ब्लू व्हेल गेम की चपेट में 30 आदिवासी बच्चे

दंतेवाड़ा। ब्लू व्हेल गेम देश भर में अपने पैर पसार रही है. अब तक कई बच्चे ब्लू व्हेल गेम के कारण सुसाइड कर चुके हैं. जिन बच्चों ने सुसाइड किया है, उनमें ज्यादातर शहरी इलाकों में रहने वाले हैं. लेकिन अब ये गेम देश के दूर दराज के इलाकों में भी फैल चुका है.

ब्लू व्हेल गेम अब आदिवासी लड़कों को भी अपने चपेट में ले रही है. छ्त्तीसगढ़ के दंतेवाडा़ के एक सरकारी स्कूल में 30 बच्चों को ब्लू व्हेल गेम से बचाया गया. स्कूल ने पुलिस को जानकारी दी थी कि स्टूडेंट्स ने ब्लेड व अन्य धारदार चीजों का इस्तेमाल कर अपनी बांह में व्हेल की शेप के डिजाइन बनाए हैं.

अस्सिटेंट सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस अभिषेक पल्लव ने कहा, छात्र ब्लू व्हेल गेम का देसी वर्जन खेल रहे थे. छात्रों का कहना है कि इससे उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सॉल्व हो सकती हैं. बच्चों को काउंसलिंग के लिए भेज दिया गया है.

सरकार ने भी इस मामले में एडवाइजरी जारी कर दी है. वहीं पुलिस बच्चों भी ब्लू व्हेल गेम से दूर रखने के लिए स्कूलों के साथ मिलकर काम कर रही है. हालांकि मोबाइल फोनों की बढ़ती पहुंच और बच्चों में बढ़ती जिज्ञासा के कारण प्रशासन के लिए इसे रोक पाना बड़ा चैलेंज बनता जा रहा है.

पल्लव ने कहा कि एक बच्चे ने बताया कि अगर वो ये गेम खेलेगा, तो उसके पिता शराब छोड़ देंगे. वहीं एक और छात्र ने बताया कि वो अपने पिता को उसकी जबरन शादी कराने से रोकना चाहता है. बच्चों को इंटरनेट और अखबार के जरिए देम के बारे में पता चला होगा. ऐसा लग रहा है कि कोई एक बच्चा दूसरों को गेम के बारे में गाइड कर रहा है. बच्चो बता रहे हैं कि अपने आपको चोट पहुंचाने से उनकी पर्सनल प्रॉब्लम सुलझ रही हैं.

ब्लू व्हेल चैलेंज एक ऐसा ‘सुसाइड गेम’ है, जिसने आजकल सोशल नेटवर्क पर खूब हड़कंप मचाया हुआ है. 4 साल पुराना यह ऑनलाइन गेम महज 50 दिन में आपको अपने वश में कर के या तो बिल्डिंग से छलांग मारने के लिए मजबूर कर देता है, या फिर किसी पुल पर चढ़कर या ट्रेन के नीचे आकर खुदकुशी करने के लिए उकसाता है.

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