न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है महादलित छात्र!

अरवल। सुशासन बाबू के राज में दलितों पर अत्याचार कम नहीं हो रहा है. बिहार में आए दिन दलितों से भेदभाव किया जा रहा है, उन्हें मारा-पीटा जा रहा है और जातिसूचक गालियां दी जा रही है. शिकायत करने पर न तो पुलिस कोई कार्रवाई कर रही है और न ही प्रशासन दलितों की मदद कर रहा है. सब सिर्फ जातिवादी गुंडों का साथ दे रहे हैं.

ऐसी ही एक घटना बिहार के अरवल जिले से आई है. कुर्था थाने के अंतर्गत आने वाले चमंडी गांव के पैक्स अध्यक्ष एवं सदस्य (तेल-राशन बांटने वाला डीलर) रंजीत कुमार ने महादलित छात्र अजय कुमार को शिकायत सभा में जिलापदाधिकारी के सामने पीटा और जातिसूचक गालियां दी.

पीड़ित छात्र अजय कुमार थाने में शिकायत करने गया तो कुर्था थानाध्यक्ष ने पहले तो शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया. बार-बार थाने के चक्कर काटने और पुलिस अधीक्षक से मिलने के बाद उसकी शिकायत दर्ज की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अजय ने फिर एससी/एसटी थाना में शिकायत की लेकिन वहां से भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है. आरोपी खुले आम गांव में घूम रहा है और पीड़ित छात्र के साथ-साथ उसके परिवार वालों पर भी केस वापस लेने का दबाव बना रहा है. परिवार के लोग भी जब उसका विरोध करते हैं तो वह उनको भी जातिसूचक गालियां और जान से मारने की धमकी देता है.

पीड़ित छात्र अजय ने बताया, “14 मई 2017 को गांव में जिलापदाधिकारी गांव के लोगों की समस्या सुनने आए हुए थे. मैंने जब जिलापदाधिकारी से गांव अपनी समस्या बताई तो पैक्स अध्यक्ष मुझे चुप कराने की कोशिश करने लगे. मैंने फिर भी गांव में मिलने वाले राशन की समस्या के बारे में बताया. जिलाधिकारी ने तो कहा कि हम जांच कर बीपीएल और एपीएल कार्ड का निर्धारण करेंगे. लेकिन पैक्स अध्यक्ष ने उन्हें जांच करने से मना कर दिया और कहा कि यहां सब एपीएल कार्डधारक है. सब अच्छा कमाते हैं, सबके बड़े घर हैं. लेकिन मैंने रंजीत कुमार की बातों का विरोध किया. जिसके बाद उसने मुझे मारना-पीटना शुरू कर दिया. और जाति सूचक गालियां भी दी. रास्ते में मेरे पिताजी को भी जातिसूचक गालियां और उनसे कहा कि अपने लड़कों को समझा लो. नेता बन रहा है.”

अजय ने पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न होने पर अरवल जिला के पुलिस अधिक्षक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बिहार के राज्यपाल, पुलिस महानिरिक्षक अपराध अनुसंधान (कमजोर वर्ग) और राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग को शिकायत पत्र लिखा है.

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