बसपा समर्थक की पीड़ा, पार्ट- 2

मैंने फेसबुक पर बसपा की हार के कारणों को जानने के लिए अपने विचार दिये बहुत सारे लोगों ने मुझसे सहमति दिखाई लेकिन ऐसे भी लोग मिले जिन्होंने मुझे बसपा विरोधी के रूप में देखा। हद हो गई सारा जीवन मैंने बसपा को वोट दिया और अब यदि बसपा की हार के कारणों पर अपने विचार दे दिए वो भी बसपा के हित में तो मैं बसपा विरोधी हो गया।

ऐसे लोगों से मैं कहना चाहता हूं कि आप पहले तो बाबा साहब अंबेडकर की उस चेतावनी को याद करिए जो उन्होंने  hero worship के विरोध में 25 नवंबर 1949 के दिन संविधान सभा में अपने अंतिम भाषण में दी थी। एक बार सोचिए कि क्या आपको नहीं लगता है कि अब बहुजन समाज पार्टी को अपनी पुरानी बहुजन राजनीति की ओर लौटना चाहिए ?

याद करिए बहुजन समाज पार्टी के उस दौर को बहुजन समाज पार्टी में सोने लाल पटेल जी, जंग बहादुर पटेल जी, बलिहारी चौधरी जी, राजबहादुर प्रसाद जी, आरके चौधरी जी, श्यामलाल यादव जी, स्वामी प्रसाद मौर्य जी, सुखदेव राजभर जी, युगल किशोर जी, दारा सिंह चौहान जी, श्रीनाथ प्रसाद जी, रमाशंकर राजभर जी आदि जैसे लोग थे जो एक ओर बसपा की धुरी थे तो अपनी-अपनी जाति के मजबूत छत्रप भी थे।

इन नेताओं की बदौलत इनकी जाति अपना वजूद देखती थी बसपा में । मेरा अभी भी यह मानना है कि यदि बसपा अपने इस पुराने दौर में लौट गए और बहन जी इसी प्रकार के नए सिपहसालार बहुजन समाज के विभिन्न जातीय समूह से विकसित करें तो पूरे बहुजन समाज का भला होगा ।

मेरा आज भी यह मानना है कि बहुजन समाज पार्टी के अलावा अभी हमारे पास कोई और विकल्प नहीं है बस हमें बहन जी पर दबाव डालना है कि वह बसपा को पुराने स्वरूप में लेकर आएं। काम कठिन है लेकिन असंभव नहीं। आखिर कोशिश करने में क्या नुकसान है? मैं बसपा के समझदार कैडरों, कार्यकर्ताओं और शुभेच्छुओं से उम्मीद करता हूँ कि वे बसपा को उसके मूल चरित्र को अपनाने हेतु बाध्य करेंगे।

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