दलित युवाओं ने सोशल मीडिया पर शुरू किया अनोखा कैंपेन

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नई दिल्ली। मूंछ रखने को लेकर एक दलित युवक के साथ मारपीट की घटना के बाद इस समाज के युवाओं ने सोशल मीडिया पर #DalitWithMoustache अभियान चला दिया है. इस घटना को लेकर आक्रोशित दलित युवाओं ने जबरदस्त विरोध दर्ज कराते हुए मूंछों के साथ अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाली है. यह अभियान इतना जोर पकड़ चुका है कि तमाम दलित युवाओं ने अपने फेसबुक और ट्विटर अकाउंट से दलित युवाओं से मूंछों वाली अपनी तस्वीर पोस्ट करने की अपील कर डाली है, जिसके बाद तमाम युवा इसमें जुट गए हैं.

गुजरात में घटी इस घटना का विरोध भी गुजरात के युवाओं ने ही किया. अहमदाबाद और गांधीनगर के दलित युवाओं ने सोशल मीडिया पर इस अनोखे कैंपेन की शुरुआत करते हुए अपनी मूंछों के साथ सेल्फी क्लिक करके पोस्ट करने लगे. फोटो के साथ वह जातिवाद ना विरोध मा (जातिवाद के विरोध में) पीयूष भाई ना समर्थन मा (पीयूष के समर्थन में) और संविधान ना समर्थन मा (संविधान के समर्थन में) जैसे हैशटैग का इस्तेमाल कर रहे हैं. गुजरात से शुरु हुए इस विरोध अभियान में देश भर के युवा शामिल हो गए.

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दिल्ली में रहने वाले सुमित चौहान नाम के युवा ने अपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा, ‘अहमदाबाद में स्टाइलिश मूंछ रखने पर दलित युवकों की पिटाई की गई. जातिवादियों की गुंडागर्दी का विरोध किजिए … आप सब अपनी फेसबुक वॉल पर अपनी मूंछों वाली फोटो अपलोड किजिए. हैशटैग लगाईये #DalitWithMoustache इस पोस्ट के ठीक बाद सुमित चौहान ने कोरियोग्राफर बिट्टो पंवार की फोटो सांझा करते हुए लिखा- इतनी शान वाली मूछें देखकर तो राख हो जाओगे जातिवादियों.’

जितेन्द्र चंदेलकर ने #DalitWithMoustache हैसटैग के साथ एक फोटो साझा करते हुए लिखा- ‘दलितों की मूंछो से जलने वालों ये लो और जलो.. इस फोटो में मूंछ भी है, और हमारे प्यारे बाबासाहेब भी’. तो वहीं विकास दयाल ने लिखा- ‘महाराष्ट्र वालो मेरी भी मूंछे हैं….. गलत नियत नहीं मानविय धारणा को जगाओ.’

घटना गुजरात की राजधानी गांधीनगर से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर लिंबोदरा गांव में घटी. 25 सितंबर को गांव के ही पीयूष परमार और उसके भाई को मूंछे रखने की वज़ह से पीटा गया, जिससे वह बुरी तरह घायल हो गया. पीड़ित पीयूष के मुताबिक उसे सिर्फ इसलिए बुरी तरह पीटा गया क्योंकि उसने स्टाइलिश मूंछे रखी थी. दलित समाज के लोगों का आरोप है कि अक्सर ऊंची जाति के लोग उनके साथ मारपीट करते हैं. आरोपियों की पहचान मयूर सिंह वघेला, राहुल विक्रमसिंह और अजीत सिंह वघेला के रूप में हुई.

गुजरात में दलितों के खिलाफ अपराधों के ब्योरे पर नजर डालें तो NCRB के मुताबिक गुजरात में हर साल दलित उत्पीड़न की 1000 वारदातें होती हैं. जबकि रोजाना दलित उत्पीड़न के 3 मामले सामने आते हैं. 2014 में गुजरात में 1100 अत्याचार के मामले रजिस्टर किये गये थे, जो 2015 में बढ़कर 6655 हो गये थे.

जाहिर है कई ऐसे भी मामले हैं, जो दर्ज नहीं हो पाते हैं. हालांकि घटना के विरोध में जिस तरह दलित समाज के युवाओं ने विरोध दर्ज कराया है, उससे यह साफ हो गया है कि अब युवा अपने उपर हो रहे अत्याचारों को चुपचाप सहने को तैयार नहीं हैं.

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