सकलदीप बिना देखे गरीब छात्रों के जीवन में भर रहे हैं रौशनी

सकलदीप शर्मा

गोपालगंज। गोपालगंज शहर से 6 किलोमीटर दूर पश्चिम दिशा में एक छोटा सा गांव है कोन्हवा. उस गांव के नेत्रहीन सकलदीप शर्मा बच्चों को शिक्षित कर उनके जीवन में उजियारा लाने की कोशिश कर रहे हैं. सबको यकीन नहीं होगा कि जिसे खुद आंखो से दिखाई नहीं देता, वह दूसरों को कैसे पढ़ा सकता है. लेकिन यह हकीकत है. इसे कुदरत का चमत्कार कहें या सकलदीप की जिद्द, बोर्ड पर जब वे कुछ लिखते हैं तो एक शब्द गलत नहीं होता.

मई 1991 से सकलदीप को सिरदर्द परेशान करने लगा. दर्द जब असहनीय हो गया तो उनके पिता रामाशीष मिस्त्री, जो की इण्डियन आर्मी में जवान थे उन्हें दिल्ली एम्स में लेकर गए. कई तरह की जांच के बाद डॉक्टरों ने सकलदीप के पिता को बताया कि उन्हें ब्रेन ट्यूमर है और बिना देर किये ऑपरेशन करना होगा. तब तक सकलदीप की एक आंख की रौशनी पूरी तरह जा चुकी थी. वे हाई स्कूल की परीक्षा में भी नहीं बैठ सके.

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कुछ दिनों बाद ऑपरेशन करके ट्यूमर को निकाला गया. उनके प्राण तो बच गए लेकिन दोनों आंखों की रौशनी हमेशा के लिए चली गयी. कुछ समय बाद उनके पिताजी का भी देहांत हो गया. यहां से शुरु हुई सकलदीप की जिन्दगी के साथ जंग. सकलदीप बताते हैं कि कुछ नहीं समझ पा रहे थे वे कि आखिर करें तो क्या. कई-कई रातें उनकी पलकें तक नहीं झपकती थीं. अन्दर से वे बहुत टूट चुके थे लेकिन हौसला नहीं छोड़ा.

एक दिन उन्होंने बच्चों को पढ़ाने का निश्चय कर लिया. कितने दिनों तक अकेले अभ्यास किया लिखने का. जैसे-जैसे प्रयास सफल होता गया, उनकी हिम्मत भी बढ़ती गयी. आज वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ भी लिख लेते हैं. दुर्भाग्य से वे मैट्रिक की परीक्षा में तो शामिल नहीं हो सके, लेकिन उन्होंने तैयारी पूरी कर ली थी. खासकर गणित विषय की.

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आज उनके पास पढ़ने के लिए लगभग 30 बच्चे आते हैं. जिनमें से आधे से अधिक हाई स्कूल के विद्यार्थी हैं. उनके कुछ स्टूडेंट को स्कॉलरशिप भी मिल चुका है. सकलदीप कितने नेक इंसान हैं, यह बात वे अभिभावक ही बता पाएंगे जिनके पास अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पैसे नहीं हैं. खुद आर्थिक तंगी झेल रहे सकलदीप शर्मा ने पूरे गांव के लोगों से कह रखा है कि जिन बच्चों के माता-पिता अपने बच्चों को पढ़ाने में सक्षम नहीं हैं, वे उनके बच्चों को निःशुल्क पढ़ाएंगे.

सकलदीप की बौद्धिक क्षमता इतनी बढ़ चुकी है कि वे किसी भी विषय को आसानी से कविता का रुप दे सकते हैं. उनके द्वारा रचित पचास पन्नों की कविता का एक संग्रह तैयार है. जिसमें उन्होंने देशभक्ति, आध्यात्मिकता, शिक्षा और समाजिक विसंगतियों को छूने की कोशिश की है. बहुत जल्द उनकी कविताओं का लोकार्पण होगा.

प्रेम प्रकाश की रिपोर्ट

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