बसपा समर्थक की पीड़ा, पार्ट- 1

बहनजी सड़क पर उतर कर संघर्ष क्यों नहीं करती, रैली मे 6 लाख इकठ्ठा होते हैं, तो देशभर से कितने लोग बहनजी को सपोर्ट करने जायेंगे। जरा सोचो देशभर से 25 लाख लोग बहनजी के साथ लखनऊ के सड़क पर मार्च करेंगे, तो लखनऊ में सरकार को पैरामिलिटरी फोर्स लगानी पडे़गी और तब देश में ही नहीं विदेश में भी ईवीएम के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन होगा, जिसे राष्ट्रपति ही नहीं बल्कि माननीय सुप्रीम कोर्ट भी नजरअंदाज नहीं कर सकेगा। अगर बहनजी केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मुद्दा उठायेगी तो ये टाईमपास के अलावा कुछ नहीं होगा।

ममता बेनर्जी को देखो, अपनी बात स्पष्टता से रखने के लिये मीडिया से ज्यादा सड़क पर अपने लोगों के साथ आंदोलन खड़ा करती हैं। सतीश मिश्रा बहनजी को केवल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने के लिए बोलेगा और बहनजी फिर इस पर विश्वास कर बहुजन आंदोलन को नहीं छेड़ पायेगी। बहनजी को ये ब्राह्मण लोग गुमराह कर रहे हैं। बहनजी कि संघर्ष शक्ति नष्ट होती जा रही है।

सारे नेता अपना संबोधन लोगों के सम्मुख रखते हैं। मगर बहनजी वही कागज लेकर मिडिया और लोगों को संबोधित करती हैं। पार्लियामेंट में बहनजी सीधी बात करती हैं मगर अपने लोगों के बीच ऐसा क्यों नहीं करती।

बहनजी को सभी पुराने नेता, कैडर और कार्यकर्ता जो देशभर में बसपा को छोड़ गये उन्हें पार्टी में ससम्मान वापस बुलाना चाहिये और मुव्हमेंट को सर्वजन से बहुजन कि तरफ मोड़कर सतीश मिश्रा सहित सभी बामनो को बाहर का रास्ता दिखाना चाहिये, वरना द एंड।

बिना समय गवाये, बहनजी तुरंत लखनऊ कि सड़क पर उतर आये वरना दो दिन बाद, ये मसला शांत होगा। कोई अर्थ नहीं फेसबुक और व्हाट्स एप पर लड़ाई लड़ने का। जिला लेवल पर प्रदर्शन करने से कुछ होने वाला नहीं है। बड़ी नेता है बहनजी तो बड़ा आंदोलन करना होगा, लिगल और ईलिगल…..                                                              लेखक लखनऊ में एम. टेक के छात्र हैं

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