निरीक्षण में यह बात मेरे संज्ञान में आई है, इस प्रकरण में शिक्षकों को नोटिस देकर जवाब तलब किया जा रहा है, यह पता लगाया जा रहा है कि आखिर यह स्थति क्यों बनी है. प्रथम दृष्टया शिक्षकों के निलंबन की कार्रवाई की जा  रही है.

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