GST में बदलाव से 10 हजार करोड़ का घाटा

GST के टैक्स स्लैब में बदलाव करने से सरकारी खजाने की सेहत पर पड़ी है. जीएसटी में संशोधन के चलते पिछले महीने के मुकाबले इस बार सरकारी राजस्व को 10 हजार करोड़ का घाटा हुआ है. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि 27 नवंबर तक फाइल किए गए रिटर्न्स से सरकार को 83,346 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ है. यह राशि अक्टूबर में 95,131 करोड़ जबकि सितंबर में 93,141 करोड़ रुपये थी.

टैक्स कलेक्शन में आई यह कमी जीएसटी के स्लैब में परिवर्तन के चलते हुआ है. वित्त मंत्रालय के मुताबिक जीएसटी के अंतर्गत अब तक 95.9 लाख टैक्सपेयर्स रजिस्टर हो चुके हैं. इनमें से 15.1 लाख कम्पोजिशन डीलर्स हैं, जिन्हें हर तिमाही में रिटर्न फाइल करने होते हैं. अक्टूबर से 26 नवंबर तक 50.1 लाख जीएसटी रिटर्न्स फाइल हुए हैं.

केंद्र ने राज्यों को जुलाई और अगस्त महीने के लिए 10,806 करोड़ रुपये का मुआवजा भी जारी किया है. इसके अलावा राज्यों को सितंबर और अक्टूबर महीने के लिए 13,695 करोड़ रुपये कंपोजिशन के तौर पर जारी किए गए हैं. जीएसटी लागू होने के बाद यह चौथा महीना है. जीएसटी के अंतर्गत रेवन्यू में गिरावट को समझाते हुए मंत्रालय ने बताया कि शुरुआत में इंटीग्रेटेड जीएसटी गुड्स के एक राज्य से दूसरे राज्य में ट्रांसफर करने पर लिया जाता था. गौरतलब है कि जुलाई में सरकार को 95000 करोड़, जबकि अगस्त में 91000 करोड़ और सितंबर में 92150 करोड़ रुपये का कलेक्शन हुआ था.

राजस्व संग्रह में आई गिरावट के पीछे जीएसटी दर में कमी को मुख्य वजह बताया गया है. इसके अलावा कर प्रशासन इस समय कारोबारियों की स्व:घोषणा के आधार पर ही कर प्राप्ति कर रहा है. रिटर्न का मिलान, इलेक्ट्रानिक ट्रांजिट परमिट प्रणाली यानी ई-वे बिल और प्रतिकूल शुल्क वसूली जैसे कई प्रावधानों को आगे के लिये टाल दिया गया है. इसके अलावा जीएसटी लागू होने के शुरुआती तीन माह में एकीकृत जीएसटी यानी आईजीएसटी के रूप में अतिरिक्त कर वसूली हुई थी. आईजीएसटी के रूप में दिये गये कर को अब माल की अंतिम बिक्री होने पर उसका क्रेडिट लिया गया है. इससे भी कर वसूली में कम रही है.

जीएसटी लागू होने के बाद अब तक शुरुआती जीएसटीआर-3बी जुलाई में 58.7 लाख, अगस्त में 58.9 लाख, सितंबर में 57.3 लाख और अक्तूबर में 50.1 लाख दर्ज किये गये हैं.

जीएसटी परिषद ने 10 नवंबर को आम इस्तेमाल वाली 177 वस्तुओं पर कर दर को मौजूदा 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया था. 28 प्रतिशत के सर्वाधिक कर दर वाले स्लैब में वस्तुओं की संख्या को घटाकर सिर्फ 50 कर दिया जो कि पहले 227 थी. देश में जुलाई 2017 से जीएसटी के तहत 1200 से अधिक वस्तुओं और सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत कर की श्रेणी में लाया गया था.

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