दलित नेता ने उद्घाटन किया, कांग्रेसी सासंद ने गंगाजल से धुलवाया

भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में कांग्रेस और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के बीच दलितों के मुद्दे पर जारी हंगामे पर बहुजन समाज पार्टी ने सरकार की नीयत पर सवाल खड़े किए हैं.

बसपा विधायकों ने आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार दलितों के नाम पर सदन में ढोंग कर रही है. बसपा विधायक ऊषा चौधरी के मुताबिक जब देश में बाबासाहेब अम्बेडकर की प्रतिमाओं का अपमान किया जाता है तब बीजेपी के नेता आवाज नहीं उठाते लेकिन सियासी फायदे को देखते हुए अब दलितों के मुद्दे पर हंगामा खड़ा कर रहे हैं.

दरअसल, भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया पर दलित का अपमान करने का आरोप लगा रही है और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी कर रही है. भोपाल के अशोक नगर में ट्रॉमा सेंटर को कथित तौर पर गंगाजल से धुलवाने का आरोप लगाकर सोमवार को विधानसभा में शोर-शराबा हुआ. भाजपा विधायक और मंत्रियों ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को दलित विरोधी करार देते हुए कांग्रेस से माफी मांगने की मांग की.

उधर, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे मुद्दों से ध्यान हटाने का सरकार का षड्यंत्र करार दिया. शोर-शराबा इतना हुआ कि अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा को तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी.

प्रश्नकाल के दौरान भाजपा के रामेश्वर शर्मा ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि गोपीलाल जाटव हमारे अशोक नगर से विधायक हैं. उन्होंने वहां ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन किया. कांग्रेस के सांसद ने उसे धुलवाया. ये दलितों का घोर अपमान है.

सत्तापक्ष के लोग बार-बार ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम लेने लगे तो अजय सिंह ने कहा कि आपके लोगों ने राज्यसभा में मायावती को बोलने नहीं दिया. वे हिंदुस्तान में दलित वर्ग की सबसे बड़ी नेता हैं.

सिंधिया के ट्रॉमा सेंट्रर को धुलवाने को अनुसूचित जाति की अस्मिता से जोड़ते हुए डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने कहा कि मैं नेता प्रतिपक्ष की हैसियत से उस कुर्सी पर बैठता था, क्या उसे गंगाजल से धुलवाएंगे. इस पर नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कहा कि मुझे आपकी कुर्सी पर बैठने में गर्व है.

विधानसभा में दलित अपमान का मुद्दा उठाने वाले रामेश्वर शर्मा ने कहा कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति और विधायक का अपमान होगा. गोपीलाल जाटव नहीं आए. उन्हें सदमा न लग जाए. उन्होंने मांग रखी कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को सदन में बुलाया जाए. कटघरे में खड़ा कर उनसे माफी मंगवाई जाए. मैं निंदा प्रस्ताव रखता हूं.

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